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जस्टिस नरीमन ने कहा: महिला चीफ जस्टिस अब दूर नहीं
Sat, 17 Apr 2021 05:30 AM IST
Amit Mandal
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: Amit Mandal
Updated Sat, 17 Apr 2021 05:30 AM IST
सार
- जस्टिस नरीमन ने कहा कि भारत में महिला राष्ट्रपति हो चुकी है। महिला प्रधानमंत्री हो चुकी है लेकिन महिला चीफ जस्टिस नहीं हुई है।
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supreme court
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस आर एफ नरीमन ने शुक्रवार को कहा कि हमारे देश में महिला राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री हो चुकी हैं लेकिन यह दुखद है कि अब तक कोई महिला मुख्य न्यायाधीश नहीं हुई। जस्टिस नारीमन ने कहा कि महिला मुख्य न्यायाधीश बनने में अब देरी नहीं है।
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26वें जस्टिस सुनंदा भंडारे मेमोरियल लेक्चर के तहत इतिहास की महान महिलाएं विषय पर आयोजित व्याख्यान पर जस्टिस नरीमन ने कहा कि भारत में महिला राष्ट्रपति हो चुकी है। महिला प्रधानमंत्री हो चुकी है लेकिन महिला चीफ जस्टिस नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि बात जो भी हो लेकिन हमें उम्मीद है कि भारत को पहली मुख्य न्यायाधीश मिलने में अधिक तेरी नहीं है।
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जस्टिस नरीमन की ये टिप्पणी इस मायने में महत्वपूर्ण है कि बृहस्पतिवार को ही एक मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस एस ए बोबडे ने भी कहा था कि अब महिला मुख्य न्यायाधीश बनाने का समय आ गया है। जस्टिस नारीमन ने कहा है कि बाइबिल के अनुसार, महिलाओं को पुरुष की पसली से बनाया गया है और ऋग्वेद कहता है कि महिलाओं के साथ स्थायी दोस्ती की उम्मीद मत करो क्योंकि वे हाइना की तरह है।
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उन्होंने कहा कि प्राचीन फारसी ग्रंथों में भी महिलाओं को नकारात्मक रूप से चित्रित किया गया है, मासिक धर्म से जुड़ी वर्जना के साथ। जस्टिस नारीमन ने कहा कि इतिहास में हमेशा एक धारणा थी कि महिलाएं, पुरुषों की तुलना में निचले पायदान पर है। उन्होंने कहा कि स्त्री जाति से द्वेष करने वाली परंपराएं युगों से चली आ रही है।
अपने संबोधन में जस्टिस नरीमन ने इतिहास में पांच उल्लेखनीय महिलाओं की भूमिका को भी विस्तार से बताया। उन्होंने प्राचीन मिस्र की क्लियोपेट्रा, इंग्लैंड की पोप जोन व एलिजाबेथ प्रथम, रूस की कैथरीन द ग्रेट और रजिया सुल्तान की भूमिका का उल्लेख किया।
इस अवसर पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस मदन बी लोकुर ने कहा कि जस्टिस नरीमन पश्चिमी शास्त्रीय संगीत में पारंगत हैं। उन्होंने एक बार मुझसे कहा था कि अगर वह वकील नहीं होते, तो जुबिन मेहता की तरह संगीत के कंडक्टर होते।