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Justice UU Lalit: जस्टिस ललित बार से सीधे सुप्रीम कोर्ट की पीठ में पदोन्नत होने वाले दूसरे सीजेआई

Wed, 10 Aug 2022 10:20 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Wed, 10 Aug 2022 10:20 PM IST
सार

वह मुसलमानों में तीन तलाक की प्रथा को अवैध ठहराने समेत कई ऐतिहासिक फैसलों का हिस्सा रहे हैं। पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने अगस्त 2017 में 3:2 के बहुमत से तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित कर दिया था।

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Justice UU Lalit is the second CJI to be directly elevated from the bar to the Supreme Court bench.
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

जस्टिस उदय उमेश ललित देश के नए चीफ जस्टिस होंगे। वह देश के दूसरे ऐसे चीफ जस्टिस होंगे जो बार से सीधे सुप्रीम कोर्ट की पीठ में पदोन्नत हुए थे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा नियुक्ति वारंट पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद जस्टिस ललित को बुधवार को भारत के 49वें प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) के रूप में नियुक्त किया गया। उनसे पहले जस्टिस एस. एम. सीकरी मार्च 1964 में शीर्ष अदालत की पीठ में सीधे पदोन्नत होने वाले पहले वकील थे। वह जनवरी 1971 में 13वें सीजेआई बने थे।

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27 अगस्त को कार्यभार संभालेंगे जस्टिस ललित 
जस्टिस ललित मौजूदा प्रधान न्यायाधीश जस्टिस एन. वी. रमण के सेवानिवृत्त होने के एक दिन बाद 27 अगस्त को कार्यभार संभालेंगे। जस्टिस ललित का सीजेआई के रूप में तीन महीने से भी कम का संक्षिप्त कार्यकाल होगा और वह इस साल आठ नवंबर को सेवानिवृत्त होंगे। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष है। जस्टिस ललित को 13 अगस्त 2014 को उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। तब वह वरिष्ठ अधिवक्ता थे।
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वह मुसलमानों में तीन तलाक की प्रथा को अवैध ठहराने समेत कई ऐतिहासिक फैसलों का हिस्सा रहे हैं। पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने अगस्त 2017 में 3:2 के बहुमत से तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित कर दिया था। उन तीन न्यायाधीशों में जस्टिस ललित भी थे। जनवरी 2019 में उन्होंने अयोध्या में राजनीतिक रूप से संवेदनशील राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। इस मामले में एक मुस्लिम पक्षकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने संविधान पीठ को बताया था कि जस्टिस ललित उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के वकील के रूप में एक संबंधित मामले में वर्ष 1997 में पेश हुए थे। हाल ही में, जस्टिस ललित की अध्यक्षता वाली एक पीठ मामलों की सुनवाई के लिए शीर्ष अदालत के सामान्य समय से एक घंटे पहले सुबह 9.30 बजे बैठी थी।
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जजों को सुबह नौ बजे अदालत आने की वकालत 
जस्टिस ललित ने कहा था, मेरे विचार से आदर्श रूप से हमें सुबह नौ बजे बैठना चाहिए। मैंने हमेशा कहा है कि अगर हमारे बच्चे सुबह सात बजे स्कूल जा सकते हैं, तो हम नौ बजे क्यों नहीं आ सकते। उनकी अध्यक्षता वाली पीठ ने यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) कानून के तहत एक मामले में बंबई उच्च न्यायालय के ‘त्वचा से त्वचा के संपर्क’ संबंधी विवादित फैसले को खारिज कर दिया था। शीर्ष अदालत ने कहा था कि यौन हमले का सबसे महत्वपूर्ण घटक यौन मंशा है, बच्चों की त्वचा से त्वचा का संपर्क नहीं।


नौ नवंबर, 1957 को जन्मे जस्टिस ललित ने जून 1983 में वकील बने और दिसंबर 1985 तक बंबई उच्च न्यायालय में वकालत की थी। वह जनवरी 1986 में दिल्ली आकर वकालत करने लगे और अप्रैल 2004 में, उन्हें शीर्ष अदालत द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता नामित किया गया। 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में सुनवाई के लिए उन्हें सीबीआई का विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया गया था।

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