जवाहर बाग हिंसा की न्यायिक जांच शुरू, टीम ने लिया जायजा
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न्यायिक आयोग ने जवाहर बाग हिंसा की जांच शुरू कर दी है। आयोग के अध्यक्ष एवं हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश मिर्जा इम्तियाज मुर्तजा शनिवार को मथुरा पहुंचे और जवाहर बाग का जायजा लिया और मामले से जुड़े सभी साक्ष्य प्रशासन से तलब किए। इस दौरान मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि आयोग निर्धारित समय में जांच पूरी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप देगा।
न्यायिक आयोग के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त न्यायाधीश मिर्जा इम्तियाज मुर्तजा ने शनिवार को पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस और जवाहर बाग में मीडिया से बातचीत की। उन्होंने बताया कि निर्धारित समय छह अगस्त से पहले ही जांच रिपोर्ट सौंप दी जाएगी।
फिलहाल आम लोगों और संस्थाओं से जवाहर बाग प्रकरण के संदर्भ में शपथ पत्र मांगे जा रहे हैं। कोई भी व्यक्ति इससे जुड़ी जानकारी देना चाहे तो दे सकता है। वीडियो आदि साक्ष्य उपलब्ध करा सकता है। यह प्रक्रिया 21 जुलाई तक चलेगी। इसके बाद साक्ष्यों पर जांच का काम होगा।
उन्होंने बताया कि जांच के लिए मुख्य तौर पर छह बिंदु निर्धारित किए गए हैं। इसमें घटना के कारण, खुफिया तंत्र की रिपोर्ट, जनपदीय पुलिस की कार्ययोजना, पर्यवेक्षण, घटना को रोकने के लिए किए गए प्रबंध और किसी के प्रभाव को प्रमुख रूप से शामिल किया गया है। सीबीआई के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि सीबीआई सिर्फ जांच एजेंसी है, निर्णय कोर्ट से ही होता है। न्यायिक आयोग निष्पक्ष जांच करेगा।
शनिवार दोपहर करीब तीन बजे वे दिल्ली से मथुरा पहुंचे और यहां उन्हें डीएम, एसएसपी और अन्य अधिकारियों ने पूरी घटना की जानकारी दी। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से 15 मार्च, 2014 से दो जून, 2016 तक अपनाई गई संपूर्ण कार्रवाई के साक्ष्य, एफआईआर, केस डायरी, हाईकोर्ट के आदेश, अवमानना मामले, जनरल डायरी आदि को मांगा है।
इसके बाद न्यायिक आयोग के अध्यक्ष ने जवाहर बाग का दौरा किया। यहां उन्होंने सबसे पहले जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय के बारे में पूछा। इसके बाद उन्होंने हिंसा के दौरान हुई आगजनी से जले पेड़ों, जली हुई गाड़ियों, जगह-जगह मौजूद राख के ढेरों को भी देखा। उन्हें वह स्थान भी दिखाया गया, जहां से हिंसा की शुरूआत हुई थी। इस दौरान उनके साथ न्यायिक आयोग के सचिव सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश प्रमोद कुमार गोयल भी रहे।
न्यायिक आयोग ने देखा जवाहर बाग का कोना-कोना
सर! यह जवाहर बाग का मुख्य गेट है जहां हर वक्त रामवृक्ष के लठैत रहा करते थे। पेड़ के नीचे वह चक्की है, जहां गेहूं पीसा जाता था। नलकूप की कोठरी को रसोई बना लिया गया था। वो वहां तंबुओं का पूरा शहर बसा हुआ था।
डीएम और एसएसपी ने न्यायिक आयोग के अध्यक्ष मिर्जा इम्तियाज मुर्तजा और सचिव प्रमोद कुमार गोयल को जवाहर बाग का एक-एक कोना दिखाया। न्यायिक आयोग के अध्यक्ष और सचिव सवा पांच बजे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ जवाहर बाग देखने पहुंचे।
मुख्य गेट से उन्होंने प्रवेश किया। यहां डीएम निखिल चंद्र शुक्ला और एसएसपी बबलू कुमार के साथ चल रहे आपरेशन जवाहर बाग में शामिल रहने वाले अधिकारियों ने उन्हें बताया कि सर! देखिए यहां पर हर वक्त रामवृक्ष के लठैत रहते थे। समय-समय पर ड्यूटी बदलती रहती थी। कभी महिलाओं को तैनात कर दिया जाता था तो कभी पुरुषों को। यहां से थोड़ा सा आगे जाने पर रामवृक्ष की जली हुई गाड़ियां खड़ी थीं।
एसएसपी ने बताया कि आगजनी में यह गाड़ियां जल गई थीं। थोड़ा सा आगे चलने पर रामवृक्ष की रसोई थी, जहां हजारों लोगों का खाना तैयार होता था। जले हुए पेड़ देखकर न्यायिक आयोग के अध्यक्ष बोले, वाकई बड़ा नुकसान हो गया है।
उद्यान विभाग के अधिकारी को बुलाकर कहा कि इस बाग को दोबारा से तैयार कीजिए। जगह-जगह अशोक के पेड़ लगाइए। फलदार पौधे लगाइए। डीएम से भी कहा कि इस बाग की सुरक्षा को लेकर पूरा प्लान तैयार किया जाए। यह तो पर्यावरण के लिहाज से बहुत बड़ी धरोहर है।
आयोग के अध्यक्ष ने वह प्वाइंट भी देखा जहां से दीवार तोड़कर बाग में घुसने का रास्ता बनाया गया था। घटना के दौरान मौजूद रहे एसपी ग्रामीण अजय कुमार और सिटी मजिस्ट्रेट राम अरज यादव ने दो जून का वाक्या बताते हुए कहा कि यहां दीवार टूटने के साथ ही भीड़ ने एसपी सिटी पर हमला बोल दिया था। जिस स्थान पर तंबुओं का शहर बसा हुआ था, आयोग के अध्यक्ष वहां भी पहुंचे। उन्होंने अफसरों के साथ करीब 20 मिनट तक जवाहर बाग का निरीक्षण किया।
इस दौरान एडीएम वित्त रवीन्द्र कुमार, एसडीएम प्रशासन अजय कुमार अवस्थी, एसपी ट्रैफिक आशुतोष द्विवेदी, एमवीडीए सचिव विजय कुमार, एसडीएम सदर राजेश कुमार, जिला उद्यान अधिकारी, सीओ चक्रपाणि त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।