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Politics: कर्नाटक के उद्यमियों को केरल और आंध्र प्रदेश ने दिया निवेश का न्योता, कहा- हम देंगे सारी सुविधाएं

Thu, 18 Jul 2024 06:00 AM IST
विशांत श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विशांत श्रीवास्तव Updated Thu, 18 Jul 2024 06:00 AM IST
सार

कर्नाटक सरकार से नाराज उद्यमियों को केरल और आंध्र प्रदेश की सरकारों ने अपने राज्यों में निवेश का न्योता दिया है। कर्नाटक सरकार ने निजी कंपनियों ने कन्नड़ निवासियों के लिए आरक्षण की बात कही है। 

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Kerala and Andhra Pradesh invited Karnataka entrepreneurs to invest, said- we will provide all facilities
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया - फोटो : ANI

विस्तार

कर्नाटक सरकार के निजी कंपनियों में स्थानीय लोगों के लिए आरक्षण के फैसले से नाराज उद्यमियों को आंध्र प्रदेश और केरल ने अपने यहां निवेश का न्योता दिया है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू के बेटे और मंत्री नारा लोकेश और केरल के उद्योग मंत्री पी राजीव ने उद्यमियों को अपने राज्यों में स्वागत करते हुए सभी सुविधाएं देने का वादा किया है। 

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नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विस कंपनीज (नेसकॉम) ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कर्नाटक के इस फैसले की आलोचना की थी। इसका जवाब देते हुए आंध्र प्रदेश के आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, संचार और मानव संसाधन मंत्री नारा लोकेश ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, नेसकॉम के सदस्यों, हम आपको हुई निराशा को समझते हैं। हम विशाखापत्तनम में अपने आईटी, आईटी सर्विस, एआई एवं डाटा सेंटर क्लस्टर में आपका स्वागत करते हैं। हम आपको सर्वश्रेष्ठ सुविधाएं और 24 घंटे बिजली, इंफ्रास्ट्रक्चर और आपकी आईटी कंपनी के लिए बेहतरीन स्किल टैलेंट ऑफर कर रहे हैं, वह भी किसी सरकारी प्रतिबंध के बिना। 
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केरल के मंत्री राजीव ने पोस्ट में लिखा, केरल में निवेश करें। कर्मचारी की प्रतिभा और योग्यता ही भर्ती का एकमात्र मानदंड है।  

छह राज्य कर चुके हैं कोशिश
स्थानीय लोगों के लिए अधिकतम आरक्षण का प्रावधान करने वाला कर्नाटक कोई पहला राज्य नहीं है। कर्नाटक से पहले हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश भी स्थानीय लोगों को निजी नौकरियों में 75 फीसदी तक आरक्षण का एलान कर चुके हैं। हालांकि, किसी भी राज्य में ये पूरी तरह लागू नहीं किया जा सका। 
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रियाणा के फैसले पर हाईकोर्ट ने लगाई थी रोक
 हरियाणा के फैसले पर पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी। हालांकि, बाद में कुछ राहत दी गई, लेकिन इस मामले पर अब तक अंतिम फैसला नहीं आ पाया है। झारखंड सरकार ने 2023 में निजी कंपनियों में 40 हजार रुपये तक वेतन वाले 75 फीसदी पदों पर स्थानीय लोगों को नौकरी देना अनिवार्य कर दिया था। 

विवाद क्यों?
दरअसल, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने एक दिन पहले ही कहा था कि कर्नाटक मंत्रिमंडल ने राज्य के सभी निजी उद्योगों में ‘सी और डी’ श्रेणी के पदों के लिए 100 प्रतिशत कन्नडिगा (कन्नड़भाषी) लोगों की भर्ती अनिवार्य करने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा था कि राज्य सरकार की प्राथमिकता कन्नड़ लोगों के कल्याण की देखभाल करना है। इस विधेयक का उद्योगपतियों से लेकर विपक्ष तक ने विरोध किया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने बुधवार को अपना ट्वीट डिलीट कर दिया। 


कई उद्योगपतियों ने विरोध जताया
इससे पहले कई उद्योगपतियों ने बुधवार को इस विधेयक का विरोध जताया था। उन्होंने कहा था कि यह भेदभावपूर्ण है और आशंका जताई कि टेक उद्योग को नुकसान हो सकता है। मणिपाल ग्लोबल एजुकेशन सर्विसेज के अध्यक्ष मोहनदास पई ने कहा कि विधेयक फासीवादी और असंवैधानिक है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि इस विधेयक को रद्द कर दिया जाना चाहिए। यह भेदभावपूर्ण और संविधान के खिलाफ है। साथ ही पई ने कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश को टैग करते हुए पूछा कि क्या सरकार को यह सिद्ध करना है कि हम कौन हैं? यह एनिमल फार्म जैसा फासीवादी बिल है। हम सोच भी नहीं सकते कि कांग्रेस इस तरह का विधेयक लेकर आ सकती है। क्या एक सरकारी अधिकारी निजी क्षेत्र की भर्ती समितियों में बैठेगा? लोगों को भाषा की परीक्षा देनी होगी?

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