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इन गलतियों से हुई केरल की त्रासदी, 7 साल पहले ही मिली थी चेतावनी

Sun, 19 Aug 2018 11:38 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि Updated Sun, 19 Aug 2018 11:38 AM IST
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Kerala tragedy cause of these mistakes, Warning get 7 years ago

केरल में मानसून के दौरान अन्य राज्यों की तुलना में अधिक बारिश होना सामान्य बात है। भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक इस साल केरल में कम दबाव के कारण सामान्य से 37% ज्यादा बारिश हुई है। पर्यावरण वैज्ञानिक इस आपदा के लिए राज्य में तेजी से हुई वनों की कटाई और पारिस्थितिक रूप से नाजुक पर्वत श्रृंखलाओं की देखभाल में सरकार की विफलता को जिम्मेदार बता रहे हैं।

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17 दिन में 170% ज्यादा बारिश, राज्य के 36 बड़े डैम के सभी फाटक खोले, 10 दिन में 194 मौत

इकोलॉजिस्ट पैनल ने 2011 में नदियों के पास खनन और अवैध निर्माण बंद करने को कहा था


केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन का कहना है कि राज्य की स्थिति इतनी ज्यादा खराब होने के लिए पड़ोसी राज्यों की सरकारें भी जिम्मेदार हैं। हाल में विजयन और तमिलनाडु के सीएम पलानीसामी के बीच बांध से पानी छोड़े जाने को लेकर कहासुनी भी हुई थी। तमिलनाडु ने 20 अगस्त को एक और डैम से पानी छोड़ने का ऐलान किया है। इकोलॉजिस्ट माधव गाडगिल ने शनिवार को दावा किया कि केरल में भीषण बाढ़ और भूस्खलन की त्रासदी मानव निर्मित है।
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पर्यावरण वैज्ञानिक आपदा के लिए राज्य में तेजी से हुई पेड़ों की कटाई को बड़ी वजह बता रहे हैं

वेस्टर्न घाटस ईकोलॉजी एक्सपर्ट पैनल के प्रमुख रह चुके गाडगिल ने कहा कि नदियों के इलाके में अवैध निर्माण और पत्थरों के अनधिकृत खनन ने इस समस्या को विकराल बनाया है। सरकार द्वारा गठित इस पैनल ने 2011 में सौंपी रिपोर्ट में सिफारिश की थी कि पश्चिमी घाट के तहत आने वाले केरल के कई हिस्सों को ईकोलॉजी के लिहाज से संवेदनशील घोषित किया जाना चाहिए। हालांकि, राज्य सरकार ने इन सिफारिशों का विरोध किया था। गाडगिल ने कहा कि केरल में इस मौसम में हुई बारिश की मात्रा पूरी तरह अप्रत्याशित नहीं है, लेकिन इस बार हुई तबाही पहले कभी देखने को नहीं मिली।

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राहत और बचाव

25 करोड़ रुपए सबसे ज्यादा तेलंगाना ने दिए हैं।
आम आदमी पार्टी के सभी विधायक, सांसद, मंत्री, मुख्यमंत्री केरल को अपना एक-एक महीने का वेतन देंगे।
20 करोड़ रुपए महाराष्ट्र, यूपी ने 15 करोड़ दिए।
बिहार, गुजरात, हरियाणा, पंजाब और आंध्र प्रदेश ने 10-10 करोड़, तमिलनाडु, झारखंड और ओडिशा ने 5-5 करोड़ रुपए की मदद दी है।
40 हजार हेक्टेयर फसल तबाह हो चुकी है।
सभी मोबाइल ऑपरेटरों ने केरल में बाढ़ पीड़ितों के लिए मुफ्त एसएमएस और डेटा सेवाओं की पेशकश की है।
पंजाब ने एक लाख खाने के पैकेट और गुजरात ने पीने का पानी भेजा

सीएम ने स्थिति खराब होने के लिए पड़ोसी राज्यों को भी जिम्मेदार बताया

तमिलनाडु सरकार केरल को चावल, दूध, दूध पाउडर, चादर, कपड़े और दवाइयां भेजेगी। पंजाब ने एक लाख खाने के पैकेट से भरे ट्रक रवाना किए। कोचीन पोर्ट ट्रस्ट ने भी 5 कंटेनर रवाना किए। केरल भेजी जाने वाली सभी राहत सामग्री को रेलवे मुफ्त में पहुंचाएगा। पीने के पानी का इंतजाम करने के लिए पुणे से 14 ट्रेन भेजी गई हैं। गुजरात से भी 15 ट्रेन भेजी जा रही। ओडिशा ने 76 पावर बोट्स और 275 दमकल कर्मचारी केरल भेजे हैं।

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Kerala tragedy cause of these mistakes, Warning get 7 years ago
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गूगल बाढ़ में फंसे लोगों के लिए ऑफलाइन लोकेशन फीचर लाया

गूगल ने बाढ़ में फंसे लोगों के लिए कोड प्लस फीचर भी उपलब्ध कराया है। इसके माध्यम से ऑफलाइन रहकर भी गली के पते की लोकेशन शेयर हो सकेगी। यूजर को सिर्फ कॉल या एसएमएस भेजना होगा। प्लस कोड का कोड जगह की लोकेशन दिखाएगा। बाढ़ से केरल का पयर्टन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। खासकर मुन्नार में, जहां 12 साल बाद नीलकुरंजी के फूल खिले हैं। बारिश से वेस्टर्न घाट के इको सेंसटिव माउंटेन रेंज को भी नुकसान पहुंचा है।

कारण-1

जो डैम बाढ़ को मैनेज कर सकते थे, वो पहले ही खोले


केरल में 41 छोटी-बड़ी नदियों पर 80 बांध हैं, जिनमें 36 बड़े हैं। एक डैम सेफ्टी अफसर ने कहा कि बड़े डैमों से बाढ़ को मैनेज किया जाता रहा है। लेकिन, इस बार बारिश की चेतावनियों के चलते बड़े डैमों के गेट पहले ही खोल दिए गए। जबकि, इनमें भारी बारिश के दौरान पानी स्टोर किया जा सकता था। बारिश कुछ कम होने की स्थिति में धीरे-धीरे छोड़ा जा सकता था। जैसा कि पहले के वर्षों में किया जाता रहा है। एक दिन में 164% ज्यादा बारिश हुई, कुछ जगह तो 600% तक बारिश हुई।

कारण-2

जहां बिजली बनती है, उन डैमों में पानी भरने दिया गया


बाढ़ की स्थिति जुलाई में ही बन गई थी। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन जारी था, खासकर कोझिकोड और इडुक्की में। जुलाई मध्य तक इडुक्की और इदामालय के डैम 50% भर गए। फिर एक पखवाड़े में पूरी तरह भर गए। बिजली बोर्ड ने इनके भरने का इंतजार इसलिए किया, क्योंकि अधिक बिजली पैदा कर ज्यादा पैसे कमा सके। डैम ओवरफ्लो होने लगे और बारिश भी नहीं थमी तो इन्हें खोलना पड़ा, जिससे तबाही ज्यादा हुई।

कारण-3

डैम के गेट खोलने से पहले चेतावनी भी जारी नहीं की


स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स में वायनाड जिले के लोगों के हवाले से कहा गया है कि स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड ने बानासुरासागर डैम से पानी छोड़ने से पहले अलर्ट तक जारी नहीं किया। इससे लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचने का समय नहीं मिला। मुल्लापेरियार डैम के आसपास के लोग भी कहते हैं कि पड़ोसी राज्य तमिलनाडु ने गेट खोलने से पहले चेतावनी जारी नहीं की। इससे इडुक्की रिजर्वायर में बाढ़ आ गई। 40 हजार हेक्टेयर से ज्यादा फसलें, 1000 से ज्यादा घर तबाह, 134 पुलों को नुकसान, पीने का पानी लगभग खत्म।

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Kerala tragedy cause of these mistakes, Warning get 7 years ago
एनडीआरएफ का सबसे बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन
 
केरल के 14 में से 11 जिलों में रेड अलर्ट, मृतक संख्या 194 हुई, 36 से ज्यादा लापता
3.53 लाख लोग 3,026 कैंपों में पहुंचाए, 24 घंटे में 82 हजार लोगों को बचाया गया
58 एनडीआरएफ टीमें, 150 से ज्यादा दल सेना के जुटे
24 एयरक्राफ्ट, 68 हेलिकॉप्टर, तीन जहाज कोस्टगार्ड के, 40 हजार पुलिसकर्मी और 3200 फायर टेंडर बचाव कार्य में लगे हैं। सेना ने 13 अस्थाई पुल बनाकर 38 इलाकों को फिर से जोड़ दिया है।

औसत
82 टीमें नौसेना की
13 टीमें वायुसेना की
18 टीमें थलसेना की
42 टीमें कोस्ट गार्ड की
(हर टीम में लगभग 40 जवान)
 

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