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कर्नाटक विवाद: सिंदूर हो या हिजाब, फैसला महिलाओं का... कविता लिख टीआरएस नेता ने किया छात्राओं का समर्थन
Thu, 10 Feb 2022 04:37 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Thu, 10 Feb 2022 04:37 PM IST
सार
उन्होंने यह भी कहा कि रहन-सहन का तरीका और क्या पहनना है एक निजी फैसला है और भारत का विचार इससे नहीं तौला जा सकता कि समाज का एक तबका महिलाओं और धर्मों से किस तरह के बर्ताव की उम्मीद रखता है।
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तेलंगाना से टीआरएस एमएलसी कलवाकुंतला कविता।
- फोटो : Social Media
विस्तार
तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरसए) पार्टी की एमएलसी कलवाकुंतला कविता ने गुरुवार को कर्नाटक में जारी हिजाब विवाद को लेकर एक एक काव्य रचना ट्विटर पर पोस्ट की है। इस कविता के जरिए उन्होंने शिक्षण संस्थानों में हिजाब पहनने का अधिकार मांग रही लड़कियों के प्रति समर्थन जताया। उन्होंने कविता के शीर्षक में लिखा- लड़कियां क्या पहनना या अपनाना चाहती हैं, इसका फैसला उन्हें ही करने दीजिए।
अपनी कविता में टीआरएस नेता ने लिखा, "सिंदूर लगाना मेरा सोचा-समझा फैसला है। हिजाब पहनना मुस्कान का फैसला है। महिलाओं को फैसला करने दें कि उन्हें क्या अपनाना है। इसलिए हमें न समझाएं।" अपनी रचना में कविता ने लिखा- "हम सब एक हैं, हम सब भारतीय हैं।"
उन्होंने यह भी कहा कि रहन-सहन का तरीका और क्या पहनना है एक निजी फैसला है और भारत का विचार इससे नहीं तौला जा सकता कि समाज का एक तबका महिलाओं और धर्मों से किस तरह के बर्ताव की उम्मीद रखता है। अपनी कविता को लेकर बाद में इस टीआरएस नेता ने कहा, "इस तरह की धार्मिक बातें सिर्फ महिलाओं से उनके मौके छीनने वाली बातें हैं। कृपया स्कूल और कॉलेजों को राजनीति से दूर रखें। एक समाज के तौर पर महिलाओं के निची चुनाव पर किसी को दखल देने का कोई अधिकार नहीं।"
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गौरतलब है कि कर्नाटक में हिजाब को लेकर प्रदर्शन चार फरवरी से शुरू हुए, जब उडुपी जिले में कुछ छात्राओं ने आरोप लगाया कि उन्हें धार्मिक पहनावे की वजह से क्लास अटेंड करने से रोका गया।
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अपनी कविता में टीआरएस नेता ने लिखा, "सिंदूर लगाना मेरा सोचा-समझा फैसला है। हिजाब पहनना मुस्कान का फैसला है। महिलाओं को फैसला करने दें कि उन्हें क्या अपनाना है। इसलिए हमें न समझाएं।" अपनी रचना में कविता ने लिखा- "हम सब एक हैं, हम सब भारतीय हैं।"
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उन्होंने यह भी कहा कि रहन-सहन का तरीका और क्या पहनना है एक निजी फैसला है और भारत का विचार इससे नहीं तौला जा सकता कि समाज का एक तबका महिलाओं और धर्मों से किस तरह के बर्ताव की उम्मीद रखता है। अपनी कविता को लेकर बाद में इस टीआरएस नेता ने कहा, "इस तरह की धार्मिक बातें सिर्फ महिलाओं से उनके मौके छीनने वाली बातें हैं। कृपया स्कूल और कॉलेजों को राजनीति से दूर रखें। एक समाज के तौर पर महिलाओं के निची चुनाव पर किसी को दखल देने का कोई अधिकार नहीं।"
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गौरतलब है कि कर्नाटक में हिजाब को लेकर प्रदर्शन चार फरवरी से शुरू हुए, जब उडुपी जिले में कुछ छात्राओं ने आरोप लगाया कि उन्हें धार्मिक पहनावे की वजह से क्लास अटेंड करने से रोका गया।