कर्नाटक: टीपू की नगरी मैसूर में भाजपा के हिंदुत्व मुद्दे की परीक्षा
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कभी टीपू सुल्तान की राजधानी रहे मैसूर में क्या टीपू सुल्तान का मुद्दा भाजपा की नैया पार लगा पाएगा या जातीय समीकरण इस मुद्दे पर भारी पड़ेंगे। मैसूर में घूमने और लोगों से बात करने पर टीपू सुल्तान के मुद्दे की नहीं बल्कि इसकी चर्चा ज्यादा करते हैं कि कहां किस जाति के कितने लोग हैं और उनका रुझान किसकी तरफ है।
हालांकि पिछले विधानसभा चुनाव में मैसूर में भाजपा को एक भी सीट नहीं मिली थी, लेकिन 2014 में लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रताप सिम्हा चुने गए। प्रताप सिम्हा ने टीपू सुल्तान को हिंदू विरोधी बताकर मैसूर में हिंदुत्व के मुद्दे को खासा गरम करने की कोशिश की है। अब विधानसभा चुनाव की कसौटी पर उनके हिंदुत्व के मुद्दे की परीक्षा होगी।
जिले की 11 सीटों की अगर बात करें तो यहां की चामराजा सीट पर 1989 से 2008 तक भाजपा के एच.एस.शंकर लिंगागौड़ा जीतते रहे। लेकिन 2013 में वह पाला बदल कर जद(एस) में आ गए। 2008 में यहां से चुनाव जीते कांग्रेस के वासु इस बार फिर मैदान में हैं और उनका मुकाबला भाजपा के नागेंद्र और जद(एस) के रांगप्पा से है जो रिश्ते में एच डी देवेगौड़ा के समधी लगते हैं।
इस सीट को जीतने के लिए जद(एस) ने प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है, लेकिन जद(एस) के बागी हरीश गौड़ा के मैदान में होने से जद(एस) की परेशानी बढ़ गई है। मैसूर की दूसरी सीटे केआर यानी कृष्णाराजा सीट पर कांग्रेस के मौजूदा विधायक सोमशेखर का भाजपा के एस ए रामदास से सीधा मुकाबला है। रामदास येदुयेरप्पा सरकार में मंत्री रहे हैं। मैदान में जद(एस) के के वी मल्लेश भी हैं, लेकिन लोग उन्हें तीसरे नंबर पर मान रहे हैं।
नरसिंह राजा सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार शिक्षा मंत्री तनवीर सेठ पिछले चार बार से जीत रहे हैं। पूर्व मंत्री और शहर के मजबूत नेता अजीज सेठ के बेटे तनवीर का मुकाबला एसडीपीआई के अब्दुल मजीद से है जो पिछली बार दूसरे नंबर पर रहे थे।
मुस्लिम बहुल इस सीट पर जद(एस) ने दागी छवि वाले अब्दुल्ला को उतारा है जबकि जद(एस) से आए संदेश स्वामी भाजपा ने टिकट दिया है। भाजपा को मुस्लिम मतों के विभाजन से अपनी जीत का रास्ता निकलने की उम्मीद है, लेकिन लोगों के मुताबिक आखिरी वक्त तनवीर सेठ और अब्दुल मजीद में ही मुकाबला होगा।
सिद्धारमैया जद(एस) के जेटी देवेगौड़ा के साथ सीधे मुकाबले में फंसे
मैसूर की चामुंडेश्वरी सीटे पर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया जद(एस) के जेटी देवेगौड़ा के साथ सीधे मुकाबले में फंसे हैं। यहां भाजपा की स्थिति लोग कमजोर बताते हैं। बगल की वरुणा सीट पर सिद्धारमैया के बेटे डा.यतीन्द्रा कांग्रेस उम्मीदवार हैं। उनके पिता यहां से दो बार जीत चुके हैं। भाजपा ने टी वासुराजो और जद(एस) ने अभिषेक को उतारा है। लेकिन यहां लोग यतीन्द्रा के लिए रास्ता आसान बताते हैं।
सुरक्षित सीट टीएन पुरा तीन नदियों कावेरी, कबिनी और स्फटिका का संगम क्षेत्र है। यहां से लोक निर्माण मंत्री महादेव अप्पा कांग्रेस उम्मीदवार हैं जिनका सीधा मुकाबला जद(एस) के अश्वनीकुमार से है।
भाजपा के शंकर भी मैदान में हैं। केआर नगर यानी कृष्णराजा नगर सीट पर जद(एस) विधायक स.रा.महेश खासे लोकप्रिय हैं, लेकिन उनपर जातीय पक्षपात का आरोप भी है। उनके खिलाफ कांग्रेस के रविशंकर और भाजपा के एच.जी.श्वेता हैं, लेकिन मुकाबला जद(एस) और कांग्रेस के बीच बताया जाता है। क्योंकि भाजपा के बागी उम्मीदवार एच टी वेंकटेश ने पार्टी के लिए मुश्किल खड़ी कर दी है।
पेरियापट्टन सीट पर कांग्रेस के विधायक के.वेंकटेश के मुकाबले जद(एस) ने के.महादेव और भाजपा ने मंजूनाथ को उतारा है। वोक्कालिंगा बहुल इस सीट पर दूसरा नंबर सिद्दारमैयार की जाति कुरबा समुदाय का है। भाजपा ने कुरबा को टिकट देकर मुकाबले में आने की कोशिश की है।
देवराज अर्स की सीट रही हुनसूर कांग्रेस के मौजूदा विधायक एच.पी.मंजूनाथ का मुकाबला पूर्व मंत्री एच.विश्वनाथ से है जो जद(एस) के उम्मीदवार हैं। विश्वनाथ कांग्रेस में एस.एम कृष्णा सरकार में मंत्री थे और वही सिद्धारमैया को कांग्रेस में लेकर आए थे। दोनों के बीच सीधा और कड़ा मुकाबला है।
भाजपा उम्मीदवार रमेश कुमार की चर्चा लोग पूछने पर ही करते हैं। सुरक्षित सीट एच.डी.कोटे पर पिछली बार जद(एस) के टिकट पर चिक्का माधो जीते थे, जिनकी छह महीने पहले ही मृत्यु होने के बाद उनके बेटे अनिल चिक्का को कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार बनाया है।
जद(एस) ने पूर्व विधायक चिक्काराना को उतारा है और भाजपा से पूर्व एमएलसी सिद्धराजू को टिकट दिया है। लेकिन लोग कांग्रेस और जद(एस) के बीच सीधे मुकाबले की बात कहते हैं। इसी तरह सुरक्षित सीट नंजनगुड़ से दलित नेता श्रीनिवास प्रसाद कांग्रेस से जीतते रहे हैं। 2013 में भी वह जीते और राजस्व मंत्री बनाए गए।
लेकिन 2017 में उन्हें मंत्री पद से हटा दिया गया और अब वह भाजपा में चले गए। वहीं कांग्रेस ने जद(एस) से पार्टी में आए कड़ले केशवमूर्ति को टिकट दिया है। वहीं भाजपा ने श्रीनिवास प्रसाद के दामाद हर्षवर्धन को टिकट दिया है। जद(एस) से दयानंद मूर्ति मैदान में हैं। स्थानीय लोग यहां कांग्रेस और भाजपा के बीच मुकाबला बताते हुए साथ ही यह भी कहते हैं कि कांग्रेस का पलड़ा भारी है।