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कर घटाइए, परमीशन राज हटाइए तब खत्म होगा काला धन: आदि गोदरेज
हैदराबाद
Updated Wed, 30 Nov 2016 05:48 AM IST
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प्रमुख उद्योगपति आदि गोदरेज ने कहा कि वाजिब और मामूली कर दर होने से काले धन को पैदा होने से रोका जा सकेगा। इसके अलावा उन्होंने कहा कि कानून सम्मत ऑटोमेटिक मंजूरी प्रणाली रहने से घूसखोरी को रोका जा सकता है। कारोबार में सरकारी नियंत्रण से भ्रष्टाचार का जन्म होता है और इससे निपटने का एक ही तरीका है कि हर स्तर से मंजूरी लेने की प्रणाली यानी ‘परमीशन राज’ को खत्म किया जाए।
एक समाचार एजेंसी को दिए अपने साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि गोदरेज समूह हमेशा से ही प्रत्यक्ष कर की दर को कम करने और कारपोरेट टैक्स को उचित रखे जाने का हिमायती रहा है। ऐसा करने से ही कर आधार बढ़ेगा और अधिक से अधिक लोग कर देंगे।
नोटबंदी से पूरी तरह नहीं खत्म होगा काला धन
सरकार की नोटबंदी पर अपनी प्रतिक्रिया में गोदरेज ने कहा कि मध्यम और लंबी अवधि के हिसाब से यह ठीक रहेगा। इससे लोगों को ईमानदारी की सीख मिलेगी। मध्यम और लंबी अवधि में इसके अच्छे परिणाम आएंगे। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि इससे पूरी तरह से काला धन समाप्त हो जाएगा लेकिन इतना जरूर होगा कि भविष्य में लोग काले धन में लेन-देन करने से बचना चाहेंगे।
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कर की दर कम होने से लगेगी काले धन पर लगाम
गोदरेज ने कहा कि प्रत्यक्ष कर की दर को कम किया जाना चाहिए, जिससे नए सिरे से काले धन का सृजन न हो सके। जब कर की दर अधिक होती है तब लोग कर अदायगी से बचना चाहते हैं। जब कर की दर उचित और मामूली हो तब लोग काले धन में लेन-देन नहीं करते। उन्होंने कहा कि सीआईआई ने कारपोरेट टैक्स की दर घटाकर 17 फीसदी करने की सिफारिश की है।
सरकारी नियंत्रण से बढ़ता है भ्रष्टाचार
आदि गोदरेज का मानना है कि सरकार का जितना अधिक नियंत्रण रहेगा, भ्रष्टाचार भी उसी गति से बढ़ेगा। नियंत्रण हमेशा नकारात्मक होता है और इससे कारोबार में बाधा आती है। नियंत्रण हटने से खुद ब खुद भ्रष्टाचार में कमी आएगी। भ्रष्टाचार घटने से कारोबार में बढ़ोतरी होगी, जिससे देश का विकास होगा। भारत में अभी हर काम के लिए मंजूरी चाहिए। यह सभी कुछ ऑटोमेटिक होना चाहिए। इसके लिए स्पष्ट कानून होना चाहिए और सब कुछ उसी हिसाब से होते जाना चाहिए। अगर कोई कानून तोड़ता है तो उसे जरूर सजा मिलनी चाहिए।
चुनाव की हो सरकारी फंडिंग
गोदरेज ने चुनाव के लिए सरकारी फंडिग का प्रावधान होने के पक्ष में अपना समर्थन दिया। इससे किसी भी राजनीतिक दल को चुनाव के लिए धन की जरूरत नहीं रह जाएगी। उन्होंने कहा कि 1991 में लाइसेंस परमिट राज का खात्मा और प्रस्तावित जीएसटी बहुत बड़े सुधार हैं। 1991 के सुधार से अभी की कोई तुलना नहीं हो सकती। 1991 का सुधार बहुत बड़ा सुधार था। नोटबंदी और जीएसटी की तुलना की जाए तो मेरे हिसाब से जीएसटी सुधार काफी बड़ा सुधार है। एजेंसी
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एक समाचार एजेंसी को दिए अपने साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि गोदरेज समूह हमेशा से ही प्रत्यक्ष कर की दर को कम करने और कारपोरेट टैक्स को उचित रखे जाने का हिमायती रहा है। ऐसा करने से ही कर आधार बढ़ेगा और अधिक से अधिक लोग कर देंगे।
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नोटबंदी से पूरी तरह नहीं खत्म होगा काला धन
सरकार की नोटबंदी पर अपनी प्रतिक्रिया में गोदरेज ने कहा कि मध्यम और लंबी अवधि के हिसाब से यह ठीक रहेगा। इससे लोगों को ईमानदारी की सीख मिलेगी। मध्यम और लंबी अवधि में इसके अच्छे परिणाम आएंगे। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि इससे पूरी तरह से काला धन समाप्त हो जाएगा लेकिन इतना जरूर होगा कि भविष्य में लोग काले धन में लेन-देन करने से बचना चाहेंगे।
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कर की दर कम होने से लगेगी काले धन पर लगाम
गोदरेज ने कहा कि प्रत्यक्ष कर की दर को कम किया जाना चाहिए, जिससे नए सिरे से काले धन का सृजन न हो सके। जब कर की दर अधिक होती है तब लोग कर अदायगी से बचना चाहते हैं। जब कर की दर उचित और मामूली हो तब लोग काले धन में लेन-देन नहीं करते। उन्होंने कहा कि सीआईआई ने कारपोरेट टैक्स की दर घटाकर 17 फीसदी करने की सिफारिश की है।
सरकारी नियंत्रण से बढ़ता है भ्रष्टाचार
आदि गोदरेज का मानना है कि सरकार का जितना अधिक नियंत्रण रहेगा, भ्रष्टाचार भी उसी गति से बढ़ेगा। नियंत्रण हमेशा नकारात्मक होता है और इससे कारोबार में बाधा आती है। नियंत्रण हटने से खुद ब खुद भ्रष्टाचार में कमी आएगी। भ्रष्टाचार घटने से कारोबार में बढ़ोतरी होगी, जिससे देश का विकास होगा। भारत में अभी हर काम के लिए मंजूरी चाहिए। यह सभी कुछ ऑटोमेटिक होना चाहिए। इसके लिए स्पष्ट कानून होना चाहिए और सब कुछ उसी हिसाब से होते जाना चाहिए। अगर कोई कानून तोड़ता है तो उसे जरूर सजा मिलनी चाहिए।
चुनाव की हो सरकारी फंडिंग
गोदरेज ने चुनाव के लिए सरकारी फंडिग का प्रावधान होने के पक्ष में अपना समर्थन दिया। इससे किसी भी राजनीतिक दल को चुनाव के लिए धन की जरूरत नहीं रह जाएगी। उन्होंने कहा कि 1991 में लाइसेंस परमिट राज का खात्मा और प्रस्तावित जीएसटी बहुत बड़े सुधार हैं। 1991 के सुधार से अभी की कोई तुलना नहीं हो सकती। 1991 का सुधार बहुत बड़ा सुधार था। नोटबंदी और जीएसटी की तुलना की जाए तो मेरे हिसाब से जीएसटी सुधार काफी बड़ा सुधार है। एजेंसी