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कर्नाटक विधानसभा चुनाव: अहिंदा और हिंदुत्व की लड़ाई में बदल गया मुकाबला

Fri, 11 May 2018 10:24 PM IST
कर्नाटक से लौटकर विनोद अग्निहोत्री
कर्नाटक से लौटकर विनोद अग्निहोत्री Updated Fri, 11 May 2018 10:24 PM IST
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Karnataka Assembly Election turns out in the battle of Ahinda and Hindutva

शनिवार को कर्नाटक के साढ़े चार करोड़ से भी ज्यादा मतदाता अगले पांच साल के लिए अपनी सरकार चुनने के लिए मतदान करेंगे। विकास और भ्रष्टाचार के मुद्दों से शुरू हुआ चुनाव प्रचार आखिर तक आते-आते अहिंदा के जातीय समीकरण और हिंदुत्व के ध्रुवीकरण की लड़ाई में बदल गया। अगर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के अहिंदा समीकरण के अपने पक्ष में गोलबंद होने वाले लिंगायत कार्ड के जरिए भाजपा के लिंगायत जनाधार में सेंध लगाने का दांव कामयाब हुआ तो कांग्रेस की सरकार बनने की संभावना बनती है, लेकिन अगर भाजपा अपने लिंगायत, सवर्ण जनाधार को समेटे रखते हुए हिंदुत्व के ध्रुवीकरण के दांव के जरिए अहिंदा को कमजोर करने में कामयाब रही तो कर्नाटक की गद्दी के लिए उसकी राह आसान हो जाएगी। 

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अगर जनता दल (एस) अपने प्रभावक्षेत्र में वोक्कालिगा के साथ अपने मुस्लिम वोटों को बनाए रखने में कामयाब हो गया तो त्रिशंकु विधानसभा में सत्ता की कुंजी देवेगौड़ा परिवार के हाथ में होगी। चुनाव प्रचार के पहले दौर में कांग्रेस के मुकाबले भाजपा पिछड़ती दिखाई दे रही थी, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मैदान में उतरते ही भाजपा कार्यकर्तांओं और समर्थकों में खासा जोश आ गया और भाजपा कड़े मुकाबले में आ गई। खासकर तटीय कर्नाटक, बेंगालुरू, मध्य कर्नाटक, हैदराबाद कर्नाटक के भाजपा के प्रभावक्षेत्र में मोदी की रैलियों का काफी असर पड़ा। इन रैलियों के जरिए भाजपा ने हिंदुत्व के ध्रुवीकरण का दांव भी जमकर खेला।
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बेंगलुरु से रामनगर, चामराज नगर, मंड्या, मैसूर, कोलार, चिक्काबल्लापुर, कोडागू, तुमकूर, शिमोगा, श्रृंगेरी, द्रावणगेरे, चिकमंगलूर, हासन से वापस बेंगालुरु तक की लंबी यात्रा में जितने भी लोगों से बातचीत हुई, उससे जो तस्वीर उभरती है वह है कि राज्य के मुस्लिम, कुर्बा और अन्य पिछड़े वर्गों और दलितों का झुकाव कांग्रेस की ओर ज्यादा है जबकि लिंगायत, ब्राह्मण और अन्य सवर्णों की पहली पसंद भाजपा है। अनुसूचित जनजाति नायक जिनकी हर विधानसभा सीट पर खासी तादाद है कांग्रेस और भाजपा के बीच बंटे दिखे। वहीं जद (एस) के पक्ष में वोक्कालिगा मतदाताओं का बहुमत है। 
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बेंगलुरु में बीदर के व्यवसायी मोहम्मद वजीरुद्दीन, मोहम्मद बिखारुद्दीन, कमाल पाशा दावा करते हैं कि मुसलमानों का वोट इस बार कांग्रेस के साथ जाएगा। जद (एस) उसमें बंटवारा नहीं कर पाएगा। मंड्या जिले के मुरुकन्नाहर्ली गांव में खुर्रम, चिकमंगलूर जिले के तरीकेरे गांव में सादिक अहमद, तुमकूर के बिजली मिस्त्री पाशा, रशीद, शिकारीपुरा में सैयद जाबिर, रियाजुद्दीन, शरीफुद्दीन, श्रृंगेरी के रास्ते पर मिले नदीम, इम्तियाज, करीम,आरिफ, हैदर, मोहम्मद समेत जितने भी मुसलमानों से बात हुई ज्यादातर ने अपनी पहली पसंद कांग्रेस को बताया। 
 

Karnataka Assembly Election turns out in the battle of Ahinda and Hindutva

इन सबने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और राहुल गांधी दोनों के प्रति अपना भरोसा जताया लेकिन जनता दल (एस) के महासचिव दानिश अली इससे सहमत नहीं हैं। दानिश अली कहते हैं कि जहां भी जद (एस) के उम्मीदवार भाजपा के मुकाबले मजबूत हैं और सीधी लड़ाई में हैं, वहां मुसलमान कांग्रेस को नहीं जद (एस) के साथ है। कांग्रेस और सिद्धारमैया के प्रति झुकाव कुछ इसी तरह का संकेत कुर्बा और पिछड़े वर्ग के मतदाताओं ने दिया। इनका कहना था कि सिद्धारमैया सरकार ने किसानों, पिछड़े वर्गों के लिए बहुत काम किया है। इसलिए उन्हें फिर मौका मिलना चाहिए। जबकि दलित मतदाताओं में कांग्रेस, भाजपा और जद (एस) तीनों के प्रति ही झुकाव का संकेत अलग अलग क्षेत्रों में मिला। 

सिद्धारमैया के चुनाव क्षेत्र चामुंडेश्वरी के कुमारबिद्दू गांव में मंदिर के पास बैठे दलित और नायक समुदाय के वेंकटेश, रघु, कृष्णा, महादेवा, सुरेश, अपूर्वा,रवि आदि ने मिली जुली राय दी। ज्यादातर ने जद (एस) के पक्ष में बात की वहीं कुछ ने कहा कि सिद्धारमैया से शिकायत तो है पर विधायक की जगह मुख्यमंत्री चुनना ज्यादा बेहतर है। जबकि इसी क्षेत्र में वोक्कालिंगा समुदाय के लिंगप्पा, जगदीश, कलाचारी, वासवन्ना, महादेवा ने जद (एस) के साथ मजबूती से जमे होने की बात कही। किसानी करने वाले रामचंद्रा और ईश्वर का झुकाव भी जद (एस) की तरफ ही दिखा। जेटियाहुंडी गांव के दलित मजदूर स्वामी नायक, कुमारअन्ना और राजन्ना ने कांग्रेस और जद(एस) में मुकाबले की बात कही।

लेकिन जैसे ही आप चिकमंगलूर श्रृंगेरी, शिमोगा जिलों में दाखिल होते हैं, तस्वीर बदलने लगती है और जद (एस) की जगह कांग्रेस के साथ भाजपा मुकाबले में आ जाती है। यहां लिंगायतों, शहर में अन्य वर्गों से बात करने पर लोग भाजपा और कांग्रेस की ही बात करते हैं। नागराज रेड्डी, नागभूषण, नागेश्वर राव आदि की पसंद भाजपा है। लेकिन शहर से निकलकर गांवों में किसानों विशेषकर पिछड़े वर्ग के किसानों से बात करने पर फिर कांग्रेस के प्रति उनका रुझान दिखाई पड़ता है। गावों में कई एसे लोग भी मिलते हैं जो मोदी से प्रभावित हैं, लेकिन कहते हैं कि जब लोकसभा का चुनाव होगा तब उन्हें वोट देंगे। अभी राज्य और क्षेत्र के हिसाब से फैसला करेंगे।

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