फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Journey of Kohinoor diamond in History, India could not get this again

कोहिनूरः शापित हीरा या दुनिया का सबसे बेशकीमती पत्थर, क्या है हकीकत?

Mon, 18 Apr 2016 06:49 PM IST
Updated Mon, 18 Apr 2016 06:49 PM IST
विज्ञापन
Journey of Kohinoor diamond in History, India could not get this again
कोहिनूर हीरा - फोटो : Getty

सुप्रीम कोर्ट ने जब कोहिनूर हीरे के मसले पर केंद्र सरकार से राय मांगी तो उन्होंने अजीब बयान दिया। सरकार ने कोर्ट को बताया कि कोहिनूर हीरा चोरी नहीं हुआ था, बल्कि पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह ने अंग्रेजों को तोहफे में दिया था। जबकि भारत के लोगों को अब तक यही पता था कि कोहिनूर को अंग्रेजों ने चुरा लिया था। आइए जानते हैं आखिर क्या है कोहिनूर हीरे का प्रच‌लित इतिहास और क्यों खास है वो हीरा?

विज्ञापन


कोहिनूर हीरे को लेकर इतिहास में कई प्रच‌लित मान्यताएं हैं। ऐसा माना जाता है कि दुन‌ियाभर में मशहूर कोह‌िनूर वर्तमान आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में स्थित गोलकुंडा की खदान से प्राप्त हुआ था। इसी खान से दरया-ए-नूर और नूर-उन-ऐन नाम का हीरा भी प्राप्त हुआ था, लेकिन जितनी प्रसिद्धि कोहिनूर को मिली उतनी किसी को नहीं मिली। हालांकि जैसे-जैसे समय बीता यह हीरा शापित माना जाने लगा। कोहिनूर हीरा सबसे पहले किसके पास पहुंचा इसका उल्लेख नहीं मिलता है। बाबरनामा में इसका पहली बार जिक्र आया है कि यह 1294 के आस-पास यह ग्वालियर के किसी राजा के पास था। लेकिन इस हीरे को पहचान उस समय मिली जब 1306 में एक शख्स ने यह लिखा कि जो इंसान इसे पहनेगा वह संसार पर राज करेगा लेकिन इसके साथ ही उसका बुरा समय भी शुरू हो जाएगा।
विज्ञापन


शुरू में इस बात को किसी ने स्वीकार नहीं किया लेकिन जब एक के बाद एक घटनाएं होने लगी तब सभी ने इस सच को स्वीकार करना शुरू किया। कोह‌िनूर 1849 में स‌िख साम्राज्य के पतन के बाद ब्र‌िट‌िश ईस्ट इंड‌िया कंपनी के हाथ लगा और 1850 में ब्र‌िटेन की महारानी व‌िक्टोर‌िया के पास पहुंचा। लेक‌िन कोह‌‌िनूर हीरे को लेकर कई तरह की अफवाहें है और इन अफवाहों के कारण इसे मनहूस हीरा भी कहा जाता है। कहते हैं क‌ि यह हीरा ज‌िसके पास पहुंचा उसे तबाह कर द‌िया। इस हीरे की मनहूस‌ियत से बचने के ल‌िए ब्र‌िटेन की महारानी ने इसकी कांट-छांट भी करवायी लेक‌िन इस हीरे की मनहूस‌ियत से ब्र‌िट‌िश साम्राज्य भी नहीं बच पाया और धीरे-धीरे उसका भी पतन हो गया।

विज्ञापन
विज्ञापन

किसके-किसके पास पहुंचा कोहिनूर हीरा

Journey of Kohinoor diamond in History, India could not get this again
हीरा

बाबरनामा के अनुसार इस हीरे को पहली बार ग्वालियर के किसी राजा के पास देखा गया था। इसके बाद यह काकातीय वंश के पास आ गया। 1320 में खिलजी वंश के अंत के बाद गियासुद्दीन तुगलक ने दिल्ली की गद्दी संभाली और अपने बेटे उलुघ खान को 1323 में काकातीय वंश के राजा प्रतापरुद्र को हराने भेजा था। इस हमले को कड़ी टक्कर मिली, परन्तु उलूघ खान एक बड़ी सेना के साथ फिर लौटा और राजा को वारंगल के युद्ध में हरा दिया। तब वारंगल की लूट-पाट, तोड़-फोड़ व हत्या-काण्ड महीनों चली। सोने-चांदी व हाथी-दांत की बहुतायत मिली, जो कि हाथियों, घोड़ों व ऊंटों पर दिल्ली ले जाया गया। कोहिनूर हीरा भी उस लूट का भाग था।

यहीं से यह हीरा दिल्ली सल्तनत के उत्तराधिकारियों के हाथों में पहुंच गया। 1526 में कोहिनूर बाबर के हाथ लगा। इस हीरे के बारे में पहली पक्की जानकारी 1526 में ही मिलती है जब बाबर ने अपने बाबरनामा में लिखा है, कि यह हीरा 1214 में मालवा के एक राजा के पास था। बाबर ने इस हीरे का मूल्य कुछ इस तरह से आंका कि यह हीरा इतना किमती है कि इससे पूरे संसार के लोगों का दो दिन तक पेट भरा जा सकता है।

बाबरनामा में दिया है, कि किस प्रकार मालवा के राजा को जबरदस्ती यह विरासत अलाउद्दीन खिलजी को देने पर मजबूर किया गया। उसके बाद यह दिल्ली सल्तनत के उत्तराधिकारियों द्वारा आगे बढ़ाया गया और अन्ततः 1526 में बाबर के पास आ गया। यह हीरा जिसके पास भी पहुंचा उनका परचम शुरू में तो खूब लहराया लेकिन अंत भी बुरी तरह हुआ। शाहजहां ने कोहिनूर हीरे को अपने मयूर सिंहासन में जड़वाया परिणाम यह हुआ कि पहले उनकी पत्नी उन्हें छोड़कर दुनिया से चली गई फिर बेटे ने ही नजरबंद करके सत्ता अपने हाथ में ले लिया।

शाह ने इस हीरे का नाम 'कोह-ए-नूर' रखा था

Journey of Kohinoor diamond in History, India could not get this again
बेहद खूबसूरत है कोहिनूर - फोटो : Getty

1739 में नादिर शाह का भारत पर आक्रमण हुआ और मुगलों को पराजित करके नादिर शाह कोहिनूर अपने साथ फारस ले गया। नादिर शाह ने ही इस हीरे को 'कोह-ए-नूर' नाम दिया। इससे पहले इसे अन्य नामों से जाना जाता था। धीरे धीरे इसका नाम थोड़ा और बदला और इसे कोहिनूर के नाम से जाना जाने लगा। काहिनूर ले जाने के ठीक 8 साल बाद यानी 1747 में नादिर शाह की हत्या कर दी गई यानी कोहिनूर ने यहां भी अपनी मनहूसियत दिखाई।

नादिर शाह की मौत के बाद कोहिनूर अफ़गानिस्तान शांहशाह अहमद शाह दुर्रानी फिर उनके वंशज शाह शुजा दुर्रानी के पास आया। लेकिन कोहिनूर के अशुभ प्रभाव के कारण उसकी सत्ता चली गई और वह भागकर पंजाब पहुंचा और कोहिनूर रणजीत सिंह को सौंप दिया। इसके बाद रणजीत सिंह जी की मौत हो गई और सिख साम्राज्य पर अधिकार करके अंग्रेजों ने इस हीरे को अपने कब्जे में ले लिया इस शापित हीरे के शाप के प्रभाव से बचने के लिए इंग्लैंड की महारानी ने यह वसीयत बनाई कि इसे महिला ही धारण करेगी। लेकिन ऐसा माना जाता है कि इससे भी कोहिनूर का शाप दूर नहीं हुआ और दुनिया भर में फैले अंग्रेजों के साम्राज्य का अंत हो गया। 

प्राचीन इतिहास में भी कोहिनूर का जिक्र मिलता है। हालांकि, इस बात की प्रामाणिकता सिद्ध करना संभव नहीं है लेकिन कोहिनूर का पहला उल्‍लेख 3000 साल पहले मिला था और इसका सीधा संबंध श्री कृष्‍ण काल से बताया जाता है। पुराणों के अनुसार इस हिरे को पहले स्‍वयंतक मणि के नाम से जाना जाता था। दरअसल, यह मणि पहले सूर्य के पास थी लेकिन उन्होंने बाद में इसे कर्ण को दे दिया था। कर्ण के बाद यह मणि अर्जुन और फिर युधिष्ठिर के पास पहुंची। इस हीरे ने एक लंबा सफर तय किया और फिर सम्राट अशोक के पास पहुंचा। अशोक के बाद इसे महाराजा हर्ष और चन्‍द्रगुप्‍त ने अपनाया। उसके बाद सन् 1306 में यह मणि सबसे पहले मालवा के महाराजा रामदेव के पास देखी गई और फिर वही पुराना इतिहास एक बार फिर से अपने कालक्रम में आ गया।

तो क्या सच में दिलीप सिंह ने एलिजाबेथ को भेंट किया था कोहिनूर

Journey of Kohinoor diamond in History, India could not get this again
ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ - फोटो : Reuters

एक अन्य दावे के मुताबिक रणजीत सिंह ने खुद को पंजाब का महाराजा घोषित किया था। 1839 में अपनी मौत से पहले उन्होंने एक वसीयतनामा लिखवाया था जिसमें उन्होंने कोहिनूर हीरे का जिक्र किया था। इस वसियतनामे के मुताबिक कोहिनूर को उड़ीसा के पुरी में स्थित प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर को दान दिया जाना था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वसीयत के अंतिम शब्दों के बारे में विवाद उठा और अन्ततः वह पूरा ना हो सके। 29 मार्च 1849 को लाहौर के किले पर अंग्रेजों का कब्जा हो गया जिसके बाद पंजाब को ब्रिटिश भारत का राज्य घोषित कर दिया गया। 

इस दौरान एक महत्वपूर्ण संधि पर हस्ताक्षर हुए जिसमें, 'कोह-इ-नूर नामक रत्न, जो शाह-शूजा-उल-मुल्क से महाराजा रणजीत सिंह द्वारा लिया गया था, लाहौर के महाराजा द्वारा इंग्लैण्ड की महारानी को सौंपा जायेगा।' इस संधि के प्रभारी गवर्नर जनरल लॉर्ड डलहौजी थी जो पहले से ही कोहिनूर को पाना चाहते थे। इस संधि में उन्होंने अपनी इस इच्छा को भी शामिल कर लिया। उनकी इस इच्छा की बाद के इतिहासकारों ने आलोचना भी की है।

संधि के बाद डलहौजी ने 1851 में महाराजा रणजीत सिंह के उत्तराधिकारी दिलीप सिंह द्वारा महारानी विक्टोरिया को कोहिनूर को भेंट किये जाने के प्रबंध किया। उस वक्त दिलीप सिंह की आयु महज तेरह साल थी। इसके लिए दिलीप सिंह को इंग्लैंड की यात्रा पर भेजा गया जहां उन्होंने कोहिनूर हीरा ब्रिटेन की महारानी को भेंट कर दिया था।

भारत वापस नहीं आ सकता कोहिनूर

Journey of Kohinoor diamond in History, India could not get this again
इस मुकुट की शोभा बढ़ाता है कोहिनूर हीरा - फोटो : Reuters

फिलहाल यह हीरा इंग्लैंड की महारानी के पास ही है और भारत में इसे वापस लाने की बात हो रही है लेकिन शायद यह संभव नहीं है। हाल ही में एक आरटीआई के जवाब में इस बात का खुलासा हुआ कि कोहिनूर को भारत वापस नहीं लाया जा सकता। इसके लिए 43 साल पुराने एंटीक्स एंड आर्ट ट्रेजर एक्ट 1972 का हवाला दिया गया। इस नियम के अनुसार वे प्राचीन वस्तुएं देश में वापस नहीं लाई जा सकती हैं, जो आजादी के पहले बाहर गई थीं।

संस्कृति मंत्रालय ने एक आरटीआई के जवाब में बताया है कि 1972 के एक्ट के तहत भारतीय पुरातत्व विभाग केवल उन प्राचीन चीजों की वापसी के लिए कदम उठा सकता है, जो गैर कानूनी तरीके से देश से बाहर ले जायी गई हैं। चूंकि कोहिनूर का मामला आजादी से पहले का है, इसलिए विभाग इस संबंध में कुछ नहीं कर सकता। आरटीआई के जरिए मंत्रालय से उन वस्तुओं की भी जानकारी मांगी गई थी, जो ब्रिटेन की कस्टडी में हैं और भारत जिनको वापस पाना चाहता है। जवाब में बताया गया है कि पुरातत्व विभाग के पास ऐसे सामानों की कोई सूची नहीं है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed