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Kerala: नाबालिग बेटी ने जीती कानूनी लड़ाई, हाईकोर्ट ने बीमार पिता को लीवर दान करने की दी इजाजत

Wed, 21 Dec 2022 11:08 PM IST
गुलाम अहमद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि Published by: गुलाम अहमद Updated Wed, 21 Dec 2022 11:08 PM IST
सार

केरल हाईकोर्ट के जज ने 20 दिसंबर के अपने आदेश में कहा कि यह जानकर खुशी हो रही है कि देवानंदा की अथक लड़ाई आखिरकार सफल हो गई। वह पिता की जान बचाने के लिए देवानंद की लड़ाई की सराहना करते हैं। जज ने पिता के लिए लड़की की प्रेम भावना को सलाम किया।

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Kerala high court allows teen girl to donate portion of her liver for ailing father transplantation surgery
केरल हाईकोर्ट - फोटो : Social Media

विस्तार

केरल के त्रिशूर जिले की नाबालिग लड़की देवानंदा अब बीमार पिता की जान बचाने के लिए अपने लीवर का हिस्सा दान कर सकती है। केरल हाईकोर्ट ने नाबालिग लड़की को लीवर का एक हिस्सा दान करने की इजाजत दे दी है। 17 वर्षीय लड़की देवानंदा ने मानव अंग और ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम, 2014 की धारा 18 के तहत निर्धारित दाता होने की उम्र में छूट की मांग की मांग की थी।

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अदालत ने लड़की की याचिका को स्वीकार कर लिया। न्यायमूर्ति वीजी अरुण ने 20 दिसंबर के अपने आदेश में कहा कि यह जानकर खुशी हो रही है कि देवानंदा की अथक लड़ाई आखिरकार सफल हो गई। वह पिता की जान बचाने के लिए देवानंदा की लड़ाई की सराहना करते हैं। न्यायमूर्ति अरुण ने पिता के लिए लड़की की प्रेम भावना को सलाम किया और कहा कि धन्य हैं वे माता-पिता, जिनके पास देवानंदा जैसी संतान हैं।
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बेटी का लीवर मैचिंग पाया गया
नाबालिग लड़की के पिता प्रतीश पीजी फैटी लीवर डिजीज से पीड़ित हैं। देवानंदा के लिए पिता को बचाने का एकमात्र विकल्प प्रत्यारोपण सर्जरी के जरिए क्षतिग्रस्त यकृत को बदलना है। मरीज के परिजनों में से सिर्फ उनकी बेटी का लीवर मैचिंग पाया गया है।
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देवानंदा अपने पिता को बचाने के लिए अपने अंग दान करने को तैयार थी, लेकिन उसकी कम उम्र इसमें बाधा आ रही थी, क्योंकि वह 17 वर्ष की है। मानव अंग और ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994 के प्रावधान नाबालिग को अंग दान की इजाजत नहीं देते हैं।

देवानंदा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मानव अंग और ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम, 2014 की धारा 18 के तहत अस्पताल प्रबंधन को निर्देश देने की मांग की थी कि अगर वह चिकित्सकीय रूप से दाता बनने के लिए फिट है तो उसके साथ वयस्क की तरह व्यवहार किया जाए।


अदालत ने आदेश में कहा कि पिता की प्रत्यारोपण सर्जरी करने के लिए याचिकाकर्ता को अपने लीवर का एक हिस्सा दान करने की अनुमति देने के लिए याचिका का निपटारा किया जाता है। अदालत ने केरल राज्य अंग ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (K-SOTTO) द्वारा गठित एक विशेषज्ञ समिति द्वारा प्रस्तुत एक रिपोर्ट पर विचार करते हुए निर्णय दिया। इस समिति को देवानंदा के मामले का अध्ययन करने का निर्देश दिया गया था।
 

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