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लीबिया में रॉकेट हमले में भारतीय नर्स और उसके मासूम बेटे की मौत
एजेंसी/नई दिल्ली,कोच्चि
Updated Wed, 20 Jul 2016 04:57 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : AP/PTI
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गृहयुद्ध की आग में झुलस रहे लीबिया में काम कर रही भारतीय नर्स सुनू सत्यन और उसके डेढ़ साल के मासूम बच्चे की एक रॉकेट हमले में जान चली गई है। सुनू केरल की रहने वाली थी और लीबिया के जाविया शहर में एक अस्पताल में बतौर नर्स काम कर रही थी। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ट्वीट कर बताया कि सुनू सत्यन अपने परिवार के साथ लीबिया की राजधानी त्रिपोली से 45 किमी दूर जाविया शहर स्थित अपार्टमेंट में रहती थी। लीबिया में सरकार और विद्रोहियों के बीच लड़ाई चल रही है।
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शुक्रवार करीब शाम चार बजे उनके अपार्टमेंट में रॉकेट हमला हुआ, जिसमें सुनू सत्यन और उनके बेटे प्रणव की मौत हो गई। स्वराज ने बताया कि हम सुनू सत्यन के पति विपिन कुमार के साथ संपर्क में हैं। विपिन कुमार भी लीबिया के अस्पताल में बतौर नर्स काम करते हैं। हमले के वक्त वह अस्पताल चले गए थे, जिसके चलते जीवित बच गए। वहीं, सुनू के पिता सत्यन नायर ने बताया कि शुक्रवार को उनकी बेटी सुनू सत्यन और उसका बेटा लीबिया स्थित अपने घर में सो रहे थे, तभी एक विस्फोट हुआ।
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इसमें दोनों की मौत हो गई। केरल के कोट्टायम जिले के कोंडाडू से ताल्लुक रखने वाले नायर ने बताया कि उनकी बेटी सुनू लीबिया के जाविया मेडिकल सेंटर अज जाविया में नर्स के रूप में काम कर रही थी। नायर ने अपने दामाद विपिन की की सुरक्षा की भी मांग की है। नायर ने एमएलए मोन्स जोसेफ के माध्यम से केरल सरकार को पत्र लिखकर दोनों के शवों को वापस लाने में मदद की गुहार लगाई है।
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अगवा भारतीय पादरी को बचाने का हर संभव प्रयास जारी
वहीं यमन से अगवा किए गए भारतीय पादरी टॉम यूझूनलिल को बचाने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि यमन में भारत का कोई दूतावास नहीं है, लेकिन फिर भी पादरी को बचाने की हर संभव कोशिश की जा रही है।
शनिवार को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का यह बयान उन रिपोर्टों के एक दिन बाद आया है, जिनमें दावा किया गया था कि आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ने मूलत: केरल के पादरी यूझूनलिल को अगवा कर लिया है और आईएस उन्हें सूली पर चढ़ाने की तैयारी कर रहा है। हालांकि अभी तक पादरी को किसी भी तरह का नुकसान पहुंचाए जाने का कोई सबूत सामने नहीं आया है।
स्वराज ने कहा कि पादरी टॉम यूझूनलिल को यमन से एक आतंकी संगठन ने अगवा कर लिया था। हम उन्हें बचाने के लिए अपनी तरफ से हर कोशिश कर रहे हैं। बता दें कि इसी महीने इस्लामिक स्टेट ने एक शरणार्थी कैंप में हमला किया था और गार्ड समेत 16 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। मरने वालों में एक भारतीय नन समेत चार विदेशी नन भी शामिल थीं।
विदेश मंत्री ने लोगों से लीबिया के संघर्षरत इलाके से बाहर निकलने की ताजा अपील की है। उन्होंने बताया कि लीबिया के जाविया अस्पताल में काम कर रहे और 26 भारतीय अब भी फंसे हुए हैं।
विदेश मंत्री ने बताया, ‘हम कई दफा एडवाइजरी जारी कर चुके हैं। मैं एक बार फिर से भारतीयों से संघर्षरत इलाकों से बाहर निकलने की अपील करती हूं।’
शनिवार को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का यह बयान उन रिपोर्टों के एक दिन बाद आया है, जिनमें दावा किया गया था कि आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ने मूलत: केरल के पादरी यूझूनलिल को अगवा कर लिया है और आईएस उन्हें सूली पर चढ़ाने की तैयारी कर रहा है। हालांकि अभी तक पादरी को किसी भी तरह का नुकसान पहुंचाए जाने का कोई सबूत सामने नहीं आया है।
स्वराज ने कहा कि पादरी टॉम यूझूनलिल को यमन से एक आतंकी संगठन ने अगवा कर लिया था। हम उन्हें बचाने के लिए अपनी तरफ से हर कोशिश कर रहे हैं। बता दें कि इसी महीने इस्लामिक स्टेट ने एक शरणार्थी कैंप में हमला किया था और गार्ड समेत 16 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। मरने वालों में एक भारतीय नन समेत चार विदेशी नन भी शामिल थीं।
विदेश मंत्री ने लोगों से लीबिया के संघर्षरत इलाके से बाहर निकलने की ताजा अपील की है। उन्होंने बताया कि लीबिया के जाविया अस्पताल में काम कर रहे और 26 भारतीय अब भी फंसे हुए हैं।
विदेश मंत्री ने बताया, ‘हम कई दफा एडवाइजरी जारी कर चुके हैं। मैं एक बार फिर से भारतीयों से संघर्षरत इलाकों से बाहर निकलने की अपील करती हूं।’