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Kerala: केरल हाईकोर्ट ने शिक्षक पर दर्ज आपराधिक केस किया खारिज, कहा- इरादा चोट पहुंचाना नहीं अनुशासन सीखना था

Fri, 24 Oct 2025 01:14 PM IST
रिया दुबे न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Fri, 24 Oct 2025 01:14 PM IST
सार

केरल उच्च न्यायालय ने छात्रों को डंडे मारने के मामले में शिक्षक के खिलाफ आपराधिक मामला खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि शिक्षक का कार्य केवल छात्रों को सुधारने और उन्हें अच्छे नागरिक बनाने के लिए था और इस प्रकार वे सीमा के भीतर था।

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Kerala Court dismisses criminal case against teacher, says intention was not to hurt but to teach discipline
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobestock

विस्तार

केरल हाईकोर्ट ने एक स्कूल शिक्षक के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्रवाई को रद्द कर दिया है। शिक्षक पर आरोप था कि उन्होंने कक्षा में आपस में झगड़ रहे तीन छात्रों को छड़ी से मारा था। अदालत ने कहा कि शिक्षक का उद्देश्य बच्चों को चोट पहुंचाना नहीं, बल्कि अनुशासन बनाए रखना था। 

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क्या था मामला?

न्यायमूर्ति सी प्रतीप कुमार ने कहा कि पांचवीं कक्षा के छात्रों के बायन के अनुसार वे क्लास में एक-दूसरे से लाठियों से लड़ रहे थे और उसी समय गणित के शिक्षक ने अनुशासन लागू करने के लिए हस्तक्षेप किया। कोर्ट ने कहा  कि शिक्षक ने छात्रों के केवल पैरों पर ही बेंत मारे थे, उनमें से किसी को भी किसी प्रकार के चिकित्सीय उपचार की जरूरत नहीं पड़ी। साथ ही इस बात का कोई सबूत नहीं है कि घटना में उनमें से किसी को भी शारीरिक चोट पहुंची हो। 

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इसमें यह भी बताय गया है कि घटना 16 सितम्बर, 2019 की सुबह घटी थी, लेकिन पुलिस को इसकी सूचना 20 सितम्बर, 2019 की शाम लगभग 8.30 बजे दी गई। इस देरी के लिए कोई कारण नहीं बताया गया। 

अदालत ने अपने आदेश में क्या कहा?

अदालत  ने 16 अक्तूबर को अपने आदेश में कहा कि शिक्षक का कार्य केवल छात्रों को सुधारने और उन्हें अच्छे नागरिक बनाने के लिए था और इस प्रकार वे सीमा के भीतर था। कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण है कि माता-पिता शिक्षक की अच्छी मंशा को नहीं समझ सके और इसक कारण यह अनुचित मामला हुआ। 



न्यायमूर्ति कुमार ने उच्च न्यायालय के विभिन्न पूर्व आदेशों का भी हवाला दिया, जिसमें न्यायालय ने कहा था कि जब छात्र की भलाई और अनुशासन बनाए रखने के लिए शारीरिक दंड देने में शिक्षक की ओर से कोई दुर्भावनापूर्ण इरादा नहीं होता है, तो यह कहना संभव नहीं है कि किशोर न्याय अधिनियम के तहत कोई अपराध बनता है।

शिक्षक के पास अनुशासन लागू करने का अधिकार 

शिक्षक पर भारतीय दंड संहिता की धारा 324 (खतरनाक हथियारों या साधनों से जानबूझकर चोट पहुंचाना) और किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 (बच्चों के प्रति क्रूरता) के तहत मामला दर्ज किया गया था। अदालत ने आगे कहा कि यह स्पष्ट है कि स्कूल शिक्षक को, अपनी विशिष्ट स्थिति को देखते हुए, अनुशासन लागू करने और अपने प्रभार में रखे गए छात्र को सुधारने का अधिकार है।

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