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कारगिल विजय दिवस 2025: असम में भी शौर्य और बलिदान को किया सलाम, वीर नारियों को किया गया सम्मान
Sun, 27 Jul 2025 12:34 AM IST
शिव शुक्ला
एन. अर्जुन, गुवाहाटी
एन. अर्जुन, गुवाहाटी
Published by: शिव शुक्ला
Updated Sun, 27 Jul 2025 12:34 AM IST
सार
अमर बलिदानियों को श्रद्धांजलि देने के लिए असम सैनिक कल्याण निदेशालय द्वारा गुवाहाटी के दिघलीपुखुरी स्थित राज्य युद्ध स्मारक में एक पुष्पांजलि व स्मृति समारोह आयोजित किया गया। गुवाहाटी में रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र सिंह रावत ने इसके बारे में जानकारी दी।
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गुवाहाटी के दिघलीपुखुरी में असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कारगिल युद्ध (1999) में भारत की ऐतिहासिक विजय की स्मृति में असम में भी कारगिल विजय दिवस श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया। यह दिन ऑपरेशन विजय की सफलता को सम्मानित करता है, जिसके अंतर्गत भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तानी घुसपैठियों द्वारा अवैध रूप से कब्जा किए गए दुर्गम ऊंचाई वाले चौकियों को वीरता से पुनः प्राप्त किया। युद्ध 26 जुलाई 1999 को आधिकारिक रूप से समाप्त हुआ था और भारत ने नियंत्रण रेखा की पवित्रता बहाल की थी।
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इस वीरगाथा के अमर बलिदानियों को श्रद्धांजलि देने के लिए असम सैनिक कल्याण निदेशालय द्वारा गुवाहाटी के दिघलीपुखुरी स्थित राज्य युद्ध स्मारक में एक पुष्पांजलि व स्मृति समारोह आयोजित किया गया। गुवाहाटी में रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र सिंह रावत ने इसके बारे में जानकारी दी। समारोह के मुख्य अतिथि असम के महामहिम राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य थे, जिनका स्वागत सैन्य परंपरा अनुसार 'सलामी', एनसीसी गार्ड द्वारा जनरल सैल्यूट और राष्ट्रगान के साथ किया गया। 'अमर जवान' को प्रेजेंट आर्म्स के साथ सैन्य सम्मान अर्पित किए गए और पुष्पांजलि अर्पित की गई।
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मुख्यमंत्री हिमंत विस्वा सरमा की ओर से पुष्पांजलि ब्रिगेडियर पलाश चौधरी (सेनि), सेना पदक प्राप्त द्वारा अर्पित की गई, जो स्वयं कारगिल युद्ध के वीर योद्धा हैं। भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के प्रतिनिधियों ने भी पुष्पांजलि अर्पित की। सेना के पूर्व अधिकारी ब्रिगेडियर रंजीत बोरठाकुर (सेनि), कॉमोडोर केसी चौधरी (सेनि) और ग्रुप कैप्टन देबानंद गोहेन (सेनि) ने अपने-अपने बलों की ओर से श्रद्धांजलि दी। उल्लेखनीय रूप से, कारगिल युद्ध में 18 ग्रेनेडियर्स के कमांडिंग ऑफिसर रहे कर्नल दिलीप कुमार बोरा (सेनि) ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए श्रद्धांजलि दी। वीर नारियों और वीर माताओं को सम्मानित करने के लिए एक विशेष सम्मान समारोह आयोजित किया गया, जिसमें उनके अद्वितीय धैर्य और साहस की सराहना की गई।
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लेफ्टिनेंट जनरल आर. पी. कालिता (सेनि), और लेफ्टिनेंट जनरल पीके भाराली (सेनि), ने अपने प्रेरक उद्बोधन में भारतीय सेना के वीर जवानों के अद्वितीय पराक्रम, त्याग और अडिग संकल्प का स्मरण कराया। महामहिम राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने देश की रक्षा में सशस्त्र बलों के बलिदान के प्रति गहरी कृतज्ञता प्रकट की और उनके देशभक्ति, साहस तथा कर्तव्यनिष्ठा की सराहना की।
समारोह में एनसीसी कैडेट्स और आर्मी स्कूल नारेंगी के विद्यार्थियों द्वारा देशभक्ति गीतों, भाषणों और एक भावनात्मक नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई, जिसने उपस्थित जनसमूह को गर्व और भावुकता से भर दिया। कारगिल विजय दिवस राष्ट्र की रक्षा में प्राणों की आहुति देने वाले वीरों को समर्पित एक पावन दिवस है, जो आने वाली पीढ़ियों को साहस, सेवा और बलिदान की अमर गाथा का स्मरण कराता रहेगा।