{"_id":"6a343384b9ccf88920043936","slug":"kerala-hc-gives-final-chance-to-sit-to-file-comprehensive-report-in-sabarimala-gold-loss-cases-2026-06-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"सबरीमाला सोना गायब मामला: हाईकोर्ट का SIT को निर्देश- तेजी से पूरी हो जांच, 29 जून तक दाखिल करें रिपोर्ट","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
सबरीमाला सोना गायब मामला: हाईकोर्ट का SIT को निर्देश- तेजी से पूरी हो जांच, 29 जून तक दाखिल करें रिपोर्ट
Thu, 18 Jun 2026 11:36 PM IST
निर्मल कांत
पीटीआई, कोच्चि।
पीटीआई, कोच्चि।
Published by: निर्मल कांत
Updated Thu, 18 Jun 2026 11:36 PM IST
सार
सबरीमला मंदिर से कथित सोना गायब होने के मामले में केरल हाईकोर्ट ने एसआईटी को 29 जून तक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि जांच में अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और चार्जशीट दाखिल करने की समय-सीमा भी बतानी होगी। पढ़िए रिपोर्ट-
विज्ञापन
केरल उच्च न्यायालय (फाइल)
- फोटो : एएनआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
केरल हाईकोर्ट ने गुरुवार को सबरीमाला सोना गायब होने के मामलों की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) को अंतिम मौका दिया और कहा कि वह एक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करे। रिपोर्ट में यह बताया जाए कि इस मामले में कौन-कौन लोग शामिल थे और आरोपपत्र (चार्जशीट) कब तक दाखिल किया जाएगा, इसकी स्पष्ट समय-सीमा भी दी जाए।
न्यायमूर्ति राजा विजयराघवन वी और न्यायमूर्ति केवी जयकुमार की पीठ ने कहा कि जांच को आगे बढ़ाने और उसे निष्कर्ष तक पहुंचाने के लिए पहले ही पर्याप्त समय दिया जा चुका है। कोर्ट ने कहा कि कार्यवाही को अनिश्चितकाल तक लंबा नहीं खींचा जा सकता।
कोर्ट ने एसआईटी को 29 जून तक समय दिया है। इस दौरान एसआईटी को एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी होगी, जिसमें वर्ष 2025 में द्वारपालक मूर्तियों और प्लेटों को हटाने तथा उनके परिवहन से जुड़े आरोपियों की भूमिका, संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भागीदारी तथा अंतिम रिपोर्ट संबंधित अदालत में कब तक दाखिल की जाएगी, इसकी जानकारी देनी होगी।
विज्ञापन
29 जून तक रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश
पीठ ने स्पष्ट किया कि जांच पूरी गंभीरता और सावधानी के साथ आगे बढ़नी चाहिए और बिना किसी अनावश्यक देरी के समाप्त की जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि न्याय के हित में यह जरूरी है कि जांच उचित समय-सीमा के भीतर और तेजी से पूरी की जाए। इसके साथ ही मामले की अगली सुनवाई 29 जून को तय की गई।
एसआईटी ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान एसआईटी ने कोर्ट को बताया कि आपराधिक साजिश और पूरे मामले से जुड़ी व्यापक परिस्थितियों की जांच अभी जारी है। एसआईटी ने यह भी कहा कि वह त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड (टीडीबी) के कुछ अधिकारियों की भूमिका की जांच कर रही है। ये अधिकारी इस अवधि के दौरान सबरीमला मंदिर में जिम्मेदार पदों पर थे। जांच का मकसद यह पता लगाना है कि क्या वे द्वारपालक मूर्तियों और प्लेटों को सोने की परत चढ़ाने के लिए चेन्नई भेजने के निर्णय में सीधे या परोक्ष रूप से शामिल थे।
ये भी पढ़ें: कर्नाटक: पांचवीं सीट के लिए कांग्रेस के पास नहीं थे विधायक, CM डीके शिवकुमार की इस रणनीति ने बदल दिया पूरा खेल
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने यह भी जिक्र किया कि राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला से मिले सोने के नमूनों की जांच रिपोर्ट और वैज्ञानिक निष्कर्षों के आधार पर जांच का मुख्य ध्यान वर्ष 2025 में द्वारपालक मूर्तियों पर सोने की परत चढ़ाने से जुड़े लेन-देन पर केंद्रित किया गया है। पीठ ने कहा कि एसआईटी की ओर से जब्त किए गए दस्तावेज से यह स्पष्ट घटनाक्रम सामने आता है कि किस तरह द्वारपालक मूर्तियों को सन्निधानम से हटाया गया था।
कोर्ट ने कहा कि जांच अधिकारी ने जानकारी दी है कि आरोपियों की संलिप्तता दर्शाने वाले पर्याप्त और मजबूत सबूत पहले ही एकत्र किए जा चुके हैं। केरल हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित एसआईटी सबरीमला मंदिर के द्वारपालक मूर्तियों और श्रीकोविल (गर्भगृह) के दरवाजों के फ्रेम से कथित रूप से सोना गायब होने से जुड़े दो मामलों की जांच कर रही है।
विज्ञापन
न्यायमूर्ति राजा विजयराघवन वी और न्यायमूर्ति केवी जयकुमार की पीठ ने कहा कि जांच को आगे बढ़ाने और उसे निष्कर्ष तक पहुंचाने के लिए पहले ही पर्याप्त समय दिया जा चुका है। कोर्ट ने कहा कि कार्यवाही को अनिश्चितकाल तक लंबा नहीं खींचा जा सकता।
विज्ञापन
कोर्ट ने एसआईटी को 29 जून तक समय दिया है। इस दौरान एसआईटी को एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी होगी, जिसमें वर्ष 2025 में द्वारपालक मूर्तियों और प्लेटों को हटाने तथा उनके परिवहन से जुड़े आरोपियों की भूमिका, संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भागीदारी तथा अंतिम रिपोर्ट संबंधित अदालत में कब तक दाखिल की जाएगी, इसकी जानकारी देनी होगी।
विज्ञापन
29 जून तक रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश
पीठ ने स्पष्ट किया कि जांच पूरी गंभीरता और सावधानी के साथ आगे बढ़नी चाहिए और बिना किसी अनावश्यक देरी के समाप्त की जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि न्याय के हित में यह जरूरी है कि जांच उचित समय-सीमा के भीतर और तेजी से पूरी की जाए। इसके साथ ही मामले की अगली सुनवाई 29 जून को तय की गई।
एसआईटी ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान एसआईटी ने कोर्ट को बताया कि आपराधिक साजिश और पूरे मामले से जुड़ी व्यापक परिस्थितियों की जांच अभी जारी है। एसआईटी ने यह भी कहा कि वह त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड (टीडीबी) के कुछ अधिकारियों की भूमिका की जांच कर रही है। ये अधिकारी इस अवधि के दौरान सबरीमला मंदिर में जिम्मेदार पदों पर थे। जांच का मकसद यह पता लगाना है कि क्या वे द्वारपालक मूर्तियों और प्लेटों को सोने की परत चढ़ाने के लिए चेन्नई भेजने के निर्णय में सीधे या परोक्ष रूप से शामिल थे।
ये भी पढ़ें: कर्नाटक: पांचवीं सीट के लिए कांग्रेस के पास नहीं थे विधायक, CM डीके शिवकुमार की इस रणनीति ने बदल दिया पूरा खेल
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने यह भी जिक्र किया कि राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला से मिले सोने के नमूनों की जांच रिपोर्ट और वैज्ञानिक निष्कर्षों के आधार पर जांच का मुख्य ध्यान वर्ष 2025 में द्वारपालक मूर्तियों पर सोने की परत चढ़ाने से जुड़े लेन-देन पर केंद्रित किया गया है। पीठ ने कहा कि एसआईटी की ओर से जब्त किए गए दस्तावेज से यह स्पष्ट घटनाक्रम सामने आता है कि किस तरह द्वारपालक मूर्तियों को सन्निधानम से हटाया गया था।
कोर्ट ने कहा कि जांच अधिकारी ने जानकारी दी है कि आरोपियों की संलिप्तता दर्शाने वाले पर्याप्त और मजबूत सबूत पहले ही एकत्र किए जा चुके हैं। केरल हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित एसआईटी सबरीमला मंदिर के द्वारपालक मूर्तियों और श्रीकोविल (गर्भगृह) के दरवाजों के फ्रेम से कथित रूप से सोना गायब होने से जुड़े दो मामलों की जांच कर रही है।