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High Court: पूर्व सैनिक की 25 साल से छोटी विवाहित बेटी आश्रित कार्ड की हकदार, सैनिक कल्याण विभाग का नियम रद्द
Thu, 05 Jan 2023 06:39 AM IST
गुलाम अहमद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु
Published by: गुलाम अहमद
Updated Thu, 05 Jan 2023 06:39 AM IST
सार
Karnataka High Court: हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सैनिक कल्याण विभाग का दिशानिर्देश लिंग भेदभाव को उजागर करता है। अदालत ने कहा कि एक पिता के लिए बेटे और बेटियां एक समान हैं। जिस तरह एक बेटा शादी के बाद बेटा रहता है, उसी तरह बेटी भी शादी के बाद भी बेटी ही रहती है।
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Karnataka High Court
- फोटो : PTI
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विस्तार
कर्नाटक हाईकोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में कहा है कि पूर्व सैनिक की 25 साल से छोटी विवाहित बेटी भी आश्रित पहचान पत्र (डिपेंडेंट आईडी कार्ड) की हकदार है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने सैनिक कल्याण और पुनर्वास विभाग के दिशानिर्देशों के खंड 5(सी) को खत्म कर दिया है जो पूर्व सैनिक के 25 साल से कम उम्र की विवाहित बेटी को डिपेंडेंट आईडी कार्ड के अयोग्य बनाता है, जबकि बेटे को योग्य माना गया है।
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अदालत ने कहा कि दिशानिर्देश का यह खंड लैंगिक पक्षपात को दर्शाता है। अदालत ने कहा कि एक पिता के लिए बेटे और बेटियां एक समान हैं। जिस तरह एक बेटा शादी के बाद बेटा रहता है, उसी तरह बेटी भी शादी के बाद भी बेटी ही रहती है।
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जस्टिस एम नागप्रसन्ना ने दो जनवरी को दिए अपने फैसले में दिशानिर्देश में लड़कियों के लिए दिए गए शब्द 'शादी तक' को असंवैधानिक बताते हुए उसे हटा दिया और इसे संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 के खिलाफ बताया। अदालत ने यह फैसला मैसुरू की प्रियंंका आर पाटिल की याचिका पर सुनाया। अदालत ने कहा कि पूर्व सैनिकों के परिवार के लिए जिस उद्देश्य से कल्याणकारी योजनाएं बनाई जाती हैं, उसका लाभ इसलिए छीन लिया गया, क्योंकि बेटी की शादी हो गई है।
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सैनिक कल्याण विभाग ने पहचान पत्र देने से किया था इनकार
प्रियंका के पिता सूबेदार रमेश खंडप्पा पोलिस पाटिल का 2001 में पंजाब में लैंड माइंस हटाते हुए निधन हो गया था। प्रियंका ने पूर्व सैनिकों के परिजनों के लिए आरक्षित 10 प्रतिशत कोटे के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए आवेदन किया था, लेकिन सैनिक कल्याण और पुनर्वास विभाग उसे योग्य नहीं मान रहा था।
दो हफ्ते के भीतर आईडी कार्ड मुहैया करने का आदेश
हाईकोर्ट ने विभाग को दो हफ्ते के भीतर प्रियंका को आईडी कार्ड मुहैया करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि विभाग का दिशानिर्देश संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 के सिद्धातों के खिलाफ है। अदालत ने कहा कि अगर कोई नियम, नीति या दिशानिर्देश समानत के नियम का उल्लंघन करता है तो असंवैधानिक होने के नाते उसे मिटाया ही जा सकता है।
बता दें, सैनिक कल्याण विभाग की गाइड लाइन के खंड 5(सी) में 25 वर्ष से कम उम्र की विवाहित बेटियों को आश्रित आईडी कार्ड के लिए अपात्र घोषित किया गया था। लेकिन पूर्व सैन्य कर्मियों के विवाहित बेटे आश्रित कार्ड हासिल कर सकते हैं।