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एससी-एसटी एक्ट पर फैसला सुनाने वाले जज हुए रिटायर, बताया- क्या चल रहा था दिमाग में उस वक्त

Sat, 07 Jul 2018 12:50 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 07 Jul 2018 12:50 PM IST
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Justice a k goel retired from supreme court told what was going on his brain at that time
जस्टिस आदर्श कुमार गोयल
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज जस्टिस आदर्श कुमार गोयल शुक्रवार को सेवानिवृत हो गए। ये वहीं जज हैं जिन्होंने तीन तलाक और एससी-एसटी एक्ट के दुरुपयोग संबंधी मामलों पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित विदाई समारोह में बोलते हुए उन्होंने बताया कि एससी-एसटी एक्ट पर फैसला सुनाते वक्त उनके दिमाग में क्या चल रहा था। उन्होंने बताया कि फैसला सुनाते वक्त उनके दिमाग में आपातकाल वाले हालात चल रहे थे और उस समय जिस तरह से नागरिकों के अधिकारों का हनन किया गया था, उसी को ध्यान में रखकर उन्होंने फैसला सुनाया ताकि इस फैसले से किसी का शोषण न हो।
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उन्होंने आपातकाल के हालातों के बारे में बताते हुए कहा ‘जब देश में आपातकाल लगा था तब मैं सिर्फ एक वकील था और मुझे वकालत करते महज दो साल ही हुए थे। लेकिन मेरा अनुभव यह था कि न्यायालय उस माहौल में भी बहुत ही न्याय-उन्मुख थे और यदि आप कोर्ट में (दिखा सकते थे) दिखाते थे कि यह आपातकाल के कारण है कि एक निर्दोष व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाता है तो अदालत उसे तत्काल राहत प्रदान करती थी। आमतौर पर ऐसे हालातों में राहत प्रदान नहीं की जाती है।
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उन्होंने कहा कि आम तौर पर हम जब किसी मामले पर निर्णय लिख रहे होते हैं, तो उस मामले पर कुछ भी नहीं कहते हैं। लेकिन अब मैं स्वतंत्र हूं। अब मैं कुछ भी बोल सकता हूं। उन्होंने कहा कि एक अमेरिकी गैर सरकारी संगठन द्वारा संकलित 'कानून सूचकांक के नियम' में भारत को 62वां स्थान दिया गया है। मेरा सपना है कि हम नंबर वन बनें।
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बता दें कि जस्टिस ए. के. गोयल सुप्रीम कोर्ट में हरियाणा के पहले जज के रूप में नियुक्त हुए थे। उन्होंने तीन तलाक व एससी-एसटी एक्ट के दुरुपयोग समेत ओडिशा स्थित पुरी जगन्नाथ मंदिर को लेकर ऐतिहासिक फैसला और क्राइम सीन की वीडियोग्राफी कराने संबंधी महत्वपूर्ण फैसले दिए थे। सुप्रीम कोर्ट में वो 4 साल तक जज के तौर पर रहे। सेवानिवृति के बाद उन्हें अब एनजीटी का चेयरपर्सन नियुक्त किया गया है।   
 
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