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कानों देखी: नए सांसदों ने बढ़ाई मुश्किल, बंगला खाली करने के नाम पर पुरानों की आनाकानी

Sun, 30 Jun 2019 07:32 AM IST
शशिधर पाठक शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Published by: शशिधर पाठक Updated Sun, 30 Jun 2019 07:32 AM IST
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kano dekhi: new member of parliament 2019 lutyens bungalow
parliament - फोटो : PTI
पुराने मठाधीशों ने दिल्ली के लुटियन जोन में कब्जा जमाए रखा है। आडवाणी, जोशी जैसे कई नेता तो किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। पिछली सरकार के कई मंत्री इस बार केवल सांसद हैं। पिछली बार के कई भाजपा सांसद टिकट न पाने के कारण बाहर हैं। ऊपर से इस बार नए सांसदों की बहार है।
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78 महिला सांसद सदन में पहुंची हैं तो वाईएसआर कांग्रेस के जगन मोहन रेड्डी के 18 सांसद पहली बार सदन में पहुंचे हैं। भाजपा के भी 133 सांसद लोकसभा में नए आए हैं। डीएमके के 17 सांसद नए हैं। यहां तक कि कांग्रेस पार्टी के भी 52 में से 30 सांसद नए हैं। सबको बंगला चाहिए। वहीं पुराने हैं कि बंगला खाली करने के नाम पर आनाकानी कर रहे हैं। शरद यादव चुनाव हार गए हैं। बंगला खाली करना पड़ेगा।
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यही हाल ज्योतिरादित्य सिंधिया का है। सफदरजंग रोड पर कार्नर का बंगला पिता माधव राव सिंधिया के जमाने से है। ज्योतिरादित्य भी चुनाव हार गए हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता रहे मल्लिकार्जुन खड़गे के सामने भी यही समस्या है। पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को भी राज्यसभा नहीं मिली है। मामला यहीं नहीं खत्म हो रहा है। अभी से गेस्ट के रूप में रहने वालों की अर्जी की संख्या भी हर रोज बढ़ रही है। दूसरी तरफ भाजपा के नेताओं और संघ के लोगों का दिल्ली में दायरा बढ़ रहा है। सबको मकान चाहिए। 
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कांग्रेस हल्ला ब्रिगेड तो चुनाव हार गई

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी लोकसभा में कुछ खामोश से चल रहे हैं। सोनिया गांधी राहुल की खामोशी देखकर कुछ ज्यादा सक्रिय हुई हैं। यूपीए चेयरपर्सन इन दिनों संसद भवन में अपनी लगातार उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। सेंट्रल हाल में भी जा रही हैं। कारण साफ है कि अभी राहुल गांधी हार की खीझ से बाहर नहीं आ पाए हैं। पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती लोकसभा में नेता चुनने को लेकर हुई।

बड़ी मशक्कत के बाद अधीर रंजन चौधरी चुने गए। दरअसल यह दिक्कत इसलिए आई, क्योंकि लगभग दिग्गज नेता चुनाव हार गए। दिग्गजों को छोड़िए लोकसभा में राहुल गांधी हल्ला ब्रिगेड भी चुनाव हार गई। ज्योतिरादित्य सिंधिया, राजीव सतव भी चुनाव हार गए। रंजीता रंजन भी सांसद नहीं बन पाईं। 52 सांसदों में कोई 30 सांसद नए चुनकर आए हैं। इनमें कई संसदीय कामकाज को ढंग से समझने में अभी समय लगाएंगे। अब ऐसे में कांग्रेस पार्टी के सामने मौजूदा समय में संसदीय चर्चा में भाग लेने वाले नेताओं का नाम तय करने में भी पसीना आ रहे हैं। 

गुमनामी में चले गए चौधरी

दो-चार सांसद तक सीमित रहकर भी चर्चा के केंद्र में बने रहने में सक्षम रहे चौधरी अजीत सिंह अज्ञातवास पर चले गए हैं। अखिलेश और माया की लड़ाई में चौधरी की बौखलाहट भी बढ़ रही है। बढ़े भी क्यों न। एक तो चौधरी पिता पुत्र सीट नहीं जीत पाए। ऊपर से सरकारी बंगला पहले ही छिन चुका है। स्वास्थ्य भी ठीक नहीं चल रहा है। अब चौधरी करें तो क्या? चौधरी को आगे की राजनीति में भविष्य भी अभी साफ नजर आ रहा है। बताते हैं दोनों स्थितियां चौधरी की हर रोज चिंता बढ़ा रही हैं। 

अभी मोदी जी को बोलने दीजिए

कांग्रेस के नेताओं को तब काफी मिर्ची लगी जब संसद के दोनों सदनों में प्रधानमंत्री ने जमकर चिढ़ाया। प्रधानमंत्री ने अपने अंदाज में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को चिढ़ाया। बताते हैं लोकसभा में प्रधानमंत्री के वक्तव्य के बाद कुछ नेताओं ने आपस में चर्चा की। इसके बाद सबने तय किया कि अभी नई-नई सरकार बनी है। अभी प्रधानमंत्री मोदी जी सरकार चलाएं। एक साल तक सरकार को समय दिया जाए और इसके बाद कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल की भूमिका में आएगी। 
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