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कलराज राजस्थान आरिफ खान बने केरल के राज्यपाल, भगत सिंह कोश्यारी को मिला महाराष्ट्र का कार्यभार

Sun, 01 Sep 2019 12:39 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Sun, 01 Sep 2019 12:39 PM IST
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Kalraj Mishra appointed as Governor of Rajasthan, Koshyari got Maharashtra responsibility
राष्ट्रपति ने आज कई राज्यों में नए राज्यपालों की नियुक्ति की है - फोटो : Facebook

हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कलराज मिश्र अब राजस्थान के राज्यपाल होंगे। मिश्र के स्थान पर बंडारू दत्तात्रेय को हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। राष्ट्रपति भवन कार्यालय द्वारा रविवार को जारी एक विज्ञप्ति में बताया गया है कि हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कलराज मिश्रा का तबादला कर उन्हें राजस्थान की कमान सौंपी गयी है।

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विज्ञप्ति के अनुसार, भगत सिंह कोश्यारी महाराष्ट्र के राज्यपाल होंगे और आरिफ मोहम्मद खान केरल में राज्यपाल पद की जिम्मेदारी संभालेंगे। इसी प्रकार डॉक्टर तमिलिसाई सुंदरराजन को तेलंगाना का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। विज्ञप्ति के अनुसार, ये सभी नियुक्तियां पदभार संभालने के दिन से प्रभावी होंगी।

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कौन हैं केरल के नियुक्त राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान

Kalraj Mishra appointed as Governor of Rajasthan, Koshyari got Maharashtra responsibility
arif mohammad khan - फोटो : ANI

केरल के राज्यपाल के तौर पर नियुक्ति होने पर आरिफ खान ने कहा, 'यह सेवा करने का बेहतरीन अवसर है। मुझे भारत जैसे देश में पैदा होने का सौभाग्य मिला जो इतना विशाल है और विविधताओं से भरा हुआ है। यह मेरे लिए भारत के इस हिस्से को जानने का एक शानदार अवसर है। जो भारत की सीमा बनाता है और इसे भगवान का अपना देश कहा जाता है।'

गौरतलब है कि कांग्रेस से दो बार, जनता दल और बसपा से एक-एक बार लोकसभा का सदस्य रह चुके आरिफ मोहम्मद खान ने वर्ष 2004 भाजपा में शामिल हुए थे। हालांकि वर्ष 2007 में भाजपा छोडने के साथ ही उन्होंने संसदीय राजनीति से दूरी बना ली थी।

अभी हाल ही में आरिफ मोहम्मद खान उस समय चर्चा में आए जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में किसी नेता का नाम लिए बिना यह बयान दिया था कि कांग्रेस के एक नेता ने मुसलमानों के बारे में गटर में पड़े रहने की बात कही थी। ये कांग्रेस नेता कोई और नहीं बल्कि आरिफ मोहम्मद खान ही थे। बता दें कि राजीव गांधी सरकार में मंत्री रहे आरिफ मोहम्मद खान एक इंटरव्यू में कहा था 'नरसिम्हा राव जी ने खुद मुझसे कहा है कि ये (मुसलमान) हमारे वोटर हैं, हम इन्हें क्यों नाराज करें। हम इनके सामाजिक सुधारक नहीं हैं। कांग्रेस पार्टी समाज सुधार का काम नहीं कर रही है। हमारा रोल समाज सुधारक का नहीं है। हम राजनीति के बिजनेस में हैं और अगर ये गड्ढे में पड़े रहना चाहते हैं तो पड़े रहने दो।'

महज 26 वर्ष की उम्र में खान ने बतौर विधायक संसदीय राजनीति की शुरुआत साल 1977 से की। बाद में कांग्रेस में शामिल हुए और 1980 में कानपुर और 1984 में बहराइच से सांसद चुने गए। इसी दौरान शाहबानो केस में सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलटने से नाराज खान ने कांग्रेस और राजीव मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। वर्ष 1989 में जनता दल से तो वर्ष 1998 में बसपा से सांसद बने। वर्ष 2004 में भाजपा में शामिल हुए मगर कैसरगंज से लोकसभा चुनाव हारने केबाद वर्ष 2007 में भाजपा छोड़ी।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रह चुके हैं भगत सिंह कोश्यारी 

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भगत सिंह कोश्यारी - फोटो : Self

भगत सिंह कोश्यारी उत्तराखंड के एक बड़े नेता हैं। वह आरएसएस के स्वंयसेवक हैं और आपातकाल के दौरान जेल जा चुके हैं। उत्तर प्रदेश से अलग होकर जब उत्तराखंड बना तो उन्हें उसका पहला प्रदेशाध्यक्ष बनाया गया। 2001 से 2002 तक वह राज्य के मुख्यमंत्री रहे। इसके बाद 2002 से 2007 के बीच उन्होंने विपक्ष के नेता कि जिम्मेदारी निभाई। उन्होंने अंग्रेजी साहित्य से स्नातकोत्तर की पढ़ाई की है। वह पेशे से शिक्षक और पत्रकार भी रहे हैं। 2008 से 2014 के बीच वह राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। 

लंबी सियासी पारी के बाद कलराज बने राज्यपाल

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kalraj mishra - फोटो : अमर उजाला

कलराज मिश्र कुछ समय पहले ही हिमाचल के राज्यपाल नियुक्त किए गए थे। राज्यपाल बनने वाले कलराज मिश्र का लंबा सियासी अनुभव रहा है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ पूर्णकालिक प्रचारक रह चुके मिश्र राज्यपाल बनने से पहले पिछले लोकसभा चुनावों के दौरान हरियाणा भाजपा के प्रभारी थे। उससे पहले वह 2010 से 2012 तक प्रदेश भाजपा के भी प्रभारी रह चुके हैं।

वहीं, केद्र व यूपी सरकार में वह कैबिनेट मंत्री भी रहे। यूपी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहने के अलावा वह तीन बार राज्यसभा सांसद और एक बार देवरिया से लोकसभा सदस्य भी रहे। लखनऊ पूर्वी विधानसभा क्षेत्र से वह विधायक भी रह चुके हैं। मिश्र भाजयुमो के पहले निर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे।

बंडारू दत्तात्रेय मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं

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bandaru dattatreya - फोटो : सोशल मीडिया

बंडारू दत्तात्रेय भारतीय जनता पार्टी की संयुक्त आंध्र प्रदेश इकाई के अध्यक्ष रह चुके हैं। वह मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में श्रम और रोजगार मंत्री थे। उन्हें सिकंदराबाद लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से 10 वीं, 12 वीं, 13 वीं लोकसभा (1 991-2004) और अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के केंद्रीय मंत्री के लिए संसद के सदस्य के रूप में निर्वाचित किया गया था। उनका जन्म 26 फरवरी, 1947 को हैदराबाद, आंध्र प्रदेश, भारत में हुआ था और आमतौर पर दत्तन्ना कहा जाता था। वह 1965 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) में शामिल हो गए थे। उन्होंने 1968 से 1989 तक आरएसएस प्रचारक के रूप में काम किया। वह लोक संघ समिति (जयप्रकाश नारायण आंदोलन) के संयुक्त सचिव थे। आपातकाल के दौरान उन्हें जेल भेजा गया था। वह 1980 में बीजेपी में शामिल हो गए।

हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल के तौर पर नियुक्ति होने पर बंडारू दत्तात्रेय ने कहा, 'मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ गृह मंत्री अमित शाह का भी शुक्रगुजार हूं। उन्होंने मुझे हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल के तौर पर यह जिम्मेदारी दी है और मैं संविधान के अनुसार काम करूंगा।'

तमिलनाडु भाजपा की अध्यक्ष तमिलसाईं सुंदरराजन

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तमिलसाई सुंदरराजन

तमिलसाईं सुंदरराजन पेशे से डॉक्टर हैं। वह वर्तमान में तमिलनाडु भाजपा की प्रदेशाध्यक्ष हैं। वह 2013 में भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय सचिव भी रह चुकी हैं। उनके पिता कुमारी आनंदन पूर्व सांसद और तमिलनाडु कांग्रेस के नेता रहे हैं। उनके पति सुंदरराजन भी पेशे से डॉक्टर हैं और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के सदस्य हैं। वह दो बार विधानसभा और लोकसभा का चुनाव लड़ चुकी हैं लेकिन उन्हें किसी में भी सफलता नहीं मिली। इसके अलावा वह मी टू अभियान की समर्थक रही हैं उन्होंने कहा था कि इससे पीड़ित महिला को न्याय मिलना चाहिए।

उनका नाम सुर्खियों में तब आया था जब एक ऑटो ड्राइवर ने तेल की बढ़ती कीमतों पर सवाल पूछा था। जिसके बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर उसकी पिटाई कर दी थी। यह घटना पिछले साल सितंबर के मध्य में घटित हुई थी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था। वीडियो में खाकी पहने हुए एक वृद्ध ड्राइवर ने सुंदरराजन से पूछा था कि एक मिनट अम्मा, केंद्र तेल की कीमतें बढ़ा रहा है।' इसके बाद भाजपा नेता उसे कोहनी मारने और धक्का देकर पीछे करने लगे।

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