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Karnataka: कांग्रेस को लिंगायतों की 'नाराजगी' पर भरोसा, BJP को कितना नुकसान पहुंचाएंगे शेट्टार और सावदी

Wed, 19 Apr 2023 04:22 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Wed, 19 Apr 2023 04:22 PM IST
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सार
Karnataka: जगदीश शेट्टार पूर्व मुख्यमंत्री होने के साथ-साथ कर्नाटक में येदियुरप्पा का राजनीतिक रथ हांकने वाले प्रमुख नेता भी रहे हैं। लिंगायत समुदाय के बीच उन्हें भी समाज के गर्व के रूप में देखा जाता है। अकेले दम पर भी वे दो दर्जन से ज्यादा लिंगायत बहुल सीटों पर भाजपा को नुकसान पहुंचा सकते हैं...
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Karnataka: Congress trusts on 'unpleasement' of Lingayats against BJP
Karnataka: Jagdish Shettar and Laxman Savadi - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

कर्नाटक विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस ने अपने-अपने पांसे फेंक दिए हैं। कांग्रेस को सरकार के खिलाफ 'एंटी इनकम्बेंसी फैक्टर' और लिंगायत नेताओं की भाजपा से नाराजगी पर भरोसा है। उसने भाजपा के बागी लिंगायत नेता जगदीश शेट्टार को उनकी पारंपरिक सीट हुबली धारवाड़ से मैदान में उतारकर उसकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। वह भाजपा के दूसरे बागी लिंगायत नेता लक्ष्मण सावदी को पहले ही अथानी से टिकट थमा चुकी है। इससे कांग्रेस ने कर्नाटक में भाजपा के सबसे कोर वोट बैंक पर हमला किया है। इसका उसे लाभ मिल सकता है।   

जगदीश शेट्टार पूर्व मुख्यमंत्री होने के साथ-साथ कर्नाटक में येदियुरप्पा का राजनीतिक रथ हांकने वाले प्रमुख नेता भी रहे हैं। लिंगायत समुदाय के बीच उन्हें भी समाज के गर्व के रूप में देखा जाता है। अकेले दम पर भी वे दो दर्जन से ज्यादा लिंगायत बहुल सीटों पर भाजपा को नुकसान पहुंचा सकते हैं। जिस तरह संगठन छोड़ने के बाद उन्होंने भाजपा के संगठन महासचिव बीएल संतोष पर नाराजगी जताई है, माना जा रहा है कि इससे भाजपा के संगठन पर भी असर पड़ सकता है। पूर्व उपमुख्यमंत्री लक्ष्मण सावदी भी कर्नाटक में भाजपा के बड़े चेहरे रहे हैं। नए चेहरों को अवसर देने की भाजपा की नीति में इस बार उन्हें भी टिकट नहीं दिया गया। लेकिन सावदी भाजपा के लिए खतरा साबित हो सकते हैं।  

यह वीडियो देखें: Karnataka Election 2023: कांग्रेस ने पूरी की जगदीश शेट्टार की मुराद

भाजपा के इन बागी नेताओं का महत्त्व कितना है, इसे कांग्रेस बखूबी समझती है। यही कारण है कि उनके शीर्ष नेता डीके शिवकुमार ने कहा है कि शेट्टार और सावदी के कारण उनका दो से तीन फीसदी वोट बैंक बढ़ गया है। उनका दावा है कि इन नेताओं के आने के बाद कांग्रेस राज्य में 150 का आंकड़ा भी पार कर सकती है। इसी से समझा जा सकता है कि इन नेताओं के कारण कर्नाटक के समीकरण बदल सकते हैं।


भाजपा कैसे निपटेगी

सत्तारूढ़ भाजपा ने 222 उम्मीदवारों में से 72 नए चेहरों को मैदान में उतारा है। हुबली धारवाड़ सीट से पार्टी ने अपने राज्य संगठन महामंत्री (संगठन) को मैदान में उतारा है। उन्होंने बयान दिया है कि पार्टी चुनावों में नए चेहरों को अवसर देना चाहती थी, यही कारण है कि कुछ पुराने चेहरों को टिकट नहीं दिया गया है। भाजपा को अनुमान है कि नए चेहरों के भरोसे वह बड़े लिंगायत नेताओं की नाराजगी को मात दे सकती है। इसी तरह के प्रयोग इसके पहले गुजरात और उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में भी किए गए थे। पार्टी के ये प्रयोग वहां सफल रहे थे।

हालांकि, कर्नाटक की स्थानीय राजनीति के जानकार मानते हैं कि भाजपा का यह दांव कर्नाटक में उलटा पड़ सकता है। इसका बड़ा कारण है कि कर्नाटक की राजनीति पार्टीगत होने की बजाय चेहरों पर ज्यादा केंद्रित होती है। यहां के मतदाता अपने नेताओं से सीधे प्रभावित होते हैं और उनके पाला बदलने पर उनके साथ वे भी पाला बदल लेते हैं। इसका प्रमाण बीएस येदियुरप्पा की भाजपा से नाराजगी के बाद पार्टी छोड़ने के दौरान हुआ था। इस बार भी भाजपा को इसी तरह का नुकसान हो सकता है।

यह भी पढ़ें: Karnataka Election: कर्नाटक सीएम बसवराज बोम्मई ने नामांकन किया दाखिल, जानें क्या कुछ कहा

हालांकि, पार्टी नेता मानते हैं कि जगदीश शेट्टार या लक्ष्मण सावदी जैसे नेताओं की नाराजगी इस बार काम नहीं करेगी। इसका कारण है कि उसके खेमे में अभी भी बीएस येदियुरप्पा जैसे दिग्गज लिंगायत नेता उपस्थित हैं जो समुदाय के बड़े चेहरे के तौर पर देखे जाते हैं। उनके बेटे विजयेंद्र भी इस बार शिकारीपुरा से मैदान में हैं, लिहाजा येदियुरप्पा पार्टी को जीत दिलाने में कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ेंगे। पार्टी ने लिंगायत उम्मीदवारों को भी टिकटों में पर्याप्त भागीदारी दी है, लिहाजा उसका अनुमान है कि शेट्टार और सावदी उसे ज्यादा परेशान नहीं कर पाएंगे।

सामाजिक समीकरणों के भरोसे भाजपा

भाजपा का मानना है कि उसने जिस तरह कर्नाटक में टिकटों को बांटने में लिंगायत, वोक्कालिगा, अनुसूचित जाति और जनजातीय समुदायों को पर्याप्त हिस्सेदारी दी है, उससे राज्य में नए समीकरण पैदा हुए हैं। ये समीकरण उसे सत्ता में दोबारा लाने में सफल रहेंगे। जनता ने किस दल के समीकरणों पर भरोसा जताया है, यह 13 मई को ही पता चलेगा जब चुनाव परिणाम सामने आएंगे।

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