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Syro Malabar: बिशप राफेल थट्टिल केरल के प्रभावशाली चर्च के प्रमुख व मेजर आर्कबिशप बने, पोप फ्रांसिस की मंजूरी

Wed, 10 Jan 2024 10:46 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम Published by: ज्योति भास्कर Updated Wed, 10 Jan 2024 10:46 PM IST
सार

केरल की प्रभावशाली चर्च- सायरो मालाबार चर्च में बिशप राफेल थट्टिल को मेजर आर्कबिशप नियुक्त किया गया है। फिलहाल तेलंगाना के शमशाबाद में पदस्थापित राफेल थट्टिल को सायरो मालाबार चर्च का प्रमुख भी बनाया गया है। इसे पोप फ्रांसिस ने भी मंजूरी दी है।

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Kerala Syro Malabar Church Raphael Thattil Major Archbishop Pope Francis approved
पोप फ्रांसिस (फाइल) - फोटो : social media

विस्तार

केरल के प्रभावशाली सायरो-मालाबार चर्च के प्रमुख के रूप में बिशप राफेल थट्टिल को नियुक्त किया गया है। चर्च के अधिकारियों ने बताया कि कैथोलिक चर्च के पदाधिकारियों के मामले में थट्टिल की नियुक्ति बेहद अहम है। बीते दिसंबर में कार्डिनल जॉर्ज एलेनचेरी के पद छोड़ने के बाद सिरो मालाबार चर्च के प्रमुख का पद खाली था। 11 जनवरी को कक्कानाड के मेजर आर्चीपिस्कोपल कुरिया में वह पदभार ग्रहण करेंगे। सिरो-मालाबार चर्च माउंट सेंट थॉमस में गुरुवार दोपहर समारोह आयोजित किया जाएगा।
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बयान के मुताबिक बिशप राफेल थट्टिल, फिलहाल तेलंगाना के शमशाबाद सूबे में पदस्थापित हैं। अब वे केरल के प्रभावशाली चर्च- सिरो-मालाबार के प्रमुख होंगे। फैसले के बारे में कार्डिनल जॉर्ज एलेनचेरी ने कहा कि पोप फ्रांसिस ने मेजर आर्कबिशप और सिरो-मालाबार चर्च के प्रमुख के रूप में राफेल थट्टिल की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है।
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बिशप राफेल को कैसे मिला नया पद, पहले से निर्धारित हैं नियम
पोप फ्रांसिस ने पूर्वी चर्चों के लिए बनाई गई कोड ऑफ कैनन्स (Code of Canons) के सिद्धांत 153 के तहत राफेल की नियुक्ति की पुष्टि की गई। कोच्चि के कक्कानाड स्थित माउंट सेंट थॉमस में आयोजित एक बैठक के बाद राफेल को शीर्ष पद के लिए चुना गया। सिरो-मालाबार चर्च के बिशपों की धर्मसभा में राफेल थट्टिल को सिरो-मालाबार चर्च का प्रमुख आर्कबिशप चुना गया।
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1956 में केरल के त्रिशूर में जन्म हुआ, 67 साल की आयु में सबसे बड़ा पद!
पोप फ्रांसिस की तरफ से नियुक्ति की पुष्टि होने के बाद बिशप राफेल ने  धर्मसभा के फादर (Synod Fathers) के सामने जरूरी रीति रिवाजों को संपन्न किया। इसके बाद धर्मसभा का चुनाव सत्र संपन्न हुआ जिसमें मौजूद फादर ने मेजर आर्कबिशप के रूप में बिशप राफेल के चुनाव की घोषणा की। राफेल का जन्म 21 अप्रैल 1956 को हुआ। ओसेफ और थ्रेसिया के घर जन्मे बिशप राफेल का बपतिस्मा संस्कार 30 अप्रैल, 1956 को केरल के ही त्रिशूर में हुआ था। 

फोटो में बाएं- कार्डिनल एलेनचेरी और दाहिने मेजर आर्कबिशप बने राफेल थट्टिल (ANI)

1980 में पादरी बने; इटली से पाई उच्च शिक्षा
त्रिशूर  के सेंट थॉमस कॉलेज हाई स्कूल में प्राथमिक शिक्षा के बाद राफेल थट्टिल 04 जुलाई, 1971 को थोपे स्थित सेंट मैरी माइनर सेमिनरी में शामिल हो गए। उन्होंने 1980 में कोट्टायम के सेंट थॉमस एपी सेमिनरी में दर्शनशास्त्र और धर्मशास्त्र का अध्ययन पूरा किया। 21 दिसंबर, 1980 को उन्हें विधिवत पादरी बनाया गया। उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा इटली की राजधानी रोम में हासिल की। इसके बाद ओरिएंटल कैनन लॉ (Oriental Canon Law) में डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की।


कई पदों पर सेवाएं दे चुके हैं
10 अप्रैल, 2010 को बिशप बने राफेल थट्टिल त्रिचूर के सहायक बिशप (Auxiliary Bishop) और ब्रूनी के टिटुलर बिशप (Titular Bishop) के रूप में नियुक्त किया गया था। 2014 में उन्हें अपोस्टोलिक विजिटर (Apostolic Visitor) के रूप में नियुक्त किया। इसका काम सिरो-मालाबार चर्च पर आस्था रखने, लेकिन टेरिटोरियम प्रोप्रियम के बाहर रहने वाले लोगों का ध्यान रखना था।

2017 में भी पोप फ्रांसिस ने की थी नियुक्ति
केरल में आर्कबिशप का पद मिलने से पहले पोप फ्रांसिस ने उन्हें 10 अक्तूबर, 2017 को शमशाबाद के सिरो-मालाबार कैथोलिक अधिवेशन का पहला बिशप नामित किया था। उन्होंने 7 जनवरी, 2018 को विधि-विधान से पद ग्रहण किया था। समाचार एजेंसी ANI के मुताबिक 11 जनवरी को दोपहर करीब ढाई बजे सिरो-मालाबार चर्च का शीर्ष पद ग्रहण करेंगे।
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