कर्नाटक: सफाईकर्मी ने खून-पसीने के पैसों से खोली लाइब्रेरी, उपद्रवियों ने फूंक दी, 11 हजार से ज्यादा किताबें खाक
कर्नाटक के मैसूर में एक सफाई कर्मचारी ने अपने खून पसीने की कमाई की एक-एक पाई जोड़कर एक लाइब्रेरी खोली थी, लेकिन आग लगने से लाइब्रेरी में रखीं सभी 11 हजार से ज्यादा पुस्तकें जलकर खाक हो गईं।
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कर्नाटक के मैसूर में एक सफाई कर्मचारी ने अपने खून पसीने की कमाई की एक-एक पाई जोड़कर एक लाइब्रेरी खोली थी, लेकिन आग लगने से लाइब्रेरी में रखीं सभी 11 हजार से ज्यादा पुस्तकें जलकर खाक हो गईं। बताया जा रहा है कि कुछ उपद्रवियों ने जानबूझकर लाइब्रेरी में आग लगा दी। फिलहाल, पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं जब सोशल मीडिया पर लोगों को इस बात की खबर मिली, तो दोबारा लाइब्रेरी बनाने को कई हाथ मदद में आगे बढ़े।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कर्नाटक के मैसूर की एक कन्नड़ लाइब्रेरी में कुछ उपद्रवियों ने आग लगा दी, जिससे लाइब्रेरी में रखीं किताबें पूरी तरह जलकर राख हो गई। आग इतनी भयानक थी कि यहां रखी सारी किताबें जल गईं। किताबों को निकालने का वक्त ही नहीं मिला। यह घटना शुक्रवार तड़के हुई। पुलिस ने बताया कि लाइब्रेरी में बड़ी संख्या में भागवद् गीता, कुरान और बाइबल के अलावा कन्नड साहित्य की किताबें थी।
पाई-पाई जोड़ शुरू की लाइब्रेरी
62 वर्षीय सैयद इशहाक ने वर्ष 2011 में इस लाइब्रेरी को शुरू किया था।सैयद इशहाक बतौर सफाई कर्मी काम करते हैं और उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई से पाई-पाई जोड़कर ये लाइब्रेरी शुरू की थी। इशहाक को पढ़ने का शौक था, लेकिन गरीबी की वजह से वे पढ़ाई नहीं कर सके। इसलिए उन्होंने बड़ी मेहनत से पैसे जोड़कर ये लाइब्रेरी खोली थी।
शौक पर भारी पड़ी दो वक्त की रोटी की जुगाड़
इशहाक ने कहा, "मैं केवल 15 दिन ही स्कूल गया था। घर में आर्थिक तंगी के चलते हालत बेहद खराब थे, इसलिए काम के लिए बचपन में ही घर छोड़ दिया। मुझे कुछ घरों में काम करने का मौका मिला, जहां मैंने पढ़ना-लिखना सीखा और किताबों को लेकर मेरा शौक विकसित हुआ। इशहाक ने बताया कि बाद में उन्होंने एक झोपड़ी में लाइब्रेरी बनाई, जिससे लोगों और खासकर बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित हो सके।"
उन्होंने कहा कि लाइब्रेरी में श्रीमद्भगवद्गीता, रामायणा, कुरान और बाइबल जैसी धार्मिक ग्रंथ थे। इसके साथ ही कन्नड़ साहित्य की ढेरों किताबें रखीं थीं ताकि पाठक अपनी पसंद की किताबें भी पढ़ सकें।
अब तक 13 लाख रुपये जुटाए...
सोशल मीडिया पर जब लोगों को लाइब्रेरी में आग और इशहाक की कहानी पता चली, तो लोग मदद के लिए आगे आए। अब तक इशहाक की मदद के लिए 13 लाख से ज्यादा रुपये जुटाए जा चुके हैं ताकि वे दोबारा लाइब्रेरी बना सकें।