{"_id":"5fccab1570484332fb01b0b1","slug":"justin-trudeau-supporting-indian-farmers-peotest-on-other-hand-raise-concerns-over-msp-and-other-agriculture-policies","type":"story","status":"publish","title_hn":"जस्टिन ट्रूडो का दोहरा रवैया, भारतीय किसानों का कर रहे समर्थन, एमएसपी का किया था विरोध","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
जस्टिन ट्रूडो का दोहरा रवैया, भारतीय किसानों का कर रहे समर्थन, एमएसपी का किया था विरोध
Sun, 06 Dec 2020 03:36 PM IST
Sneha Baluni
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Sneha Baluni
Updated Sun, 06 Dec 2020 03:36 PM IST
विज्ञापन
कनाड के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो (फाइल फोटो)
- फोटो : Facebook
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो भारत में विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों के समर्थन में दो बार बयान दे चुके हैं। उनकी इस टिप्पणी को लेकर भारत ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में कड़ा एतराज जताया है और उन्हें अपने आंतरिक मामले में हस्तक्षेप न करने की सलाह दी है। हालांकि भारतीय किसानों का समर्थन करने वाले ट्रूडो ने खुद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का विरोध किया था। यह उनका दोहरा रवैया दिखाता है।
विज्ञापन
सूत्रों ने बताया कि कनाडा भारत के एमएसपी और डब्ल्यूटीओ में अन्य कृषि नीतियों के मुखर आलोचकों में से एक रहा है। इसके अलावा वे अक्सर भारत के उन घरेलू कृषि उपायों पर सवाल उठाते रहे हैं जो देश की एक बड़ी कृषि आबादी को खाद्य और आजीविका सुरक्षा प्रदान करने के लिए बनाई गई हैं।
विज्ञापन
एक सूत्र ने कहा, 'कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो द्वारा भारत में चल रहे किसानों के आंदोलन को लेकर की गई हालिया टिप्पणी अनुचित और गलत है। कनाडा ने डब्ल्यूटीओ में भारत की कृषि सहयोगी नीतियों के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया था।' भारत सहित अन्य विकासशील देश मौजूदा विकृतियों को दूर करके विश्व व्यापार संगठन के कृषि समझौते (एओए) में सुधार के प्रस्तावक रहे हैं।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें- किसान आंदोलन: पवार बोले-सरकार ने नहीं सुनी हमारी बात, जल्दबाजी के कारण पैदा हुई समस्या
मुख्य मांगों में से एक एफबीटी-एएमएस सब्सिडी को समाप्त करना है। यह डब्ल्यूटीओ के 164 सदस्यों में से केवल 32 के लिए उपलब्ध हैं। हालांकि एफबीटी-एएमएस के पात्र लाभार्थियों के विरोध के कारण डब्ल्यूटीओ सदस्य एओए में मौजूदा असंतुलन को खत्म करने पर आम सहमति तक पहुंचने में विफल रहे हैं।
सूत्र ने कहा कि हाल के वर्षों में कुछ डब्ल्यूटीओ सदस्यों (केर्न्स समूह जिसमें कनाडा, अमेरिका और यूरोपीय यूनियन शामिल है) ने चीन, भारत और इंडोनेशिया जैसे बड़े विकासशील देशों में कृषि में घरेलू समर्थन को विकृत करने वाले वैश्विक स्तर में वृद्धि के लिए दोष देने की कोशिश की है।
सूत्रों ने कहा कि भारत द्वारा हाल ही में किए गए कृषि संशोधन कनाडा और अन्य सदस्यों द्वारा भारत की कृषि नीतियों को लेकर जताई गई चिंताओं को दूर करने का काम करेंगे। ऐसे में यह देखना आश्चर्य की बात है कि कनाडा इन कृषि संशोधनों के खिलाफ भारत में हो रहे घरेलू विरोध प्रदर्शनों का समर्थन कर रहा है।