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HC: 'महिला के प्रजनन के अधिकार पर कोई अंकुश नहीं', MBA की छात्रा को केरल हाईकोर्ट ने दी गर्भपात की अनुमति
Sat, 05 Nov 2022 06:55 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Sat, 05 Nov 2022 06:55 PM IST
सार
एमबीए की छात्रा अपने मित्र के साथ सहमति से संबंध बनाने के कारण गर्भवती हुई थी। हालांकि जब वह गर्भवती हुई तो उसे इसकी जानकारी नहीं थी। उसकी याचिका के अनुसार, उसे अपनी गर्भावस्था के बारे में तभी पता चला जब डॉक्टर की सलाह पर अल्ट्रासाउंड स्कैन किया गया था।
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केरल हाईकोर्ट
- फोटो : ANI
विस्तार
केरल हाई कोर्ट ने एक 23 साल की युवती को चिकित्सकीय रूप से अपने गर्भ को समाप्त करने की अनुमति दी है। याचिकाकर्ता छात्रा 26 सप्ताह की गर्भवती थी। मामले में न्यायमूर्ति वी जी अरुण ने अपने आदेश में कहा कि किसी महिला के प्रजनन विकल्प का प्रयोग करने या प्रजनन करने से परहेज करने के अधिकार पर कोई प्रतिबंध नहीं हो सकता है। उन्होंने अपने आदेश में यह भी बताया कि मेडिकल बोर्ड ने युवती के मेडिकल परीक्षण के बाद कहा है कि उसे तीव्र तनाव प्रतिक्रिया हो रही थी। ऐसी स्थिति में अगर वह गर्भावस्था जारी रखती है तो उसकी जान जोखिम में पड़ सकती है।
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याचिका के मुताबिक, एमबीए की छात्रा अपने मित्र के साथ सहमति से संबंध बनाने के कारण गर्भवती हुई थी। हालांकि जब वह गर्भवती हुई तो उसे इसकी जानकारी नहीं थी। उसकी याचिका के अनुसार, उसे अपनी गर्भावस्था के बारे में तभी पता चला जब डॉक्टर की सलाह पर अल्ट्रासाउंड स्कैन किया गया था, जहां वह अनियमित मासिक धर्म और अन्य शारीरिक परेशानी की शिकायत करने गई थी।
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छात्रा ने अदालत को बताया था कि वह पॉलीसिस्टिक डिम्बग्रंथि रोग से पीड़ित थी। इस रोग से पीड़ित लड़कियों में अनियमित मासिक धर्म होता है। इसी के कारण 25 अक्टूबर को स्कैन रिपोर्ट प्राप्त होने तक उसे अपनी गर्भावस्था के बारे में कोई जानकारी नहीं हो सकी। उसने यह भी बताया कि इसी बीच उसके मित्र(जिसके साथ वह रिश्ते में थी) ने आगे की पढ़ाई के लिए देश छोड़ दिया। जिसके बाद कोई चारा ना देख कर उसने चिकित्सकीय रूप से अपने गर्भ को समाप्त करने की अनुमति के लिए उच्च न्यायालय का रुख किया।
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छात्रा की याचिका पर सुनवाई के बाद केरल हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि एक महिला को प्रजनन पसंद करने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता के आयाम के अंतर्गत आता है। उन्होंने कहा कि सावधानीपूर्वक जांच से पता चलता है कि याचिकाकर्ता को तीव्र तनाव प्रतिक्रिया हो रही है और गर्भावस्था जारी रखने से उसकी चिकित्सा परेशानी बढ़ सकती है जिससे याचिकाकर्ता के जीवन को खतरा हो सकता है।
आखिर में हाई कोर्ट ने छात्रा को सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल या मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट द्वारा अनिवार्य सुविधाओं वाले किसी अन्य अस्पताल में गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति दी है।