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Karnataka: 'बंगलूरू उत्तर भारत के लिए बंद', ऑनलाइन पोस्ट से छिड़ी बहस; सोशल मीडिया पर ऐसी आ रही प्रतिक्रियाएं
Sat, 25 Jan 2025 04:55 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
Published by: पवन पांडेय
Updated Sat, 25 Jan 2025 04:55 PM IST
सार
सोशल मीडिया वैसे तो कई मुद्दे यूजर्स के बीच बहस की वजह बनते हैं, लेकिन एक नए विषय पर तमाम प्रतिक्रियाएं आ रही है। दरअसल, बब्रुवाहन नाम के एक्स हैंडल से हाल ही में की गई पोस्ट ने तमाम यूजर्स का काफी ध्यान आकर्षित किया है, जिसे 115,000 से अधिक बार देखा गया, 198 बार फिर से पोस्ट किया गया और 1,839 बार लाइक किया गया है।
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बंगलूरू पुलिस कमिश्नर
- फोटो : ANI
विस्तार
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हो गई है जिसमें कहा गया है कि 'बंगलूरू उत्तर भारत के लिए बंद है' जिससे कन्नड़ भाषा विवाद को लेकर ऑनलाइन एक तीखी बहस छिड़ गई है। सोशल मीडिया 'एक्स' पर एक पोस्ट में, एक यूजर ने लिखा: 'बंगलूरू उत्तर भारत और पड़ोसी राज्यों के लिए बंद है जो कन्नड़ सीखना नहीं चाहते हैं। अगर वे भाषा और संस्कृति का सम्मान नहीं कर सकते हैं तो उन्हें बंगलूरू की आवश्यकता नहीं है।'
बब्रुवाहन नाम के एक्स हैंडल से किया गया पोस्ट
बब्रुवाहन (@परमात्मा) नाम के एक्स हैंडल से हाल ही में की गई पोस्ट ने तमाम यूजर्स का काफी ध्यान आकर्षित किया है, जिसे 115,000 से अधिक बार देखा गया, 198 बार फिर से पोस्ट किया गया और 1,839 बार लाइक किया गया। वहीं पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए, एक सोशल मीडिया यूजर जिसने 'बंगलूरू में प्रवासी' होने का दावा किया, ने कहा कि पोस्ट थोड़ा कठोर लग सकता है।
सोशल मीडिया यूजर्स की ऐसी आ रही प्रतिक्रियाएं
उन्होंने कहा, 'लेकिन जब भी मैं देखता हूं कि बंगलूरू में लोग कन्नड़ को किसी आदिवासी भाषा के रूप में पूरी तरह से नजरअंदाज कर देते हैं और यहां तक कि कॉरपोरेट ऑफिस में भी कन्नड़ बोलने वालों को अनपढ़ समझते हैं, तो मुझे बहुत दुख होता है। कन्नड़ एक असाधारण समृद्ध भाषा है, जिसे साहित्य अकादमी और ज्ञानपीठ पुरस्कार समेत सबसे अधिक साहित्यिक पुरस्कार मिले हैं।' उन्होंने सुझाव दिया कि कन्नड़ लोगों के लिए नकारात्मक प्रतिक्रिया का सहारा लेने के बजाय सकारात्मक तरीके से कन्नड़ गौरव के लिए आंदोलन शुरू करने का समय आ गया है। उन्होंने कहा, 'अपनी भाषा और संस्कृति पर गर्व करने में कोई अंधभक्ति नहीं है।'
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एक अन्य सोशल मीडिया यूजर ने एक अलग दृष्टिकोण व्यक्त करते हुए कहा कि बंगलूरू आज दूसरे राज्यों के मेहनती लोगों की वजह से अस्तित्व में है, जिन्होंने इसके विकास में योगदान दिया है। उन्होंने कहा, 'आज, बंगलूरू दूसरे राज्यों के मेहनती लोगों की वजह से है, जिन्होंने इस शहर को विकसित करने के लिए बहुत प्रयास किए हैं। इसे मत भूलिए! अब जब सब कुछ बन गया है, तो क्या आप चाहते हैं कि दूसरे लोग यहां से चले जाएं? कन्नड़ लोगों और कर्नाटक सरकार पर शर्म आती है, जो चुपचाप बैठी हैं।'
एक यूजर ने कन्नड़ सीखने के लिए जताई सहमति
एक अन्य यूजर ने कन्नड़ सीखने के लिए सहमति जताते हुए मांग की कि राज्य सरकार दफ्तरों में कन्नड़ पढ़ाने के लिए अच्छे शिक्षकों को नियुक्त करें। 'ठीक है, मैं सीख लूगा... लेकिन अपनी सरकार से कहिए कि वह एप्लीकेशन विकसित करने के लिए कन्नड़ कोड भाषा का इस्तेमाल करे, और उससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि दफ्तरों में पढ़ाने के लिए अच्छे कन्नड़ शिक्षकों को नियुक्त करें। इसके साथ ही, अपनी सरकार से कहिए कि वह दूसरे राज्यों के लोगों को उनके राज्यों में वापस भेज दे।'
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बब्रुवाहन नाम के एक्स हैंडल से किया गया पोस्ट
बब्रुवाहन (@परमात्मा) नाम के एक्स हैंडल से हाल ही में की गई पोस्ट ने तमाम यूजर्स का काफी ध्यान आकर्षित किया है, जिसे 115,000 से अधिक बार देखा गया, 198 बार फिर से पोस्ट किया गया और 1,839 बार लाइक किया गया। वहीं पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए, एक सोशल मीडिया यूजर जिसने 'बंगलूरू में प्रवासी' होने का दावा किया, ने कहा कि पोस्ट थोड़ा कठोर लग सकता है।
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सोशल मीडिया यूजर्स की ऐसी आ रही प्रतिक्रियाएं
उन्होंने कहा, 'लेकिन जब भी मैं देखता हूं कि बंगलूरू में लोग कन्नड़ को किसी आदिवासी भाषा के रूप में पूरी तरह से नजरअंदाज कर देते हैं और यहां तक कि कॉरपोरेट ऑफिस में भी कन्नड़ बोलने वालों को अनपढ़ समझते हैं, तो मुझे बहुत दुख होता है। कन्नड़ एक असाधारण समृद्ध भाषा है, जिसे साहित्य अकादमी और ज्ञानपीठ पुरस्कार समेत सबसे अधिक साहित्यिक पुरस्कार मिले हैं।' उन्होंने सुझाव दिया कि कन्नड़ लोगों के लिए नकारात्मक प्रतिक्रिया का सहारा लेने के बजाय सकारात्मक तरीके से कन्नड़ गौरव के लिए आंदोलन शुरू करने का समय आ गया है। उन्होंने कहा, 'अपनी भाषा और संस्कृति पर गर्व करने में कोई अंधभक्ति नहीं है।'
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एक अन्य सोशल मीडिया यूजर ने एक अलग दृष्टिकोण व्यक्त करते हुए कहा कि बंगलूरू आज दूसरे राज्यों के मेहनती लोगों की वजह से अस्तित्व में है, जिन्होंने इसके विकास में योगदान दिया है। उन्होंने कहा, 'आज, बंगलूरू दूसरे राज्यों के मेहनती लोगों की वजह से है, जिन्होंने इस शहर को विकसित करने के लिए बहुत प्रयास किए हैं। इसे मत भूलिए! अब जब सब कुछ बन गया है, तो क्या आप चाहते हैं कि दूसरे लोग यहां से चले जाएं? कन्नड़ लोगों और कर्नाटक सरकार पर शर्म आती है, जो चुपचाप बैठी हैं।'
एक यूजर ने कन्नड़ सीखने के लिए जताई सहमति
एक अन्य यूजर ने कन्नड़ सीखने के लिए सहमति जताते हुए मांग की कि राज्य सरकार दफ्तरों में कन्नड़ पढ़ाने के लिए अच्छे शिक्षकों को नियुक्त करें। 'ठीक है, मैं सीख लूगा... लेकिन अपनी सरकार से कहिए कि वह एप्लीकेशन विकसित करने के लिए कन्नड़ कोड भाषा का इस्तेमाल करे, और उससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि दफ्तरों में पढ़ाने के लिए अच्छे कन्नड़ शिक्षकों को नियुक्त करें। इसके साथ ही, अपनी सरकार से कहिए कि वह दूसरे राज्यों के लोगों को उनके राज्यों में वापस भेज दे।'