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पद्म भूषण से सम्मानित पूर्व पुलिस अधिकारी ने अनुच्छेद 370 के फैसले की नैतिकता पर उठाए सवाल
Sun, 25 Aug 2019 01:41 PM IST
Trainee Trainee
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: Trainee Trainee
Updated Sun, 25 Aug 2019 01:41 PM IST
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जूलियो रिबेरो (फाइल फोटो)
- फोटो : Social Media
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पंजाब पुलिस प्रमुख के रूप में उग्रवाद से निपटने में अहम भूमिका निभाने वाले एवं पद्म भूषण से सम्मानित पूर्व पुलिस अधिकारी जूलियो रिबेरो ने अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले को एक पुलिसकर्मी के नजरिए से तो पूरे अंक दिए लेकिन नैतिकता के दृष्टिकोण से इस पर सवाल उठाए और कहा कि ऐसे मामलों में लोगों की इच्छा ही सबसे महत्वपूर्ण होती है।
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साथ ही उन्होंने कहा कि नैतिकता के दृष्टिकोण से वह ऐसा फैसला कभी नहीं लेते जैसा केंद्र सरकार ने लिया है। 1980 के दशक में पुलिस प्रमुख के रूप में पंजाब में उग्रवाद से सख्ती से निपटने के लिए जाने जाने वाले रिबेरो ने कहा कि एक पुलिसकर्मी के तौर पर यदि आपको यह सुनिश्चित करना है कि कोई दिक्कत पैदा न हो, तो यह बहुत चतुराई से किया गया। पुलिस के नजरिए से, मैं इसे पूरे नंबर दूंगा, लेकिन नैतिकता के आधार से मैं ऐसा नहीं करूंगा। लोगों को शामिल किया जाना चाहिए।
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पूर्व पुलिस आयुक्त ने कहा कि लोगों को अपने विश्वास में लेना सबसे महत्वपूर्ण बात है और उसे (सरकार को) ऐसा करना ही होगा, अन्यथा आपको समस्या होगी। लोगों को अपने पक्ष में करना ही मामले का मूल आधार है।
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रिबेरो ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उनसे जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल बनने का अनुरोध किया था और जब उन्होंने यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया तो उन्होंने फारूक अब्दुल्ला को उन्हें राजी करने की जिम्मेदारी सौंपी।
वाजपेयी को यह पता चला था कि वह लोगों को विश्वास में लेकर किस प्रकार पंजाब में उग्रवाद से निपटे और वह कश्मीर में भी ऐसा ही करना चाहते थे।
रिबेरो ने कहा कि मैंने कहा कि राज्यपाल के तौर पर मैं ऐसा नहीं कर सकता। मैं पुलिस महानिदेशक या राज्यपाल के सलाहकार के तौर पर ऐसा कर सकता हूं, लेकिन राज्यपाल के तौर पर मैं ऐसा नहीं कर सकता।