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कर्नाटक हिजाब विवाद: हाईकोर्ट में आज भी जारी रहेगी सुनवाई, उडुपी कॉलेज के वकील ने रखीं दलीलें

Thu, 24 Feb 2022 03:44 AM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु Published by: गौरव पाण्डेय Updated Thu, 24 Feb 2022 03:44 AM IST
सार

मंगलवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कहा था कि शिक्षण संस्थानों में हिजाब पर प्रतिबंध केवल कक्षाओं में और पढ़ाई के समय के लिए है। शिक्षण संस्थानों के परिसर में हिजाब पर कोई प्रतिबंध नहीं है। 

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Karnataka High Court hearing on petitions challenging ban on hijab in educational institutes
कर्नाटक हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

कर्नाटक के शिक्षण संस्थानों में हिजाब पर प्रतिबंध के खिलाफ विभिन्न याचिकाओं पर हाईकोर्ट में बुधवार को भी सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान हिजाब का विरोध कर रहे उडुपी के प्री यूनिवर्सिटी (पीयू) कॉलेज के छात्रों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता एस नागनानंद ने अदालत को एक याचिकाकर्ता छात्रा की आधार कार्ड की फोटो दिखाई जिसमें उसने हिजाब नहीं पहना है। उन्होंने कहा, ऐसा नहीं है कि यह दावा किया जा रहा है कि उन्हें हमेशा सार्वजनिक रूप से हिजाब पहनना चाहिए।

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आज भी जारी रहेगी सुनवाई
वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि सड़क पर ड्रम बजाने वालों को समाज को धमकी देने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। हम एक शांतिपूर्ण समाज हैं। उन्होंने कहा कि उडुपी में बड़ी संख्या में मैं निजी तौर पर ऐसे मुसलमानों को जानता हूं जो कृष्ण मठ के पास रहते हैं और वहां पूरी तरह शांति है। इसके बाद अदालत ने सुनवाई स्थगित कर दी। सुनवाई गुरुवार को भी जारी रहेगी।
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भेदभाव दूर करने के लिए लाए थे एक समान यूनिफॉर्म: सीडीसी
कॉलेज विकास समिति (सीडीसी) ने हाईकोर्ट से कहा कि धर्म और धन के आधार पर भेदभाव को दूर करने के लिए समान यूनिफॉर्म का नियम लागू किया गया था। इसने कहा कि शिक्षण संस्थानों में छात्र-छात्राओं के बीच भेदभाव को दूर करने के लिए हमने सभी के लिए एक समान यूनिफॉर्म की शुरुआत की। यह सभी के लिए है चाहे वो अमीर हों या गरीब या फिर किसी भी धर्म के हों।
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मामले का निपटारा होने तक तय यूनिफार्म का पालन करें विद्यार्थी
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ऋतुराज अवस्थी ने बुधवार को कहा, जब तक हिजाब विवाद का निपटारा नहीं हो जाता तब तक विद्यार्थियों को स्कूल व कॉलेज द्वारा तय यूनिफार्म नियमों का पालन करना ही होगा। हम स्पष्ट कर देते हैं कि चाहें डिग्री कॉलेज हो या पीयू कॉलेज अगर प्रबंधन समिति की ओर से कोई यूनिफार्म तय की गई है तो विद्यार्थियों को उसका पालन करना ही होगा।

हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से इस मामले में कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (सीएफआई) की भूमिका से जुड़ी पूरी जानकारी तलब की है। उडुपी के पीयू कॉलेज में हिजाब पहनकर कक्षा में बैठने नहीं देने के बाद जिन छह छात्राओं ने विरोध शुरू किया था, ये सभी 1 जनवरी को कॉलेज फ्रंट ऑफ इंडिया की प्रेस कान्फ्रेंस में हिस्सा लिया था। 

पीयू कॉलेज के प्रधानाचार्य रूद्र गौड़ा ने बताया कि चार दिन पहले इन्हीं छह छात्राओं ने हिजाब पहनकर कक्षा में बैठने की इजाजत मांगी थी, जो उन्हें नहीं दी गई। इससे पहले छात्राएं हिजाब पहनकर कॉलेज तक आती थीं और कक्षा में जाने से पहले उसे उतार देती थीं। गौड़ा ने कहा, कॉलेज में हिजाब पहनने को लेकर कोई नियम कभी रहा ही नहीं क्योंकि 35 साल में कभी कोई भी छात्रा हिजाब पहनकर कक्षा में नहीं बैठी।

चीफ जस्टिस ऋतुराज अवस्थी, जस्टिस जेएम काजी और जस्टिस कृष्ण एस दीक्षित की पीठ को कॉलेज की ओर से वरिष्ठ वकील एसएस नागानंद ने बताया कि हिजाब विवाद सीएफआई से जुड़ी इन्हीं कुछ छात्राओं ने शुरू किया है। इसके बाद सीजेआई ने सीएफआई की पूरी जानकारी सरकार से मांगी।

इससे पहले मंगलवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने हाईकोर्ट से कहा था कि शिक्षण संस्थानों में हिजाब पर प्रतिबंध केवल कक्षाओं में और पढ़ाई के समय के लिए है। शिक्षण संस्थानों के परिसर में हिजाब पर कोई प्रतिबंध नहीं है। राज्य सरकार ने यह भी बताया कि संस्थागत अनुशासन के अधीन उचित प्रतिबंधों के साथ भारत में हिजाब पहनने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। कर्नाटक सरकार का कहना है कि हिजाब धार्मिक परंपराओं से अलग है और इसे अनिवार्य नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रितुराज अवस्थी, न्यायाधीश जेएम काजी और कृष्णा एम दीक्षित की पूर्ण पीठ कक्षाओं में हिजाब पहनने की अनुमति की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। इस विवाद की शुरुआत पिछले साल 31 दिसंबर को हुई थी जब उडुपी के सरकारी पीयू कॉलेज में हिजाब पहन कर आई छह छात्राओं को कक्षा में प्रवेश करने से रोक दिया गया था। पांच फरवरी को राज्य सरकार ने सभी छात्र-छात्राओं के लिए कॉलेज में तय यूनिफॉर्म पहनना अनिवार्य कर दिया था। 


बजरंग दल कार्यकर्ता की हत्या में एनआईए जांच की मांग 
सत्तारूढ़ भाजपा के एक खेमे ने बजरंग दल कार्यकर्ता हर्ष की हत्या मामले में एनआईए से जांच कराने की मांग की है। मुख्यमंत्री बसावराज बोम्मई ने बुधवार को कहा, पुलिस की जांच पूरी होने के बाद इस संबंध में फैसला किया जाएगा। जांच के साथ साथ हमारी प्राथमिकता हिंसा झेल चुके शिवमोगा में शांति और व्यवस्था कायम करना है। कई लोग गिरफ्तार किए गए हैं, छानबीन जारी है। पुलिस की जांच के परिणाम सामने आने के बाद ही तय किया जाएगा कि आगे किस एजेंसी से हत्या की जांच कराई जाएगी। बोम्मई ने कहा, हमें पुलिस को पूरा मौका देना चाहिए। इससे पहले राज्य के गृहमंत्री अरागा ज्ञानेंद्र ने बताया कि अब तक आठ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। शेष लोगों से पूछताछ जारी है। 

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