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Kanchanjunga Accident: मालगाड़ी ट्रेन के चालक की बेगुनाही का दावा, रेलवे यूनियन ने कहा-हमारे पास नए दस्तावेज

Fri, 21 Jun 2024 10:46 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: पवन पांडेय Updated Fri, 21 Jun 2024 10:46 PM IST
सार

Kanchanjunga Accident: पश्चिम बंगाल के दार्जलिंग में कंचनजंघा एक्सप्रेस को पीछे से मालगाड़ी ट्रेन के टक्कर मारने से हुए हादसे में 10 लोगों की मौत और 40 लोग घायल हैं। वहीं इस हादसे में मृत मालगाड़ी चालक को दोषी ठहराए जाने के मामले में रेलवे यूनियन ने अलग दावा किया है।

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Kanchanjunga accident: Driver unions point at new documents to claim goods train driver's innocence
मालगाड़ी ट्रेन के चालक की बेगुनाही का दावा - फोटो : पीटीआई

विस्तार

कंचनजंघा हादसे को लेकर रेलवे यूनियनों ने रेलवे बोर्ड के उस बयान का खंडन किया है, जिसमें प्रथम दृष्टया रेलवे बोर्ड ने कंचनजंगा एक्सप्रेस के साथ हुई टक्कर के लिए अब मृत मालगाड़ी चालक को दोषी ठहराया था। रेलवे यूनियनों ने दावा किया है कि उनके पास मृत मालगाड़ी चालक की बेगुनाही साबित करने के लिए नए दस्तावेज हैं। 
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'मृतक को बनाया जा रहा बलि का बकरा'
रेलवे यूनियन ने मालगाड़ी चालक के रानीपतरा स्टेशन परिसर के बाद पहले दो दोषपूर्ण सिग्नलों को पार करने के लिए जारी किए गए प्राधिकरण पत्र टी/369 (3बी) का हवाला दिया हैं। जिसमें 15 किमी प्रति घंटे की गति सीमा थी, जबकि दूसरे प्राधिकरण पत्र टी/ए 912 में किसी गति सीमा का उल्लेख नहीं था। 17 जून को न्यू जलपाईगुड़ी के पास हुए हादसे पर कर्मचारी यूनियनों ने कहा था कि चालक को सीधे तौर पर दोषी ठहराना, जो अपना बचाव करने के लिए जीवित नहीं है। उसे रेलवे की कमियों के लिए बलि का बकरा बनाने के समान है। 
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स्वचालित सिग्नलिंग प्रणाली हो गई थी खराब 
रेलवे बोर्ड ने अपनी शुरुआती प्रतिक्रिया में कहा कि मालगाड़ी चालक ने सिग्नल को न ध्यान देते तेजी से पार किया, जिससे दुर्घटना हुई। हालांकि बाद में, यह सामने आया कि उस दिन सुबह 5:50 बजे से स्वचालित सिग्नलिंग प्रणाली खराब हो गई थी, जिसके कारण रानीपतरा और चत्तर हाट के बीच सभी स्वचालित सिग्नल खराब हो गए थे। रेलवे परिचालन मानदंडों का पालन करते हुए, रानीपतरा के स्टेशन मास्टर ने सभी ट्रेन चालकों को दोषपूर्ण सिग्नलों से गुजरने के लिए प्राधिकरण पत्र टी/ए 912 जारी किया। 
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रेलवे यूनियन ने किया मृतक चालक का बचाव
इस मामले में भारतीय रेलवे लोको रनिंगमैन संगठन और ऑल इंडिया रेलवेमेन फेडरेशन (एआईआरएफ) जैसे रेलवे यूनियनों ने मृतक चालक का बचाव किया और कहा कि उसके पास दोषपूर्ण सिग्नलों को पार करने का प्राधिकरण पत्र था, इसलिए उसकी कोई गलती नहीं थी। रेलवे यूनियनों ने न्यू जलपाईगुड़ी के परिचालन विभाग को मालगाड़ी चालक को टी/ए 912 जारी करने से पहले यह सुनिश्चित नहीं करने के लिए दोषी ठहराया कि खंड रानीपतरा और चत्तर हाट के बीच का मार्ग साफ था। यूनियनों के अनुसार, जब स्वचालित सिग्नलिंग प्रणाली में कई सिग्नल विफल हो जाते हैं, तो सुरक्षा मानदंडों के अनुसार एक बार में केवल एक ट्रेन को अनुमति दी जानी चाहिए। रेलवे बोर्ड ने इस तर्क का विरोध करते हुए कहा कि भले ही मालगाड़ी चालक को दोषपूर्ण सिग्नलों को पार करने का प्राधिकरण टी/ए 912 जारी किया गया था, लेकिन उसे प्रत्येक लाल सिग्नल पर एक मिनट के ठहराव के साथ 10 किमी प्रति घंटे की सावधानी गति से आगे बढ़ना चाहिए था। 

रिक्तियों को जल्द भरने पर भी हुई चर्चा
रेलवे मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने कर्मचारी संघों के पदाधिकारियों के साथ आपात बैठक कर के कर्मचारियों के रिक्त पदों को जल्द से जल्द भरने पर चर्चा की। महानिदेशक (मानव संसाधन) और रेलवे बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों ने दो संघों ‘ऑल इंडिया रेलवेमेन्स फेडरेशन’ (एआईआरएफ) और ‘नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमेन’ (एनआरआईएफ) के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और इन पदों को जल्द से जल्द भरने में उनका सहयोग मांगा।

बैठक में शामिल हुए एआईआरएफ के महासचिव शिव गोपाल मिश्रा ने कहा, ‘‘मुझे खुशी है कि रेलवे बोर्ड ने रिक्त पदों को भरने में अत्यधिक तत्परता दिखाई और रेलगाड़ियों के सुरक्षित संचालन के लिए यह बहुत ही सकारात्मक कदम है।’’ इसके पहले सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में रेलवे बोर्ड ने बताया था कि संरक्षा श्रेणी के तहत लगभग 10 लाख स्वीकृत पदों में से 1.5 लाख से अधिक रिक्त हैं।

संरक्षा श्रेणी के पदों में चालक, निरीक्षक, चालक दल नियंत्रक, चालक प्रशिक्षक, ट्रेन नियंत्रक, पटरी की मरम्मत करने वाले कर्मी, स्टेशन मास्टर, इलेक्ट्रिक सिग्नल के मरम्मतकर्मी और सिग्नलिंग पर्यवेक्षक शामिल हैं। मिश्रा ने कहा कि बैठक के बाद उसी दिन 18,799 सहायक ट्रेन चालक (एएलपी) के लिए रिक्तियों की घोषणा की गई और भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है।

संयुक्त जांच दल को छानबीन में क्या मिला?
वहीं संयुक्त जांच दल के पांच वरिष्ठ अधिकारियों ने 18 जून को पाया कि मालगाड़ी चालक सिग्नल संबंधी पहलुओं और गति प्रतिबंधों का उल्लंघन करने का दोषी है। जांच दल के एक अधिकारी ने असहमति जताते हुए न्यू जलपाईगुड़ी डिवीजन के परिचालन विभाग को दोषी ठहराया। अब यह बात सामने आई है कि रानीपतरा में सिग्नल फेल होने के बाद सभी ड्राइवरों को प्राधिकरण पत्र टी/369 (3बी) भी जारी किया गया था, जिसमें उन्हें स्टेशन परिसर के तुरंत बाद दो दोषपूर्ण प्रस्थान सिग्नलों को 15 किमी प्रति घंटे की प्रतिबंधित गति से पार करने के लिए कहा गया था। 
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