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Karnataka: डीके शिवकुमार ने BJP पर धर्मस्थल मुद्दे पर राजनीति करने का लगाया आरोप, वीरेंद्र हेगड़े से की अपील
Tue, 26 Aug 2025 05:42 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
Published by: पवन पांडेय
Updated Tue, 26 Aug 2025 05:42 PM IST
सार
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भाजपा पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा धर्मस्थल मामले में धार्मिक भावनाओं को भड़का कर राजनीति कर रही है। इस दौरान उन्होंने धर्मस्थल मंदिर के धर्माधिकारी और सांसद वीरेंद्र हेगड़े से अपील की कि वे धर्म के नाम पर राजनीति को वहां पनपने न दें।
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डीके शिवकुमार, डिप्टी सीएम, कर्नाटक
- फोटो : ANI
विस्तार
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने मंगलवार को राज्य में विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधते हुए उसके नेताओं पर धर्मस्थल मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया। उन्होंने राज्यसभा सांसद वीरेंद्र हेगड़े से धर्म के नाम पर राजनीति न करने की अपील की। बता दें कि वीरेंद्र हेगड़े धर्मस्थल मंदिर के धर्माधिकारी (वंशानुगत प्रशासक) हैं और भाजपा की तरफ से संसद के उच्च सदन के लिए मनोनीत सदस्य हैं।
यह भी पढ़ें - Kerala: गुरुवायूर मंदिर में होगा शुद्धिकरण अनुष्ठान, गैर हिंदू व्लॉगर ने परिसर के तालाब में बनाई थी रील
SIT जांच पर भी राजनीति का आरोप
शिवकुमार ने कहा कि जब राज्य सरकार ने धर्मस्थल मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल का गठन किया था, तब भाजपा नेताओं ने इसका स्वागत किया था। लेकिन अब वही लोग धर्म युद्ध का नारा लगाकर मामले को राजनीतिक रंग देने में जुटे हैं। उन्होंने कहा, 'भाजपा धर्म के नाम पर राजनीति कर रही है। मैं धर्माधिकारी वीरेंद्र हेगड़े से हाथ जोड़कर अपील करता हूं कि वे इस तरह की राजनीति को धर्मस्थल की पवित्र भूमि पर होने न दें। वहां की शांति और पवित्रता को खराब न किया जाए।'
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'धर्मस्थल चलो' रैली पर सवाल
भाजपा ने 1 सितंबर को बड़े पैमाने पर 'धर्मस्थल चलो' रैली का एलान किया है। इस पर उपमुख्यमंत्री ने सवाल उठाते हुए कहा, 'अगर रैली करनी ही है तो बंगलूरू में क्यों नहीं कर रहे? पवित्र स्थल धर्मस्थल को राजनीति के लिए क्यों चुना गया? यह सब भाजपा की अंदरूनी लड़ाई का हिस्सा है। वही लोग साजिश करके धर्मस्थल को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं।' उन्होंने भाजपा नेताओं पर आरोप लगाया कि वे इलाके की शांति भंग कर रहे हैं और धर्मस्थल जैसी पावन जगह का राजनीतिक इस्तेमाल करना चाहते हैं।
'हम सभी धर्मों को मानते हैं'
शिवकुमार ने कहा कि कांग्रेस सरकार किसी की छवि खराब नहीं करना चाहती। उन्होंने कहा, 'हम सब धर्मों और आस्थाओं का सम्मान करते हैं। हमें किसी तरह की प्रसिद्धि नहीं चाहिए। हम सिर्फ यह अपील करते हैं कि धर्मस्थल की पवित्रता बनी रहे और राजनीति के नाम पर वहां का माहौल खराब न किया जाए।'
मैसूर दशहरा पर भी बोले शिवकुमार
कर्नाटक सरकार ने इस बार मैसूर दशहरा उत्सव का उद्घाटन प्रख्यात लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता बानु मुश्ताक से कराने का फैसला किया है। इस पर भाजपा ने आपत्ति जताई थी। लेकिन शिवकुमार ने सरकार के फैसले का बचाव किया। उन्होंने कहा, 'दशहरा सबका त्योहार है। मंदिरों में सभी समुदायों के लोग जाते हैं। हम भी मस्जिद और गिरजाघर जाते हैं। इसे किसी धर्म विशेष का त्योहार कहना गलत है। सरकार ने बानु मुश्ताक को आमंत्रित किया है और यह पूरी तरह से सही है।'
यह भी पढ़ें - Supreme Court: 'बिलों पर मुहर की ताकत राज्यपाल-राष्ट्रपति के पास...', सुप्रीम कोर्ट में बोली महाराष्ट्र सरकार
भाजपा की मांग- एनआईए जांच कराई जाए
भाजपा ने धर्मस्थल में कथित सामूहिक दफन की घटना की जांच एसआईटी से हटाकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी को देने की मांग की है। भाजपा नेताओं का कहना है कि इससे जनता का भरोसा बढ़ेगा और जांच पारदर्शी होगी। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने कहा कि 1 सितंबर को धर्मस्थल में होने वाली रैली का मकसद जनता को एकजुट करना और सरकार को चेतावनी देना है। उन्होंने पूरे कर्नाटक के हिंदू समुदाय से अपील की कि वे इस आंदोलन में शामिल हों। भाजपा के अनुसार 1 सितंबर की सुबह लोग अपने-अपने गांव और कस्बों के मंदिरों में पूजा करेंगे। फिर जुलूस और शोभायात्रा के साथ धर्मस्थल पहुंचेंगे। दोपहर 2 बजे धर्मस्थल में विशाल जनसभा होगी, जिसमें राज्य सरकार को एनआईए जांच की मांग का संदेश दिया जाएगा।
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SIT जांच पर भी राजनीति का आरोप
शिवकुमार ने कहा कि जब राज्य सरकार ने धर्मस्थल मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल का गठन किया था, तब भाजपा नेताओं ने इसका स्वागत किया था। लेकिन अब वही लोग धर्म युद्ध का नारा लगाकर मामले को राजनीतिक रंग देने में जुटे हैं। उन्होंने कहा, 'भाजपा धर्म के नाम पर राजनीति कर रही है। मैं धर्माधिकारी वीरेंद्र हेगड़े से हाथ जोड़कर अपील करता हूं कि वे इस तरह की राजनीति को धर्मस्थल की पवित्र भूमि पर होने न दें। वहां की शांति और पवित्रता को खराब न किया जाए।'
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'धर्मस्थल चलो' रैली पर सवाल
भाजपा ने 1 सितंबर को बड़े पैमाने पर 'धर्मस्थल चलो' रैली का एलान किया है। इस पर उपमुख्यमंत्री ने सवाल उठाते हुए कहा, 'अगर रैली करनी ही है तो बंगलूरू में क्यों नहीं कर रहे? पवित्र स्थल धर्मस्थल को राजनीति के लिए क्यों चुना गया? यह सब भाजपा की अंदरूनी लड़ाई का हिस्सा है। वही लोग साजिश करके धर्मस्थल को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं।' उन्होंने भाजपा नेताओं पर आरोप लगाया कि वे इलाके की शांति भंग कर रहे हैं और धर्मस्थल जैसी पावन जगह का राजनीतिक इस्तेमाल करना चाहते हैं।
'हम सभी धर्मों को मानते हैं'
शिवकुमार ने कहा कि कांग्रेस सरकार किसी की छवि खराब नहीं करना चाहती। उन्होंने कहा, 'हम सब धर्मों और आस्थाओं का सम्मान करते हैं। हमें किसी तरह की प्रसिद्धि नहीं चाहिए। हम सिर्फ यह अपील करते हैं कि धर्मस्थल की पवित्रता बनी रहे और राजनीति के नाम पर वहां का माहौल खराब न किया जाए।'
मैसूर दशहरा पर भी बोले शिवकुमार
कर्नाटक सरकार ने इस बार मैसूर दशहरा उत्सव का उद्घाटन प्रख्यात लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता बानु मुश्ताक से कराने का फैसला किया है। इस पर भाजपा ने आपत्ति जताई थी। लेकिन शिवकुमार ने सरकार के फैसले का बचाव किया। उन्होंने कहा, 'दशहरा सबका त्योहार है। मंदिरों में सभी समुदायों के लोग जाते हैं। हम भी मस्जिद और गिरजाघर जाते हैं। इसे किसी धर्म विशेष का त्योहार कहना गलत है। सरकार ने बानु मुश्ताक को आमंत्रित किया है और यह पूरी तरह से सही है।'
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भाजपा की मांग- एनआईए जांच कराई जाए
भाजपा ने धर्मस्थल में कथित सामूहिक दफन की घटना की जांच एसआईटी से हटाकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी को देने की मांग की है। भाजपा नेताओं का कहना है कि इससे जनता का भरोसा बढ़ेगा और जांच पारदर्शी होगी। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने कहा कि 1 सितंबर को धर्मस्थल में होने वाली रैली का मकसद जनता को एकजुट करना और सरकार को चेतावनी देना है। उन्होंने पूरे कर्नाटक के हिंदू समुदाय से अपील की कि वे इस आंदोलन में शामिल हों। भाजपा के अनुसार 1 सितंबर की सुबह लोग अपने-अपने गांव और कस्बों के मंदिरों में पूजा करेंगे। फिर जुलूस और शोभायात्रा के साथ धर्मस्थल पहुंचेंगे। दोपहर 2 बजे धर्मस्थल में विशाल जनसभा होगी, जिसमें राज्य सरकार को एनआईए जांच की मांग का संदेश दिया जाएगा।
क्या है धर्मस्थल विवाद?
धर्मस्थल कर्नाटक का एक प्रसिद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक तीर्थस्थल है। यह जगह दक्षिण कन्नड़ ज़िले में स्थित है और यहां भगवान मजुनाथेश्वर का प्रसिद्ध मंदिर है। खास बात यह है कि यहां जैन परंपरा के धर्माधिकारी (धर्माधिकारी - वीरेंद्र हेगड़े परिवार) मंदिर का प्रबंधन करते हैं, लेकिन पूजा-पाठ वैदिक परंपरा के हिंदू ब्राह्मण पुजारी करते हैं। इस तरह से यह स्थल धार्मिक सह-अस्तित्व और सामंजस्य का प्रतीक माना जाता है।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
हाल के महीनों में धर्मस्थल के पास एक कथित सामूहिक दफन की घटना सामने आई। कुछ स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि मंदिर परिसर या उससे जुड़े इलाके में गुप्त रूप से सामूहिक दफन हुआ है। यह बात फैलते ही माहौल गरमा गया और हिंदू संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।
भाजपा और उससे जुड़े संगठनों का आरोप है कि इस घटना से हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंची है और इसके पीछे गहरी साजिश है। उन्होंने कहा कि विशेष जांच दल इस मामले की सच्चाई सामने नहीं ला पाएगा, इसलिए इसकी जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंपी जानी चाहिए।
कांग्रेस सरकार का रुख
कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने एसआईटी गठित कर जांच शुरू कर दी है। सरकार का कहना है कि इस मामले की पूरी तरह से पारदर्शी जांच होगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। लेकिन कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि भाजपा इस मुद्दे को धार्मिक रंग देकर राजनीतिक फायदा उठाना चाहती है।
धर्मस्थल कर्नाटक का एक प्रसिद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक तीर्थस्थल है। यह जगह दक्षिण कन्नड़ ज़िले में स्थित है और यहां भगवान मजुनाथेश्वर का प्रसिद्ध मंदिर है। खास बात यह है कि यहां जैन परंपरा के धर्माधिकारी (धर्माधिकारी - वीरेंद्र हेगड़े परिवार) मंदिर का प्रबंधन करते हैं, लेकिन पूजा-पाठ वैदिक परंपरा के हिंदू ब्राह्मण पुजारी करते हैं। इस तरह से यह स्थल धार्मिक सह-अस्तित्व और सामंजस्य का प्रतीक माना जाता है।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
हाल के महीनों में धर्मस्थल के पास एक कथित सामूहिक दफन की घटना सामने आई। कुछ स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि मंदिर परिसर या उससे जुड़े इलाके में गुप्त रूप से सामूहिक दफन हुआ है। यह बात फैलते ही माहौल गरमा गया और हिंदू संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।
भाजपा और उससे जुड़े संगठनों का आरोप है कि इस घटना से हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंची है और इसके पीछे गहरी साजिश है। उन्होंने कहा कि विशेष जांच दल इस मामले की सच्चाई सामने नहीं ला पाएगा, इसलिए इसकी जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंपी जानी चाहिए।
कांग्रेस सरकार का रुख
कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने एसआईटी गठित कर जांच शुरू कर दी है। सरकार का कहना है कि इस मामले की पूरी तरह से पारदर्शी जांच होगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। लेकिन कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि भाजपा इस मुद्दे को धार्मिक रंग देकर राजनीतिक फायदा उठाना चाहती है।