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Kerala Teen Diet: 18 साल की लड़की को मोटापे पर चिढ़ाते थे लोग, शर्मिंदगी के कारण अत्यधिक डाइटिंग से हुई मौत

Wed, 12 Mar 2025 03:57 AM IST
दीपक कुमार शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कन्नूर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कन्नूर Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Wed, 12 Mar 2025 03:57 AM IST
सार

लड़की का इलाज करने वाले डॉक्टरों ने उसके माता पिता के हवाले से कहा कि श्रीनंदा ने बॉडी शेमिंग के बाद वजन कम करने के लिए यूट्यूब से डाइट संबंधी सलाह ली थी। उनके डॉक्टर, डॉ. नागेश मनोहर प्रभु ने बताया कि श्रीनंदा की स्थिति एनोरेक्सिया नर्वोसा से जुड़ी हुई थी, जो एक गंभीर खाने की बीमारी है। 

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Kerala teen extreme dieting death after alleged body-shaming in Kannur
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केरल में अत्यधिक डाइटिंग के चलते एक 18 वर्षीय लड़की की मौत का मामला सामने आया है। उसके मोटापे को लेकर लोग उसे चिढ़ाते थे। अत्यधिक डाइटिंग के कारण उसे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा और उसे थालास्सेरी को-ऑपरेटिव अस्पताल में भर्ती कराया। जहां इलाज के दौरान बीते शनिवार को उसकी मौत हो गई। मृतका की पहचान श्रीनंदा निवासी कन्नूर के कुथुपरम्बा के रूप में हुई है। 

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लड़की का इलाज करने वाले डॉक्टरों ने उसके माता पिता के हवाले से कहा कि श्रीनंदा ने बॉडी शेमिंग के बाद वजन कम करने के लिए यूट्यूब से डाइट संबंधी सलाह ली थी। उनके डॉक्टर, डॉ. नागेश मनोहर प्रभु ने बताया कि श्रीनंदा की स्थिति एनोरेक्सिया नर्वोसा से जुड़ी हुई थी, जो एक गंभीर खाने की बीमारी है। इसमें लोग अत्यधिक भोजन परहेज करते हैं और वजन बढ़ने का डर रखते हैं।
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पानी पीने में कठिनाई होने पर अस्पताल में भर्ती कराया
श्रीनंदा ने अपने आहार में काफी कमी की थी। पहले, उन्हें पानी पीने में कठिनाई के कारण कोझीकोड के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया। वहां के डॉक्टरों ने उनके माता-पिता को मनोचिकित्सक से मिलने की सलाह दी, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया। अंततः, जब उन्हें खाने में कठिनाई हुई, तो उन्हें थालास्सेरी सहकारी अस्पताल लाया गया।
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कुपोषण के कारण मांसपेशियों में आई कमी
डॉ. प्रभु ने कहा, 'जब उसे भर्ती किया गया, तो उसका रक्तचाप 70, ऑक्सीजन स्तर 70-72 और रक्त शर्करा 45 था। उसके सोडियम और पोटेशियम का स्तर भी गंभीर रूप से कम था।' डॉ. प्रभु ने बताया कि वजन घटाने की अपनी दिनचर्या के कारण लंबे समय तक कुपोषण के कारण उसकी मांसपेशियों में काफी कमी आई थी।

अस्पताल लाने के समय 25 किलोग्राम था वजन
श्रीनंदा की केस हिस्ट्री की समीक्षा करते हुए डॉक्टरों ने उसकी पुरानी तस्वीरों की जांच की। इस दौरान डॉक्टरों ने पाया कि उसका वजन पहले लगभग 50 किलोग्राम था, लेकिन अस्पताल में लाने के समय उसका वजन 25 किलोग्राम से भी कम था। वह तीन महीने के अंदर इस गंभीर अवस्था में पहुंच गई। 


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छह महीने पहले वजन घटाना शुरू किया था
डॉक्टर के अनुसार, श्रीनंदा के माता-पिता ने बताया कि उसने छह महीने पहले अपना वजन घटाने का कार्यक्रम शुरू किया था, और धीरे-धीरे खाना कम करना शुरू किया था। माता-पिता को तब एहसास हुआ जब उसने पानी पीना बंद कर दिया, तब उन्होंने चिकित्सा सहायता मांगी।

माता-पिता को नहीं था मानसिक स्थिति का एहसास
डॉ प्रभु ने कहा कि माता-पिता को यह एहसास नहीं था कि यह एक मानसिक स्थिति है। उन्होंने मान लिया कि यह सिर्फ यू-ट्यूब का प्रभाव है। यह एनोरेक्सिया नर्वोसा का मामला था, जिसका शुरुआती चरणों में पता लगने पर इलाज किया जा सकता था। उन्होंने बताया कि लड़की बोलने की स्थिति में नहीं थी, और सारी जानकारी उसके माता-पिता ने दी थी। 


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