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कानों देखीः मोदी कैबिनेट का हाल

Sat, 11 Aug 2018 05:19 PM IST
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 11 Aug 2018 05:19 PM IST
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kano dekhi: present day situation of Narendra Modi cabinet
मोदी कैबिनेट
केंद्र की मोदी सरकार में कई मंत्रियों के हौसले पस्त चल रहे हैं। उन्हें अब अपनी प्रोफाइल और सरकार के जनता के बीच बनने वाले इकबाल में कोई खास तब्दीली नजर नहीं आ रही है। राम विलास पासवान समेत कई मंत्रियों के चेहरे पर चमक लौट आई है। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह भी काफी खुश चल रहे हैं। वहीं जूनियर से सीनियर बनने वाले कुछ मंत्रियों को लेकर अंदरखाने में खुसफुसाहट तेज हो गई है।
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केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी एक बार फिर अपनी प्रोफाइल, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से रिश्ते, पार्टी के नेताओं से संवाद पर विशेष ध्यान दे रही हैं। ईरानी के अलावा केंद्रीय वित्त (प्रभार), रेल, कोयला मंत्री पीयुष गोयल से ईर्ष्या रखने वाले मंत्रियों की संख्या बढ़ रही है। निर्मला सीतारमण भी अपने सहयोगियों के निशाने पर हैं। वहीं कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुश रखने के लिए हर जतन करने वाले मंत्री के रूप में देखा जा रहा है।
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पहले धोया और अंत में धो उठे

कांग्रेस पार्टी के एक पुराने महासचिव आजकल अपने घर पर आराम फरमा रहे हैं। उनके पास अब सोनिया गांधी, राहुल गांधी समेत किसी हाई कोटरी वाले नेता का फोन भी नहीं आता। वह मान बैठे हैं कि यह समय राजनीति से वनवास का है। थोड़ी उम्मीद की लौ 2019 में जिंदा हो सकती है। बात बनी तो ठीक नहीं तो राजनीति के अज्ञातवास की तरफ जाना पड़ सकता है। वह कहते हैं कि इसके लिए मन से तैयार भी हैं, लेकिन दशकों तक राजनीति में मझे नेता के लिए हर समय भारी पड़ रहा है।
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वह एक तरफ खुद को माखन लाल फोतेदार बनता देख रहे हैं तो दूसरी तरफ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के भीतर तमाम कमिया दिखाई पड़ रही हैं। सूत्र का कहना है कि राहुल ने संसद के मानसून सत्र में अपने मन माफिक सबकुछ तय किया, लेकिन मिला कुछ नहीं। सत्र के आरंभ में उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री मोदी जमकर को धोया और सत्र के आखिरी दिन में उपसभापति के चुनाव के दौरान पूरी पार्टी की धुलाई करा दी। अंत भला सो सब भला। अब आप समझ सकते हैं कांग्रेस पार्टी की नई और पुरानी पीढ़ी किस दौर में जी रही है। 

शरद पवार के तुरुप का पत्ता 

कांग्रेस पार्टी शरद पवार का नया अंदाज देख रही थी। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अक्सर उनके घर के रास्ते पर देखे जा रहे थे। पवार और सोनिया गांधी में संवाद भी बढ़ रहा था। इस नये बदलाव से कई कांग्रेस के चाणक्य खौफजदा थे तो कई उत्साहित। चाणक्यों को लग रहा था कि शरद पवार जल्द ही नई गुगली फेंक सकते हैं। राज्यसभा में कई के चेहरे तब खिल गए, जब कांग्रेस अध्यक्ष ने एनसीपी की वंदना चव्हाण को राज्यसभा में उपसभापति का उम्मीदवार बनाए जाने की मंजूरी दे दी।

लेकिन अचानक सब गश खा गए। जैसे ही पवार को पता लगा कि जनता दल (बीजू) के नवीन पटनायक साथ नहीं देने वाले, उन्होंने फौरन पार्टी के नेता प्रफुल्ल पटेल को सक्रिय कर दिया। पटेल ने यह कहने में जरा भी देर नहीं लगाई कि कांग्रेस पार्टी किसी दूसरे उम्मीदवार की तलाश कर ले। दरअसल शरद पवार बिना वजह अपने दल के प्रत्याशी की हार का ठीकरा अपनी छवि पर नहीं फोड़वाना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने कांग्रेस के नेताओं की दलील को भी खारिज कर दिया।

यह शरद पवार का ऐसा अंदाज था जो न कांग्रेस उगल पा रही है और न ही निगल। इसके बाद तो जो हुआ सब जानते हैं। विपक्षी एकता की कलई खुल गई। कांग्रेस के प्रत्याशी बीके हरिप्रसाद को वोट देने के लिए सहयोगी दलों के सांसदों ने ही किनारा करना शुरू कर दिया। यहां तक कि कभी राहुल गांधी की शान में कसीदे पढऩे वाले बेनी प्रसाद वर्मा भी राज्यसभा में मतदान के बाद संसद भवन पहुंचे। जया बच्चन ने भी कांग्रेस प्रत्याशी को वोट नहीं डाला। 

'आप अभी अमर सिंह को जानते नहीं हैं'

kano dekhi: present day situation of Narendra Modi cabinet
अमर सिंह - फोटो : amar ujala
अमर सिंह कौन हैं? 

आप सब जानेंगे कि अमर सिंह कौन हैं? अमर सिंह का राजनीति से लेकर कॉरपोरेट जगत ने कई रूप देखा है। आजकल वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गुणगान करते नहीं थक रहे हैं। इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी का विरोध करने वाले दलों को तो बिल्कुल भी नहीं छोड़ रहे हैं। लेकिन अमर सिंह का अपने भतीजे अखिलेश यादव से भी मोह भंग नहीं हो रहा है। बिना मुलायम सिंह यादव पर कोई वार किए, अमर अंकल भतीजे अखिलेश पर जमकर जहर बुझे तीर छोड़ रहे हैं।

भतीजा अखिलेश भी कम नहीं है। अंकल को याद करने से बाज नहीं आते। ऐसे में अमर सिंह बालक अखिलेश से विदेश में पढ़कर आए यदुवंशी छोरे को उसके नेता, सांसद, सीएम और पार्टी का अध्यक्ष बनने तक में अपनी भूमिका की याद दिलाने से नहीं थक रहे हैं। सांसद अमर सिंह के शिवपाल सिंह यादव से अच्छे रिश्ते हैं। खबर है कि वहां भी अमर सिंह अभी खिचड़ी पका रहे हैं।

काफी समय से चुप चल रहे शिवपाल ने अब कुछ-कुछ बोलना शुरू किया है। किसी की सलाह पर हाल में वह योगी आदित्यनाथ से भी मिलकर लौटे हैं। सारी कवायद में टीम अखिलेश अमर सिंह को नहीं भूलती। उसका कहना है कि अभी आप कहां जान पाए कि अमर सिंह कौन हैं? थोड़ा इंतजार कीजिए और नया किरदार और नया रूप देखिए।

टिकट कटेंगे, एनडीए सत्ता में आएगी 

भाजपा के सांसदों के लिए यह खबर काफी तंग कर रही है। टिकट का जिक्र आते ही सांसद खुद ही कुबूल कर ले रहे हैं कि 2019 में बड़ी संख्या में टिकट कटेंगे। उत्तरप्रदेश के पूर्वाचल क्षेत्र के कई सांसद तो अभी से झंडेवाली मंदिर के पास के कार्यालय में संपर्क बढ़ाए हुए हैं। एक युवा सांसद का कहना है कि बस एक बार और सांसद बन गए तो फिर जिन्दगी में कुछ ज्यादा नहीं चाहिए। वहीं एक सांसद ऐसे भी हैं जिनका कहना है कि 2014 के चुनाव का खर्च ही नहीं निकल पाया। 

'रस्सी जल गई पर ऐंठन नहीं गई'

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सांसदों के टिकट कटने की खबर का सबसे अधिक असर उत्तरप्रदेश के सांसदों पर है। हालांकि सभी का मानना है कि प्रधानमंत्री भले ही सत्ता में न लौटें, लेकिन एनडीए सरकार बनाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गुडबुक में गिने जाने वाले एक मंत्री का कहना है कि मोदी सरकार भाजपा की 284 सीट के साथ 2019 में सत्ता में लौटेगी। वहीं, भूतल एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से मिलने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। गडकरी जी अपने विभाग के कामों से लेकर राजनीतिक लोगों से मिलने में काफी व्यस्त हैं।

जली रस्सी की ऐठन 

जली रस्सी की ऐठन देखनी हो तो कांग्रेस को देख लीजिए। यह हम नहीं उ.प्र. के विपक्ष में बैठने वाले राजनीतिक दल के एक प्रमुख रणनीतिकार का कहना है। वह पिछले दिनों कांग्रेस के अध्यक्ष से चर्चा कर रहे थे। इस चर्चा ने उन्हें काफी ताज्जुब में डाल दिया। बताते हैं चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने बताया कि पूरे देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र की सरकार के खिलाफ जबरदस्त नाराजगी बढ़ रही है। हर वर्ग और तबका नाराज है। कांग्रेस पार्टी ने जनता की इस नाराजगी से खुद को कनेक्ट करने के लिए पूरी तैयारी कर ली है।

सूत्र का कहना है कि कांग्रेस अध्यक्ष से बात करके यही लग रहा था कि देश के जनता की यह नाराजगी वोट में तब्दील होकर सीधे कांग्रेस की झोली में जाने वाली है। सूत्र का कहना है कि यह स्थिति तब है जब कांग्रेस ने कई राज्यों में अपनी सरकार गंवाई और हर चुनाव प्रचार में असफल अभियान का संचालन कर काफी कुछ खोया है। प्रमुख सूत्र के अनुसार यही हाल रहा तो 2019 से पहले बनने वाले राजनीतिक तालमेल में भी दुश्वारियां खड़ी हो सकती हैं। हम 'जो जहां मजबूत है, वहां लड़े' की आधार पर प्रधानमंत्री मोदी और शाह की भाजपा को नहीं हरा सकते।
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