{"_id":"591ea6744f1c1b9c0cf24aef","slug":"justice-cs-karnan-approaches-president-for-suspension-of-supreme-court-order","type":"story","status":"publish","title_hn":"राष्ट्रपति के पास पहुंचे जस्टिस कर्णन, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर रोक की मांग","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
राष्ट्रपति के पास पहुंचे जस्टिस कर्णन, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर रोक की मांग
amarujala.com- Presented by: पवन नाहर
Updated Fri, 19 May 2017 01:56 PM IST
विज्ञापन
जस्टिस सीएस कर्णन
सुप्रीम कोर्ट द्वारा 6 महीने की सजा सुनाए जाने के बाद पश्चिम बंगाल हाईकोर्ट के जस्टिस कर्णन राष्ट्रपति के पहुंचे हैं। उन्होंने महामहिम से उच्चतम न्यायालय के फैसले पर रोक लगाने की मांग की है। जस्टिस सीएस कर्णन की ओर से वकीलों का एक दल राष्ट्रपति के पास पहुंचा और अपनी मांग उनके सामने रखी। हालांकि, राष्ट्रपति ऑफिस को इस बारे में कोई जानकारी नहीं।
राष्ट्रपति ऑफिस ने कहा, "अभी इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।" वकीलों ने गुरुवार को कहा कि संविधान के आर्टिकल 72 के तहत राष्ट्रपति के पास ई-मेल के जरिए इस फैसले पर रोक लगाने की मांग की गई है। जस्टिस कर्णन को 6 महीने के सजा मुख्य न्यायाधीर जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली 7 जजों की बेंच ने सुनाई थी। इस आर्टिकल के अनुसार राष्ट्रपति के पास इस तरह के विशेषाधिकार मौजूद हैं।
जस्टिस कर्णन की ओर से मैथ्यू जे नेदुंपारा और एसी फिलिप ने यह कदम उठाया है। 9 मई को इस फैसले के बाद उन्होंने उच्चतम न्यायालय में इस फैसले के खिलाफ याचिका भी दायर की थी और मांग की थी कि इसपर जल्द सुनवाई हो। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने यह मांग ठुकरा दी थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
राष्ट्रपति ऑफिस ने कहा, "अभी इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।" वकीलों ने गुरुवार को कहा कि संविधान के आर्टिकल 72 के तहत राष्ट्रपति के पास ई-मेल के जरिए इस फैसले पर रोक लगाने की मांग की गई है। जस्टिस कर्णन को 6 महीने के सजा मुख्य न्यायाधीर जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली 7 जजों की बेंच ने सुनाई थी। इस आर्टिकल के अनुसार राष्ट्रपति के पास इस तरह के विशेषाधिकार मौजूद हैं।
विज्ञापन
जस्टिस कर्णन की ओर से मैथ्यू जे नेदुंपारा और एसी फिलिप ने यह कदम उठाया है। 9 मई को इस फैसले के बाद उन्होंने उच्चतम न्यायालय में इस फैसले के खिलाफ याचिका भी दायर की थी और मांग की थी कि इसपर जल्द सुनवाई हो। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने यह मांग ठुकरा दी थी।
विज्ञापन