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Kerala High Court: 'सबरीमाला मंदिर के सामने मूर्तियों पर सोने की परत संबंधी रिकॉर्ड जब्त करें'; अदालत का आदेश

Fri, 12 Sep 2025 11:14 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम Published by: शुभम कुमार Updated Fri, 12 Sep 2025 11:14 PM IST
सार

केरल हाईकोर्ट ने सबरीमाला मंदिर के द्वारपालकों की सोने की परत चढ़ाई से जुड़े सभी रिकॉर्ड तुरंत जब्त करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने बिना स्पेशल कमिश्नर को बताए पट्टियां हटाने पर सवाल उठाए और पुलिस को पूरे दस्तावेज जब्त करने का निर्देश दिया। जांच अब उस दिन से शुरू होगी जब पहली बार चढ़ाई हुई थी।

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Kerala HC orders seizure of records related to gold-plating of idols in front of Sabarimala shrine
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI

विस्तार

केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार को सबरिमाला मंदिर के सामने स्थित द्वारपालक की मूर्तियों पर सोने की परत चढ़ाई मामले में बड़ा आदेश दिया है। इसके तहत कोर्ट ने मामले में सोने की चढ़ाई से जुड़े सभी रिकॉर्ड तत्काल जब्त करने का आदेश दिया है। मामले में सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति राजा विजयराघवन वी और केवी जयकुमार की बेंच ने यह निर्देश दिया। मामले में सवाल यह था कि बिना स्पेशल कमिश्नर, सबरीमाला को पहले बताए, द्वारपालकों पर लगी सोनाली ताम्र पट्टियां क्यों हटाई गईं।

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रिकॉर्ड की तत्काल जब्ती के आदेश
कोर्ट ने कहा कि पूरी प्रक्रिया में कई सवाल अभी भी बिना जवाब के हैं और इसलिए रिकॉर्ड की तत्काल जब्ती जरूरी है, जिसमें सोने की चढ़ाई कब और कैसे की गई, इसका पूरा ब्यौरा होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि हम पुलिस विभाग के मुख्य अधीक्षक (विजिलेंस) और सुरक्षा अधिकारी को निर्देश देते हैं कि द्वारपालक, दरवाजे के ऊपर का हिस्सा, लक्ष्मी रूपम और कामनम जैसे सोने की चढ़ाई से जुड़े सारे दस्तावेज जब्त करें। इस दौरान कोर्ट ने ये भी साफ किया कि ये दस्तावेज उस दिन से होने चाहिए जब पहली बार ये काम हुआ था।

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इन दस्तावेजों को भी रखना होगा सामने
मिली जानकारी के मुताबिक, ये सोने की चढ़ाई 2019 से भी पहले एक दशक से अधिक समय पहले की गई थी। ऐसे में पुलिस को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि जो दूसरा सेट द्वारपालकों का मजबूत कमरे में रखा है, उसके फाइल भी कोर्ट के सामने पेश किए जाएं। इसके अलावा कोर्ट ने उस फर्म और स्पॉन्सर को भी पक्षकार बनाया है, जिन्हें इस सोने की चढ़ाई का काम सौंपा गया था, ताकि मामले की पूरी स्पष्टता हो सके।

कोर्ट ने टीडीबी को दिए थे अहम निर्देश
बता दें कि यह आदेश ऐसे समय आया है जब दो दिन पहले कोर्ट ने त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) को निर्देश दिया था कि वे चेन्नई से सोने की चढ़ाई वाली ताम्र पट्टियों को वापस सबरिमला लेकर आएं। कोर्ट ने बोर्ड की आलोचना करते हुए कहा था कि बिना अनुमति के इस तरह की चीजें हटाना अनुचित है। हालांकि इससे पहले मंगलवार को बोर्ड ने मीडिया में आई खबरों का खंडन किया था, जिसमें कहा गया था कि सबरिमला मंदिर के द्वारपालकों की सोने की पट्टियां बिना अनुमति छन्नई भेजी गई हैं।



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हाईकोर्ट ने कहा- दिव्यांगजन को मंदिरों में सम्मानजनक व सहज दर्शन की सुविधा मिले
एक अन्य मामले में केरल हाईकोर्ट ने राज्य के देवस्वम बोर्डों को निर्देश दिया कि वे दिव्यांगजन को मंदिरों में सम्मानजनक व सहज दर्शन की सुविधा सुनिश्चित करें। न्यायमूर्ति राजा विजयराघवन वी और के वी जयकुमार की पीठ ने कहा कि दिव्यांगों को समानता, गरिमा और भेदभाव रहित व्यवहार का अधिकार संविधान व 2016 के दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम से सुनिश्चित है। यह कोई दान या उपकार नहीं बल्कि वैधानिक व सांविधानिक दायित्व है। कोर्ट ने त्रावणकोर, कोचीन, गुरुवायूर और मलबार देवस्वम बोर्डों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने तंत्रियों व अन्य हितधारकों से परामर्श कर प्रत्येक मंदिर की विशेष परिस्थितियों व परंपराओं को ध्यान में रखते हुए दिव्यांगों के लिए उपाय तय करें।

क्या मंदिर के भीतरी प्रांगण तक व्हीलचेयर ले जाने की अनुमति?
कोर्ट के आदेश के मुताबिक इसमें यह भी शामिल होगा कि क्या व्हीलचेयर को नालंबलम या भीतरी प्रांगण तक ले जाने की अनुमति दी जा सकती है। कोर्ट ने बोर्डों को सुझाव दिया कि वे दिव्यांगों के लिए विशेष दिन या समय तय करें, अग्रिम बुकिंग या वर्चुअल क्यू विकल्प उपलब्ध कराएं तथा बाधा रहित मार्ग, सहयोगी कर्मी और अन्य आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करें। सभी निर्णय चार महीने में लेकर व्यापक दिशा-निर्देश जारी करने को कहा गया। यह आदेश 2022 में कोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान लेकर दाखिल की गई एक याचिका पर आया, जिसमें दिव्यांग महिला ने मंदिर दर्शन में कठिनाइयों की शिकायत की थी।

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