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Kerala: प्रोफेसर के हाथ काटने के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे शख्स को हाईकोर्ट से राहत, दी गई सशर्त जमानत

Fri, 13 Dec 2024 03:07 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम Published by: काव्या मिश्रा Updated Fri, 13 Dec 2024 03:07 PM IST
सार

साल 2010 में एक प्रोफेसर के हाथ काटने के मामले में अब केरल हाईकोर्ट ने मुख्य साजिशकर्ता को जमानत दे दी है, जिसे पिछले साल एक विशेष एनआईए अदालत ने दोषी ठहराया था और आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

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Kerala HC grants bail to man sentenced to life in 2010 college professor hand chopping case
केरल उच्च न्यायालय (फाइल) - फोटो : एएनआई

विस्तार

साल 2010 में एक प्रोफेसर के हाथ काटने के मामले में अब केरल हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला लिया है। उसने इस मामले के मुख्य साजिशकर्ता को जमानत दे दी है, जिसे पिछले साल एक विशेष एनआईए अदालत ने दोषी ठहराया था और आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

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हाईकोर्ट में अपील लंबित
न्यायमूर्ति राजा विजयराघवन और न्यायमूर्ति पीवी बालकृष्णन की पीठ ने दोषी एम के नासर की सजा को निलंबित कर दिया, जबकि एनआईए अदालत के फैसले के खिलाफ उसकी अपील हाईकोर्ट में लंबित है। बता दें, एनआईए अदालत ने नासर को मामले में मुख्य साजिशकर्ता पाया था।  
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नौ साल से अधिक समय से जेल में बंद
पीठ ने इस बात पर गौर किया कि नासर को आरोप सिद्ध होने से पहले और बाद नौ साल से अधिक समय तक जेल में रहना पड़ा है। जबकि उसके जैसे आरोपों का सामना कर अन्य आरोपियों को कम समय के लिए जेल की सजा दी गई थी तथा सजा पूरी करने के बाद उन लोगों को रिहा कर दिया गया था।
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मामले के निपटारे में लग सकता है समय
इसके अलावा, सत्र न्यायाधीश के निष्कर्षों के खिलाफ एनआईए द्वारा दायर अपीलों पर अलग-अलग विचार किया जा रहा है, जिन पर अभी तक अभी तक सुनवाई नहीं हुई है। पीठ ने कहा, 'इसमें देरी की भी संभावना है क्योंकि मुख्य आरोपी ने आत्मसमर्पण कर दिया है और सत्र न्यायाधीश को कानून के अनुसार मुकदमे को अपने हाथ में लेना होगा तथा उसका निपटारा करना होगा। इसके लिए कुछ मूल रिकॉर्ड की आवश्यकता हो सकती है।'

शर्त पर दी गई जमानत
हाईकोर्ट ने कहा कि इन तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए, उसका मत है कि नासर को दी गई सजा को उसकी अपील पर विचार होने तक निलंबित किया जा सकता है। अदालत ने उन्हें इस शर्त के अधीन राहत दी कि वह सत्र न्यायाधीश की संतुष्टि के लिए एक लाख रुपये की राशि के लिए एक बांड और समान राशि के दो जमानतदार पेश करेंगे। साथ ही बिना हाईकोर्ट के अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ सकते हैं, मुख्य आरोपी के संबंध में चल रही सुनवाई में हस्तक्षेप नहीं करेंगे या गवाहों को प्रभावित नहीं करेंगे तथा जमानत पर बाहर रहते हुए कोई अपराध नहीं करेंगे।

विशेष एनआईए अदालत ने मामले में सुनवाई के दूसरे चरण में नासर को गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत अपराधों के साथ ही हत्या का प्रयास, साजिश रचने तथा भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत विभिन्न अन्य अपराधों का दोषी पाया था।

वह हाथ काटने के मामले में मुकदमे के दूसरे चरण में दोषी ठहराए गए छह लोगों में से एक था। नसार और दो अन्य को उम्रकैद की सजा सुनाई गई जबकि अन्य तीन दोषियों को कम समय के लिए जेल की सजा सुनाई गई। 

मामले में सुनवाई के पहले चरण में, 10 व्यक्तियों को यूएपीए के साथ-साथ विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और आईपीसी के तहत अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया था और तीन अन्य को अपराधियों को शरण देने का दोषी पाया गया था।

यह है मामला
इडुक्की जिले के थोडुपुझा (Thodupuzha) में न्यूमैन कॉलेज के प्रोफेसर टीजे जोसेफ का दाहिना हाथ चार जुलाई, 2010 को मौजूदा प्रतिबंधित इस्लामिक संगठन पीएफआई के कथित सदस्यों द्वारा काट दिया गया था। यह हमला तब किया गया था जब वह (प्रोफेसर) एर्नाकुलम जिले के मुवत्तुपुझा में एक चर्च में रविवार की प्रार्थना सभा में भाग लेने के बाद अपने परिवार के साथ घर लौट रहे थे। सात लोगों के समूह में शामिल हमलावरों ने वाहन से प्रोफेसर को बाहर खींचा और उनके साथ मारपीट कर उनका दाहिना हाथ काट दिया था। हाथ काटने का मुख्य आरोपी सवाद था, जो अभी भी फरार है। 

वहीं, एनआईए ने खुलासा किया है कि आरोपी न्यूमैन कॉलेज में बीकॉम सेमेस्टर परीक्षा के लिए निर्धारित प्रश्न पत्र बनाते वक्त अपमानजनक धार्मिक टिप्पणियों के लिए जोसेफ को मारना चाहते थे। इस मामले में 54 आरोपी थे, जिनमें से 37 के नाम आरोपपत्र में हैं। पहले चरण में 31 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई हुई, जबकि अन्य फरार थे। कुछ अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय नहीं किए जा सके क्योंकि वे पकड़े नहीं गए थे।

अब तक 19 आरोपियों को भारतीय दंड संहिता और गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत विभिन्न अपराधों के लिए दोषी ठहराया जा चुका है। इनमें से तीन को उम्रकैद और 10 अन्य को आठ साल कैद की सजा सुनाई गई है।
एनआईए की विशेष अदालत ने जुलाई 2013 में 31 आरोपियों के खिलाफ मुकदमे का पहला चरण शुरू किया था। पहले चरण की सुनवाई के दौरान, अदालत ने 200 से अधिक सामग्री, 950 से अधिक अभियोजन दस्तावेजों, लगभग 30 रक्षा दस्तावेजों 300 से अधिक अभियोजन गवाहों और चार बचाव गवाहों से पूछताछ की थी।


अदालत ने अप्रैल 2015 में यूएपीए के साथ-साथ विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और आईपीसी के तहत अपराधों के लिए 10 लोगों को दोषी ठहराया और तीन अन्य को अपराधियों को शरण देने का दोषी पाया। अदालत ने तब इस मामले में 18 अन्य को बरी कर दिया था।

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