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AAP News: भाजपा के एक और गढ़ में केजरीवाल की सेंध, क्या मप्र के विधानसभा चुनाव में चलेगी 'झाड़ू'

Mon, 18 Jul 2022 09:26 AM IST
amit sharma अमित शर्मा
Updated Mon, 18 Jul 2022 09:26 AM IST
सार

मध्य प्रदेश के पहले केजरीवाल ने भाजपा के गढ़ गुजरात के सूरत में सेंध लगाई थी। इसे दशकों से राज्य में एकछत्र राज कर रही भाजपा के लिए करारा झटका माना गया था। 

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Kejriwals dent in another BJP stronghold, will run Jhadu in Madhya Pradesh asassembly poll next year
अरविंद केजरीवाल। - फोटो : ANI

विस्तार

आम आदमी पार्टी ने भाजपा के एक और गढ़ में सेंध मार दी है। आप की मेयर प्रत्याशी रानी अग्रवाल को मध्य प्रदेश के सिंगरौली में बड़ी जीत हासिल हुई है। इस जीत में महत्वपूर्ण बात यह है कि आप प्रत्याशी ने यह जीत भाजपा के उम्मीदवार को हराकर हासिल की है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या केजरीवाल ने भाजपा के एक और गढ़ में सेंध लगा दी है? क्या यह सिलसिला अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में भी बरकरार रहने वाला है? आप की इस राजनीति से असली नुकसान किसे होगा भाजपा को या कांग्रेस को? 

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सूरत में भी आप ने लगाई सेंध
मप्र के सिंगरौली में आम आदमी पार्टी के जिन चार अन्य पार्षदों को जीत मिली है, उनमें से भी दो ने भाजपा के प्रत्याशियों को ही हराकर जीत पाई है। मध्य प्रदेश के पहले केजरीवाल ने भाजपा के गढ़ गुजरात के सूरत में सेंध लगाई थी। इसे दशकों से राज्य में एकछत्र राज कर रही भाजपा के लिए करारा झटका माना गया था। 
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दिल्ली व पंजाब से बाहर लोकप्रिय हो रहे केजरीवाल 
अब मध्य प्रदेश में जीत से आप नेता उत्साहित हैं। वे इसे राष्ट्रीय राजनीति में केजरीवाल की बढ़ती स्वीकार्यता के तौर पर देख रहे हैं। उनका मानना है कि आप की जनहितैषी योजनाओं की लोकप्रियता अब दिल्ली के बाहर भी लोगों को आकर्षित कर रही है। यह उन्हें दिल्ली और पंजाब से बाहर लोकप्रिय बना रही है और इसके जरिए देश की राजनीति को एक और विकल्प मिल रहा है।
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क्या इसलिए मिली सिंगरौली में जीत
आम आदमी पार्टी को सिंगरौली में मिली जीत के पीछे स्थानीय राजनीतिक वजहों को खारिज नहीं किया जा सकता। सिंगरौली में जीतीं रानी अग्रवाल, पूर्व में भारतीय जनता पार्टी की नेता रही हैं और उसके टिकट पर चुनाव भी जीत चुकी हैं। लिहाजा, उनकी राजनीति को खड़ा करने में भाजपा के योगदान को नकारा नहीं जा सकता। दूसरी बात, नगर निगम चुनावों में मतदान बहुत ज्यादा स्थानीय स्तर का होता है। इनमें मिली जीत किसी पार्टी की विचारधारा को मिली स्वीकार्यता से ज्यादा प्रत्याशियों की अपने क्षेत्र में लोकप्रियता के आधार पर देखी जाती है, लिहाजा सिंगरौली की इस जीत को आम आदमी पार्टी की विचारधारा को मिली जीत करार नहीं दिया जा सकता। लेकिन, यह ध्यान में रखना चाहिए कि भाजपा हो या कांग्रेस, दूसरे दलों से आये नेताओं के कंधे पर सवार होकर ही इन दलों ने अपनी राजनीति को आगे बढ़ाया है। भाजपा ने तो हाल ही में केवल दूसरे दलों से आए नेताओं के सहारे ही अनेक राज्यों में अपनी सरकारें बनाई हैं। ऐसे में केवल इस तर्क से आम आदमी पार्टी की जीत को कमतर करके नहीं बताया जा सकता। इसी तर्क पर भाजपा की एक और मोर्चे पर करारी हार हुई है।

सिंधिया अपने गढ़ में हारे
ज्योतिरादित्य सिंधिया के बड़े कद के बाद भी भाजपा को उनके गढ़ ग्वालियर में हार का सामना करना पड़ा है। ग्वालियर में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पार्टी के लिए खूब प्रचार भी किया था, लेकिन इसके बाद भी वे अपने गढ़ में भाजपा को जीत दिलाने में नाकाम साबित हुए। यहां कांग्रेस प्रत्याशी मेयर चुनी गई हैं। इसके साथ ही कांग्रेस की जबलपुर में भी मजबूत वापसी की है। यहां कांग्रेस के मेयर प्रत्याशी ने जीत हासिल की।

जीत का जश्न मनाने का हक पर जड़ें मजबूत करने में लगेगा वक्त
सिंगरौली में आम आदमी पार्टी को जीत हासिल हुई है। उसके चार अन्य पार्षद भी जीत हासिल करने में कामयाब रहे हैं। जैसा कि केजरीवाल दावा करते हैं कि वे एक वैकल्पिक राजनीति को बढ़ावा देंगे, यह विधानसभा चुनाव में भी उनकी जीत की संभावनाओं के द्वार खोल सकता है, इसलिए आम आदमी पार्टी को इस जीत का जश्न मनाने का पूरा हक है।हालांकि, विचारधारा के तौर पर केजरीवाल को अपनी जड़ें मजबूत करने में अभी समय लगने वाला है। पार्टी को यह ध्यान रखना होगा कि हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में उसके पूर्व प्रदेश अध्यक्ष तक पाला बदलकर भाजपा में शामिल हो चुके हैं, ऐसे में जनता के बीच विचारधारा को मजबूती से बिठाए बिना पार्टी की यह जीत क्षणिक और अस्थाई साबित हो सकती है।  

सिंगरौली नगर निगम के चुनाव परिणाम
मध्यप्रदेश के सिंगरौली नगर निगम के लिए 6 जुलाई को मतदान हुआ था। 17 जुलाई को हुई मतगणना में आम आदमी पार्टी की प्रत्याशी रानी अग्रवाल को जीत हासिल हुई है। उन्हें 34,585 वोट प्राप्त हुए हैं, जबकि दूसरे नंबर पर भाजपा के चंद्र प्रताप विश्वकर्मा को 25,233 मत प्राप्त हुए। इस प्रकार रानी अग्रवाल 9352 मतों के अंतर से जीत प्राप्त करने में कामयाब रहीं। वहीं, कांग्रेस प्रत्याशी अरविंद सिंह चंदेल तीसरे स्थान पर रहे और उन्हें कुल 25,031 मत प्राप्त हुए।


हालांकि, मेयर पद पर जीत के बाद भी सिंगरौली में भाजपा-कांग्रेस की परंपरागत राजनीति ही चलने वाली है, इसके आसार भी साफ दिखाई पड़ रहे हैं। इसका बड़ा कारण है कि सिंगरौली नगर निगम के 45 वार्डों में से 23 पर भाजपा और 12 में कांग्रेस की जीत हुई है। यानी निगम में कोई भी प्रस्ताव पास होने में इन्हीं दलों की भूमिका महत्वपूर्ण रहने वाली है। मेयर पद के अलावा आम आदमी पार्टी की नीलू कुमारी वार्ड नंबर 3 से, अर्चना विश्वकर्मा वार्ड 15 से, शिवकुमारी वार्ड नंबर 24 से, श्यामला वार्ड नंबर 32 से और रूक्मुन को वार्ड नंबर 33 पर जीत हासिल हुई है। आम आदमी पार्टी ने इसमें से पहली दो सीटें भाजपा को हराकर प्राप्त की हैं। 

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