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Hindi News ›   India News ›   KabTakNirbhaya : laws has been changed yet criminals has escaped pinishment

#KabTakNirbhaya जांच के तरीके और कानून बदले, फिर भी दरिंदों को सजा नहीं

Sun, 01 Dec 2019 02:17 AM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Sun, 01 Dec 2019 02:17 AM IST
सार

  • पुलिस को 46 हजार मामलों की जांच करनी थी
  • अदालतों को 1.46 लाख केस में सुनवाई करनी थी
  • लेकिन केवल 5822 दरिंदों को ही दे पाए सजा

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KabTakNirbhaya : laws has been changed yet criminals has escaped pinishment
हैदराबाद में मुंह पर काली पट्टी बांध महिलाओं ने जताया विरोध - फोटो : एएनआई

विस्तार

‘वह जानवरों का इलाज करती थी, लेकिन बीमार हमारा समाज और व्यवस्था थी।’ हैदराबाद में अपहरण और दुष्कर्म के बाद जला कर मार दी गई बिटिया ने दिसंबर 2012 के निर्भया कांड की याद दिला दी। इस जघन्य कांड से पूरा देश उबल पड़ा था। लोगों के गुस्से और भावनाओं को देखते हुए दुष्कर्म और यौन शोषण से जुड़े कानून को सख्त बनाने के लिए सुझाव देने को पूर्व जस्टिस जेएस वर्मा की अध्यक्षता में समिति का गठन किया गया। उनकी सिफारिश पर कानून में अहम बदलाव किए गए, जांच के तरीके बदले, मामलों के जल्द निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक अदालतें बनीं लेकिन दरिंदों को ऐसी सजा दिलाने में नाकाम रहे जिससे दूसरों में खौफ पैदा हो सके। 

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ऐसे में पूर्व जस्टिस वर्मा का वह बयान याद आता है जिसमें उन्होंने कहा था कि दुष्कर्म के अपराध को रोकने के लिए मौजूदा कानूनों को कड़ाई से लागू करने और सरकारी तंत्र को संवेदनशील होने की जरूरत है। दुष्कर्म के मामलों का एक खौफनाक सच यह भी है कि ज्यादातर मामलों में आरोपी रिश्तेदार या परिचित ही होते हैं जो समाज के तौर पर हमारी सबसे बड़ी नाकामी है। इसकी पुष्टि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट भी करती है, जिसके मुताबिक, 2017 में दर्ज दुष्कर्म के कुल मामलों में 93 फीसदी आरोपी परिचित ही थे। इतना ही नहीं, देश में दुष्कर्म के मामलों में जहां मध्य प्रदेश अव्वल है, वहीं सामूहिक दुष्कर्म के बाद पीड़िता की हत्या में उत्तर प्रदेश शीर्ष पर है। 

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अपराधियों में नहीं है भय... 2017 के आंकड़ों से समझिए

पुलिस : जिसने पुराने केस बाकी थे उसके दोगुने अगले साल के लिए टाले

जिम्मेदारी- पुलिस को साल 2017 में 56,965 मामलों की जांच करनी थी। इनमें 14.406 केस पहले से लंबित थे। 32,559 नए केस दर्ज हुए थे। 

यह किया- 4364 केस बंद। 28,750 में चार्जशीट (7447 पुराने)। बाकी 13,765 केल अगले साल के लिए लंबित छोड़ दिए।

रवैया- दुष्कर्म के बाद हत्या वाले मामलों में भी 2016 के 108 मामले लंबित थे। 2017 में 223 नए मामले दर्ज हुए। जांच के बाद 11 केस बंद। 211 में चार्जशीट। 109 लंबित रह गए। 

क्योंकि- 43,197 आरोपी गिरफ्तार हुए, पर चार्जशीट 38,534 के खिलाफ ही। इनमें 6957 दोषी करार दिए गए। वहीं, दुष्कर्म-हत्या के मामलों में 374 गिरफ्तार हुए, लेकिन 48 ही दोषी साबित हो पाए। 

अदालत : करीब डेढ़ लाख मामले थे, सुनवाई केवल 18 हजार की हुई

जिम्मेदारी- निचली अदालतों के सामने साल 2016 में 1,46,202 मामले थे। इनमें 1,17,451 पुराने थे। 

काम- ट्रायल कोर्ट में सिर्फ 18,099 मामलो में ही सुनवाई हो पाई। 5,822 (32.2 फीसदी) मामलों में दोष सिद्ध। 11,453 मामलों मे आरोपी रिहा हुए और 1,27,868 (87.5 फीसदी) अगले साल के लिए लंबित छोड़े। 

रवैया- दुष्कर्म व हत्या जैसे जघन्यतम मामलों में और भी न्यायिक धीमापन दिखा। पुराने 363 और 2017 में आए 211 मामलों को मिलाकर कोर्ट के सामने 574 मामले थे। इनमें से महज 57 का ही ट्रायल पूरा हो सका। 33 में सजा हुई, 24 बरी हो गए। 517 केस अगले साल के लिए छोड़ दिए गए।
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