Karnataka: दस विधायकों के निलंबन पर फूटा भाजपा का गुस्सा, जेडीएस के साथ विधानसभा कार्यवाही का किया बहिष्कार
भाजपा और जनता दल सेक्युलर के एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से भी मुलाकात की और कांग्रेस सरकार की कार्यशैली के खिलाफ याचिका दी। याचिका में आरोप लगाया गया कि कांग्रेस सरकार तानाशाही तरीके से काम कर रही है।
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राज्यपाल से की मुलाकात
भाजपा और जनता दल सेक्युलर के एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से भी मुलाकात की और कांग्रेस सरकार की कार्यशैली के खिलाफ याचिका दी। याचिका में आरोप लगाया गया कि कांग्रेस सरकार तानाशाही तरीके से काम कर रही है। इसके बाद स्पीकर यूटी खादेर ने डिप्टी स्पीकर रुद्रप्पा लामानी के साथ राज्यपाल से मुलाकात की और बुधवार की विधानसभा की कार्यवाही से संबंधित रिपोर्ट सौंपी।
इन विधायकों को किया गया निलंबित
बता दें कि बुधवार को विधानसभा में जमकर हंगामा हुआ। भाजपा विधायकों ने सदन में हंगामा कर रहे और बिल की प्रतियों को फाड़कर प्रदर्शन कर रहे दस भाजपा विधायकों को बाकी सत्र से निलंबित कर दिया। जिन विधायकों को निलंबित किया गया, उनमें सीएन अश्वथ नारायण, वी सुनील कुमार, आर अशोक, अरगरा जनेंद्र, डी वेदव्यास कामत, यशपाल सुवर्णा, धीरज मुनीराज, ए उमानाथ कोटियन, अरविंद बेलाद और वाई भरत शेट्टी शामिल हैं।
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बता दें कि भाजपा जेडीएस का आरोप है कि कांग्रेस सरकार ने बेंगलुरु में हाल ही में हुई विपक्ष की बैठक के लिए 30 आईएएस अधिकारियों की तैनाती की थी। इसे लेकर भाजपा जेडीएस ने विरोध दर्ज कराया, जिससे सदन में कार्यवाही के दौरान हंगामा हो गया। भाजपा ने विधानसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का नोटिस दिया।
भाजपा के निलंबन पर बोले स्पीकर- मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए
कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष यू टी खादर ने सदन में उनके अमर्यादित और अपमानजनक आचरण के लिए भाजपा के 10 सदस्यों को निलंबित करने के अपने फैसले का शुक्रवार को बचाव किया। उन्होंने कहा कि इस मामले का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि उन्होंने कोई राजनीतिक या पक्षपातपूर्ण फैसला नहीं लिया है और जैसा कि आरोप लगाया जा रहा है, यह कार्रवाई सत्तारूढ़ दल के दबाव में नहीं थी।
यू टी खादर ने कहा कि विधानसभा के सुचारू संचालन की जिम्मेदारी केवल अध्यक्ष की नहीं है, सभी नेताओं और सदस्यों को इसके लिए सहयोग करना चाहिए और जिम्मेदारी से व्यवहार करना चाहिए। मैंने पक्षपातपूर्ण तरीके से कोई निर्णय नहीं लिया। यदि कोई सदस्य अशोभनीय व्यवहार करता है, अध्यक्ष का अपमान करता है या व्यवस्था को बदनाम करता है, तो अध्यक्ष होने के नाते मुझे कार्रवाई करनी होगी, मैंने यही किया है।