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Kerala: मिलिए केरल की 35 साल की शायजा से, जो देती हैं अपनी मूंछों पर ताव
Tue, 26 Jul 2022 02:48 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव
Updated Tue, 26 Jul 2022 02:48 PM IST
सार
शायजा बताती हैं कि आम महिलाओं की तरह उनके भी अपर लिप्स में बाल आते थे, लेकिन उनमें इसकी ग्रोथ ज्यादा थी। इसके लिए उन्हें नियमित रूप से थ्रेडिंग करनी पड़ी थी।
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शायजा
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
पुरुषों में दाढ़ी-मूंछ होना स्वभाविक है। आज कल तो यह स्टेटस सिंबल भी बन गया है। लोग बढ़ी-बढ़ी बियर्ड और मूंछ रखने लगे हैं। जिन लड़कों में इसकी ग्रोथ कम होती है, वे शर्मिंदगी महसूस करते हैं, लेकिन क्या कभी आपने किसी महिला को मूंछ या दाढ़ी रखे हुए देखा है। सुनने या पढ़ने में जरूर अजीब लगेगा, लेकिन केरल के कन्नूर की रहने वाली शायजा ऐसी ही महिला हैं, जिन्हें मूंछ रखना पसंद है। उन्होंने पिछले पांच साल से अपनी मूंछ नहीं कटवाई है और शान से मूंछों पर ताव देती हैं।
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35 साल की शायजा को मूंछ रखने के कारण मजाक का पात्र बनना पड़ा। लोग उन्हें हीन भावना से देखते थे, यहां तक कि उनसे दूरी भी बनाकर रखते थे। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और मूंछे रखीं। अब शायजा को लोग इसी रूप में पसंद करने और अपनाने लगे हैं।
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क्यों रखने लगीं मूंछ
शायजा बताती हैं कि आम महिलाओं की तरह उनके भी अपर लिप्स में बाल आते थे, लेकिन उनमें इसकी ग्रोथ ज्यादा थी। इसके लिए उन्हें नियमित रूप से थ्रेडिंग करनी पड़ी थी। हालांकि, पांच साल पहले उन्हें अपने मूंछ के बाल मोटे होना महसूस हुए, जिसके बाद उन्होंने मूंछ रखने की ठानी। शायजा बताती हैं कि उन्होंने पिछले पांच साल से मूंछों के बाल नहीं कटवाए हैं। वह बताती हैं कई लोगों ने मुझसे मूंछ कटवाने को कहा, लेकिन उन्होंने इसे न कटवाने का फैसला किया। वह कहती हैं कि मैंने कभी भी ऐसा महसूस नहीं किया कि मैं सुंदर नहीं हूं।
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लोगों के मिले ताने, लेकिन परिवार का समर्थन
शायजा बताती हैं कि उन्हें लोगों के ताने सुनने पड़े, लेकिन इसका उन पर असर न हुआ। दरअसल, उन्हें अपने परिवार व बेटी से बहुत समर्थन मिला। वह बताती हैं कि मेरी बेटी अक्सर मुझसे कहती है कि उन पर मूंछ अच्छी लग रही है। दरअसल, शायजा की अलग-अलग बीमारियों के कारण छह सर्जरी हो चुकी हैं। वह कहती थीं कि मैं हर बार सोचती थी कि इसके बाद मुझे कोई समस्या नहीं होगी, लेकिन हर बार अस्पताल जाने से उनमें आत्मविश्वास आया और उन्होंने तय किया कि जिंदगी जैसी है, उसे वैसे ही जीना चाहिए।