Karnataka Election: क्यों इस बार पीएम मोदी गुजरात से भी कम रैलियां करेंगे कर्नाटक में? बताई जा रही ये वजह
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विस्तार
182 विधानसभा सीटों वाले गुजरात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल हुए विधानसभा चुनावों में 31 रैलियां और जनसभाएं की थीं। लेकिन इस साल 224 सीटों वाली कर्नाटक विधानसभा के चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी की गुजरात की तुलना में कम रैलियों के होने का अनुमान लगाया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र की कर्नाटक में 22 से 24 रैलियां प्रस्तावित हैं। सियासी गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे और नाम पर लड़े जाने वाले दक्षिण के चुनावों में प्रधानमंत्री की कम रैली के क्या मायने निकल रहे हैं।
करेंगे दो दर्जन चुनावी रैलियां
कर्नाटक में हो रहे विधानसभा के चुनावों में भाजपा नरेंद्र मोदी के चेहरे और नाम पर अपने चुनावी प्रचार और अभियान को आगे बढ़ा रही है। जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी की कर्नाटक में अगले कुछ दिनों में तकरीबन दो दर्जन चुनावी रैलियां होनी तय मानी जा रही हैं। भाजपा से जुड़े एक वरिष्ठ नेता बताते हैं कि पहले यह संख्या 15 के करीब थी। लेकिन बाद में प्रधानमंत्री की रैलियों की मांग करते हुए संख्या बढ़ाने का अनुरोध किया गया था। सूत्रों की मानें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बार 22 से 24 रैलियां कर्नाटक में करने वाले हैं। जानकारी के मुताबिक चुनाव से कुछ रोज पहले प्रधानमंत्री कर्नाटक में लगातार तीन दिन रैलियां कर सकते हैं।
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224 विधानसभा सीटों वाले कर्नाटक में प्रधानमंत्री की रैलियां गुजरात से कम होने की बात कही जा रही है। इसको लेकर सियासी गलियारों में तमाम तरह की चर्चाएं हो रही हैं। चर्चा हो रही हैं कि आखिर ऐसी क्या वजह है कि कम विधानसभा सीटों वाले गुजरात में प्रधानमंत्री की ज्यादा रैलियां हुई और जहां उससे ज्यादा विधानसभा सीटें कर्नाटक में हैं, वहां प्रधानमंत्री की कम रैलियों की बात सामने आ रही है। राजनीतिक विश्लेषक हरिहर कहते हैं कि अभी तक आधिकारिक तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुनावी रैलियों की कोई जानकारी सामने नहीं आई है। लेकिन कर्नाटक के सियासी गलियारों में यह चर्चा बहुत जोरों से है कि प्रधानमंत्री इस बार 22 से 24 रैलियां ही करेंगे। वह कहते हैं कि प्रधानमंत्री ने पिछली बार तो कर्नाटक में सात दिनों में 14 रैलियां की थीं, जो कि कर्नाटक की चुनावी रैलियों के लिहाज से प्रधानमंत्री की बड़ी रैलियां थीं।
कर्नाटक में हर पांच साल बाद सरकार बदलने का रिवाज
वरिष्ठ पत्रकार राजनीतिक विश्लेषक सुदर्शन का कहना है कि कर्नाटक और गुजरात की सियासी रैलियों को आपस में जोड़ करके नहीं देखा जा सकता है। उनका कहना है कि कर्नाटक में हर पांच साल बाद सरकार बदलने का रिवाज है, जबकि गुजरात में भारतीय जनता पार्टी की लंबे समय से सत्ता चलती चली आ रही थी। गुजरात में एंटी इनकंबेंसी का भी खतरा था। इसके अलावा गुजरात को भारतीय जनता पार्टी अपनी राजनैतिक प्रयोगशाला के तौर पर देखती है। इसलिए भारतीय जनता पार्टी को वहां पर कम विधानसभा सीटों के बाद भी अपनी पूरी ताकत झोंकनी थी और उसका परिणाम भी सबके सामने है। वह कहते हैं कि कर्नाटक में ऐसा नहीं है कि भारतीय जनता पार्टी अपनी रैलियों में बड़े चेहरों को कम उतार रही है। गुजरात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा गृह मंत्री अमित शाह और भारतीय जनता पार्टी के अन्य दूसरे बड़े नेताओं के अलावा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत तमाम बड़े कद्दावर नेताओं की बड़ी रैलियां प्रस्तावित हैं। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते रहेंगे जनसभाएं और रैलियां भी होती रहेंगी।
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हालांकि भारतीय जनता पार्टी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री की रैलियां जिन जगहों पर प्रस्तावित हैं वह सबसे ज्यादा प्रभावशाली सीटें हैं। जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी की रैलियां इस बार उन इलाकों में ज्यादा प्रस्तावित हैं जहां पर पिछली बार पार्टी को सीटें कम मिली थीं। इसमें अलावा दलित बाहुल्य इलाके भी हैं। जेडीएस और कांग्रेस के गढ़ में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियां प्रतावित हैं। भाजपा से जुड़े नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी 2023 में चुनावी अधिसूचना जारी होने से पहले तक छह बार कर्नाटक का न सिर्फ दौरा कर चुके हैं, बल्कि राज्य को बड़ी योजनाओं से जोड़ भी चुके हैं।