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Karnataka: कर्नाटक मंत्रिमंडल के समक्ष पेश की जाएगी जातिगत जनगणना रिपोर्ट, विश्लेषण के बाद होगा फैसला

Wed, 15 Jan 2025 02:34 PM IST
श्वेता महतो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू Published by: श्वेता महतो Updated Wed, 15 Jan 2025 02:34 PM IST
सार

राज्य गृह मंत्री ने कहा कि अब जो हो रहा है वह रिपोर्ट से जानकारी सामने आ रही है। कर्नाटक के दो प्रमुख समुदायों वोक्कालियाग और लिंगायत ने किए गए सर्वेक्षण पर आपत्ति जताई।

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Karnataka caste census report likely to be placed before cabinet news in hindi
जी. परमेश्वर - फोटो : ANI

विस्तार

जातिगत जनगणना रिपोर्ट को 16 जनवरी को कर्नाटक मंत्रिमंडल के समक्ष पेश करने की संभावना है। राज्य गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने जोर देकर कहा कि इसकी सामग्री को सर्वजनिक किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट के आधार पर कोई भी निर्णय सरकार का विशेषाधिकार है और इसका विश्लेषण करने के बाद ही निर्णय लिया जाएगा। समाज के कुछ वर्गों द्वारा उठाई गई आपत्तियों और सत्तारूढ़ कांग्रेस के भीतर इसके खिलाफ आवाजों के बीच कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने अपने तत्कालीन अध्यक्ष के. जयप्रकाश हेगड़े के नेतृत्व में पिछले साल 29 फरवरी को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को रिपोर्ट सौंपी थी।
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राज्य गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने कहा, "यह निर्णय लिया गया कि रिपोर्ट को कैबिनेट के सामने खोला जाएगा, वरना इससे जानकारी लीक हो सकती है। इस पर चर्चा होगी या नहीं, मैं इसके बारे में अभी नहीं बोल सकता, एक बार रिपोर्ट खोलने के बाद कम से कम हमें कुछ जानकारी मिलेगी।" रिपोर्ट और इसकी सिफारिशों के कार्यान्वयन पर कुछ प्रमुख वर्गों के विरोध को लेकर एक सवाल पर उन्होंने कहा सरकार को करदाताओं के 160 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद रिपोर्ट मिली है। इसे कम से कम सार्वजनिक किया जाना चाहिए और इसके आधार पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
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राज्य गृह मंत्री ने कहा कि अब जो हो रहा है वह रिपोर्ट से जानकारी सामने आ रही है। कर्नाटक के दो प्रमुख समुदायों वोक्कालियाग और लिंगायत ने किए गए सर्वेक्षण पर आपत्ति जताई। उन्होंने इसे अवैज्ञानिक बताया और इसे खारिज करने और नए सिरे से सर्वेक्षण कराने की मांग की। उपमुख्यमंत्री डीकेशिवकुमार जो वोक्कालिगा से ताल्लुक रखते हैं, ने कुछ मंत्रियों के साथ समुदाय द्वारा पहले मुख्यमंत्री को सौंपे गए एक ज्ञापन पर हस्ताक्षरकर्ता थे। इस ज्ञापन में उन्होंने रिपोर्ट और डाटा को अस्वीकार करने का अनुरोध किया। वीरशैव-लिंगायतों की सर्वोच्च संस्था अखिल भारतीय वीरशैव महासभा ने भी सर्वेक्षण के प्रति अपनी अस्वीकृति व्यक्त की। उन्होंने नए सिरे से सर्वेक्षण कराने की मांग की। कई लिंगायत मंत्रियों और विधायकों ने भी आपत्ति जताई है। 
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