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केंद्रीय मंत्री के संपर्क में असंतुष्ट गुट: ममता खेमे का अगला कदम क्या, कल्याण बनर्जी और सौगत रॉय क्या बोले?

Sat, 13 Jun 2026 09:56 PM IST
राकेश कुमार एएनआई, कोलकाता।
एएनआई, कोलकाता। Published by: राकेश कुमार Updated Sat, 13 Jun 2026 09:56 PM IST
सार

पश्चिम बंगाल में टीएमसी के भीतर जारी अंदरूनी कलह पर सांसद कल्याण बनर्जी ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने सुदीप बंदोपाध्याय के जाने को बेअसर बताते हुए इसे नेताओं के लालच का परिणाम और बंगाल की राजनीति का काला अध्याय घोषित किया है। साथ ही भाजपा पर विपक्ष को खत्म करने की साजिश रचने का आरोप लगाया है।
 

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kalyan banerjee on tmc internal rift and sudip bandyopadhyay leaving party kolkata
टीएमसी में भीतरघात - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय जबरदस्त उथल-पुथल मची हुई है। तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी अंदरूनी कलह अब खुलकर सड़कों पर आ गई है। टीएमसी के वरिष्ठ नेता और सांसद कल्याण बनर्जी ने पार्टी के भीतर मचे इस घमासान पर बेहद तीखा और बड़ा बयान दिया है। उन्होंने वर्तमान राजनीतिक हालात को पश्चिम बंगाल के इतिहास का सबसे 'काला अध्याय' करार दिया है। कल्याण बनर्जी ने विपक्षी दलों और पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर तीखा हमला बोला है।
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पश्चिम बंगाल के इतिहास का 'काला अध्याय'
कल्याण बनर्जी ने साफ शब्दों में कहा कि जब हमें 2024 में पांच साल के कार्यकाल का जनादेश मिला था, तो कम से कम पांच साल तक हमें सिर्फ पार्टी के काम पर ध्यान देना चाहिए था। चुनाव तो अपने समय पर होने ही हैं। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि अगर हम 2029 में और अधिक सीटें जीतकर वापस आते हैं, तो क्या भाजपा के सभी सदस्य इस्तीफा दे देंगे? कल्याण बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में इस तरह का बिखराव पहली बार हो रहा है। इसे राज्य के राजनीतिक इतिहास में हमेशा एक काले अध्याय के रूप में याद किया जाएगा।
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नेताओं के लालच ने बिगाड़ा खेल
पार्टी में मची इस टूट से आहत कल्याण बनर्जी ने अतीत का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के राजनेता चाहे कांग्रेस काल के हों, सीपीएम काल के हों या वाम मोर्चा के दौर के, वे कभी भी इस तरह से बिखरे हुए नहीं थे। राज्य में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि सिर्फ और सिर्फ निजी लालच की वजह से आज यह स्थिति पैदा हुई है। इन स्वार्थी लोगों ने ही मिलकर इस काले अध्याय को लिखा है। हालांकि, उन्होंने भरोसा जताया कि बंगाल की जनता बेहद समझदार है और वह अंततः इन लोगों को करारा जवाब देगी।


सुदीप बंदोपाध्याय के जाने से कोई फर्क नहीं- कल्याण बनर्जी
टीएमसी के भीतर मचे आंतरिक गतिरोध और वरिष्ठ नेता सुदीप बंदोपाध्याय के पार्टी का साथ छोड़ने पर कल्याण बनर्जी ने बेबाकी से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि अगर सुदीप-दा चले गए हैं, तो चले जाएं। बहुत से लोग पार्टी छोड़कर गए हैं और सुदीप-दा भी चले गए हैं। इससे क्या फर्क पड़ता है? इससे कोई अंतर नहीं आने वाला। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि जो लोग छोड़कर गए हैं, उन्हें कभी न कभी तो चुनाव का सामना करना ही पड़ेगा। जब वे जनता के बीच जाएंगे, तो आम लोग उन्हें अच्छी तरह सबक सिखाएंगे।

 


यह भी पढ़ें: 'बागी गुट को कानूनी दर्जा असंभव': पूर्व TMC सांसद का दावा- पाला बदलते ही जाएगी सदस्यता; स्पीकर बिरला पर नजरें

लोकतंत्र और विपक्ष को खत्म करने की साजिश: बनर्जी
कल्याण बनर्जी ने केंद्र सरकार और राज्य के विपक्षी नेताओं को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि हमारे लोकतंत्र में संसद और राज्य विधानसभाओं की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। लेकिन आज देश में लोकतंत्र को ही नष्ट किया जा रहा है। चुनाव के बाद एक दल सरकार बनाता है और दूसरा विपक्ष में बैठता है। विपक्ष का काम सरकार की तारीफ करना नहीं है। विपक्ष की मुख्य भूमिका देश के लिए बोलना, सरकार की गलतियों को उजागर करना और आम जनता की समस्याओं को उठाना है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र में नरेंद्र मोदी, अमित शाह और बंगाल में शुभेंदु अधिकारी का सिर्फ एक ही एजेंडा है कि किसी भी तरह विपक्ष के दायरे और उनकी संख्या को छोटा कर दिया जाए, ताकि वे खुद विपक्ष के इलाके पर कब्जा कर सकें।

बागी खेमे में कौन-कौन शामिल? 
बता दें कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष की यह आग कितनी भयावह है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पार्टी के सांसदों का एक बहुत बड़ा धड़ा बगावत पर उतारू है। संसद के गलियारों से आ रही खबरों के मुताबिक, टीएमसी के कुल 28 लोकसभा सांसदों में से 18 नाराज सांसद पहले ही एक औपचारिक पत्र पर दस्तखत करके आलाकमान से अलग होने का मन बना चुके थे। अब सुदीप बंदोपाध्याय के भी इस बागी गुट में शामिल होने के बाद नाराज लोकसभा सांसदों की यह संख्या बढ़कर 190 हो गई है। यह आंकड़ा टीएमसी के कुल सांसदों का दो-तिहाई से भी ज्यादा है, जिससे इस बागी गुट के पास दलबदल विरोधी कानून से बचते हुए संसद में खुद को 'असली टीएमसी' साबित करने का कानूनी रास्ता लगभग साफ हो गया है।




कुणाल घोष ने सुदीप बंदोपाध्याय पर बोला हमला
वहीं, पार्टी के भीतर मची इस रार पर पार्टी विधायक कुणाल घोष ने भी कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि ममता दीदी ने इन लोगों को राजनीति में ऊंचे पद और बड़ा सम्मान दिया, लेकिन बदले में इन लोगों ने दीदी को सिर्फ और सिर्फ धोखा दिया है। उन्होंने सुदीप बंदोपाध्याय पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि उनका इतिहास हमेशा से पार्टियां बदलने का रहा है और वे सिर्फ ममता दीदी को गुमराह करके अपनी राजनीति चमकाते रहे हैं। घोष ने याद दिलाया कि एक समय इस सच को उजागर करने के लिए उन्हें खुद पार्टी से सस्पेंड होना पड़ा था, लेकिन आज सुदीप के इस कदम ने साबित कर दिया है कि वर्षों पहले कही गई उनकी बात शत-प्रतिशत सच थी।



सुदीप बंदोपाध्याय ने मुझसे बात की थी- सौगत रॉय
इसके अलावा पार्टी के भीतर मची इस बगावत पर पार्टी के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय का भी एक बेहद चौंकाने वाला बयान सामने आया है। दिल्ली में सुदीप बंदोपाध्याय और शताब्दी रॉय की केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से हुई मुलाकात पर सौगत रॉय ने कहा कि सुदीप ने महज तीन-चार दिन पहले ही मुझसे बात की थी और भरोसा दिया था कि वह अभी कहीं नहीं जा रहे हैं। उन्होंने मुझसे यह भी कहा था कि अगर वह भविष्य में कोई कदम उठाएंगे भी, तो मुझसे पूछकर ही करेंगे। लेकिन आज मैंने देखा कि वह शताब्दी रॉय को अपने साथ लेकर बंगाल में 'ऑपरेशन लोटस' के प्रभारी भूपेंद्र यादव के आवास पर पहुंच गए। सौगत रॉय ने आहत मन से कहा कि अब इस पर मैं क्या ही कहूं? किसी पार्टी में टिके रहना या उसे छोड़ देना पूरी तरह से इंसान की नैतिकता और उसके जमीर पर निर्भर करता है।

 
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