Kerala: सबरीमाला मंदिर में सोने की चढ़ी तांबे की पट्टियों के वजन में कमी, केरल हाईकोर्ट ने जांच का आदेश दिया
केरल हाईकोर्ट ने सबरीमाला मंदिर की द्वारपालक प्रतिमाओं की सोने की तांबे की पट्टियों के वजन में कमी को गंभीर बताया है। साथ ही मामले में सख्ती दिखाते हुए जांच के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने त्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड को जांच में सहयोग के साथ तीन हफ्ते में रिपोर्ट देने का आदेश दिया है।
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केरल हाईकोर्ट ने बुधवार को सबरीमाला मंदिर के द्वारपालक प्रतिमाओं पर चढ़ी सोने की तांबे की पट्टियों के वजन में कमी को लेकर सख्त जांच का आदेश दिया है। कोर्ट ने मंदिर का संचालन करने वाले त्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड (टीडीबी) को जांच में पूरी मदद देने को कहा है। मामले में कोर्ट ने बताया कि जब ये सोने से चढ़ी तांबे की पट्टियां 2019 में नया सोना चढ़ाने के लिए हटाई गईं, तो उनका वजन 42.8 किलोग्राम था। लेकिन जब इन्हें फिर से सोना चढ़ाने वाली कंपनी को दिया गया, तो उनका वजन घटकर 38.258 किलोग्राम हो गया था। इस कमी की जानकारी टीडीबी के अधिकारियों ने नहीं दी।
तीन हफ्ते में रिपोर्ट देने के आदेश
मामले में कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए इस अनियमितता को गंभीर बताया और मुख्य सतर्कता एवं सुरक्षा अधिकारी को पूरी जांच कर तीन हफ्ते में रिपोर्ट देने का आदेश दिया। साथ ही टीडीबी को जांच में सहयोग करने के निर्देश भी दिए हैं।
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बता दें कि पिछले हफ्ते हाईकोर्ट ने टीडीबी को ये पट्टियां चेन्नई से वापस लाने का आदेश भी दिया था। साथ ही कोर्ट ने सुनवाई के दौरान द्वारपालक की मूर्तियों पर सोने की तांबे की पट्टियों की चढ़ाई से जुड़े सभी रिकॉर्ड तत्काल जब्त करने का आदेश दिए थे।
रिकॉर्ड की तत्काल जब्ती का आदेश क्यों?
इसको लेकर कोर्ट ने कहा था कि पूरी प्रक्रिया में कई सवाल अभी भी बिना जवाब के हैं और इसलिए रिकॉर्ड की तत्काल जब्ती जरूरी है, जिसमें सोने की चढ़ाई कब और कैसे की गई, इसका पूरा ब्यौरा होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि हम पुलिस विभाग के मुख्य अधीक्षक (विजिलेंस) और सुरक्षा अधिकारी को निर्देश देते हैं कि द्वारपालक, दरवाजे के ऊपर का हिस्सा, लक्ष्मी रूपम और कामनम जैसे सोने की चढ़ाई से जुड़े सारे दस्तावेज जब्त करें। इस दौरान कोर्ट ने ये भी साफ किया कि ये दस्तावेज उस दिन से होने चाहिए जब पहली बार ये काम हुआ था।
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