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John Kiriakou: 'साल 2002 में युद्ध के मुहाने पर थे भारत और पाकिस्तान', CIA के पूर्व अधिकारी का बड़ा खुलासा
Fri, 24 Oct 2025 10:17 PM IST
हिमांशु चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Fri, 24 Oct 2025 10:17 PM IST
सार
पूर्व सीआईए अधिकारी जॉन किरियाकू ने पाकिस्तान और उसके आतंकी गठजोड़ पर कई खुलासे किए। उन्होंने कहा कि 2002 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के कगार पर थे। साथ ही उन्होंने मुंबई हमले पर भी कई बाते कही। किरियाकू ने आगे यह भी कहा कि पाकिस्तान का परमाणु नियंत्रण कभी अमेरिका के पास था।
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जॉन किरियाकू, पूर्व सीआईए अधिकारी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
विस्तार
अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के पूर्व अधिकारी जॉन किरियाकू ने पाकिस्तान और उसके आतंकी गठजोड़ को लेकर बड़े खुलासे किए हैं। उन्होंने कहा साल 2002 में भारत और पाकिस्तान दोनों देश युद्ध के मुहाने पर खड़े थें। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि साल 2008 के मुंबई हमलों के पीछे अलकायदा नहीं बल्कि पाक समर्थित आतंकी संगठन थे। किरियाकू ने यह भी दावा किया कि अमेरिका अब्दुल कादिर खान को इस्राइली तरीके से खत्म कर सकता था, लेकिन सऊदी अरब के दबाव में उसे छोड़ दिया गया। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान भारत से कोई भी पारंपरिक युद्ध लड़ता है तो हार जाएगा।
जॉन किरियाकू ने 2002 के ऑपरेशन पराक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि हमें यकीन था कि भारत और पाकिस्तान युद्ध करने वाले हैं। हमारे परिवारों को इस्लामाबाद से बाहर भेज दिया गया था। उन्होंने बताया कि उस वक्त अमेरिकी डिप्टी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट ने दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच शटल कूटनीति की, जिससे तनाव कम हुआ। उन्होंने कहा कि 9/11 के बाद अमेरिका अलकायदा और अफगानिस्तान पर इतना केंद्रित था कि भारत-पाक संकट को नजरअंदाज कर दिया गया।
पाकिस्तान परमाणु पर अमेरिकी नियंत्रण का दावा
किरियाकू ने बताया कि 2002 में जब वे पाकिस्तान में सीआईए के आतंकवाद-रोधी प्रमुख थे, तब उन्हें अनौपचारिक रूप से बताया गया था कि पाकिस्तान के परमाणु हथियारों का नियंत्रण पेंटागन के पास है। उनका कहना था कि मुशर्रफ ने डर के चलते यह नियंत्रण अमेरिका को सौंप दिया था। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि पिछले दो दशकों में पाकिस्तानी सेना ने इसे सिरे से नकार दिया। किरियाकू ने कहा कि अगर अब पाकिस्तानी जनरल्स के पास नियंत्रण है, तो यह स्थिति बेहद खतरनाक है।
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ये भी पढ़ें- अमेरिका का कैरेबियन सागर में ड्रग्स माफिया पर हमला, रक्षा मंत्री हेगसेथ बोले- अल-कायदा की तरह खत्म करेंगे
मुंबई हमले पर किया बड़ा खुलासा
जॉन किरियाकू ने 2008 के मुंबई हमलों को लेकर कहा कि मुझे शुरू से ही यकीन था कि यह अलकायदा का नहीं, बल्कि पाकिस्तान समर्थित कश्मीरी समूहों का काम है और यही सच साबित हुआ। उन्होंने कहा कि असली कहानी यह थी कि पाकिस्तान भारत में आतंक फैला रहा था और दुनिया चुपचाप देखती रही। उन्होंने कहा कि भारत ने संसद हमले और मुंबई हमले दोनों के बाद संयम दिखाया, जिसे सीआईए में स्ट्रैटेजिक पेशेंस कहा गया, लेकिन अब भारत इस संयम को कमजोरी समझे जाने नहीं देगा।
भारत से टकराएगा तो हार जाएगा पाकिस्तान
किरियाकू ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पाकिस्तान को समझ लेना चाहिए कि भारत से लड़ाई में उसे कोई फायदा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अगर भारत और पाकिस्तान के बीच पारंपरिक युद्ध होता है, तो पाकिस्तान निश्चित रूप से हार जाएगा। यह परमाणु नहीं बल्कि सामान्य युद्ध की बात है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को अपनी नीति में यह बदलाव लाना चाहिए कि भारत से टकराव किसी भी रूप में उसके हित में नहीं है।
ये भी पढ़ें- 'आतंक के पीड़ित और गुनहगार एक नहीं...', जयशंकर ने पाकिस्तान पर साधा निशाना; UN पर भी कही ये बात
सऊदी अरब पर बड़ा खुलासा
पूर्व सीआईए अधिकारी ने पाकिस्तान के परमाणु वैज्ञानिक अब्दुल कादिर खान के बारे में खुलासा किया कि अगर अमेरिका ने इस्राइल जैसी नीति अपनाई होती, तो कादिर खान को खत्म कर दिया जाता। उन्होंने कहा कि हमें पता था वह कहां रहता है, उसका पूरा रूटीन पता था। लेकिन सऊदी सरकार ने कहा कि उसे छोड़ दो, वे खान के साथ काम कर रहे हैं। किरियाकू ने इसे अमेरिकी नीति की सबसे बड़ी गलती बताया और कहा कि सऊदी अरब की रुचि खुद की परमाणु क्षमता बढ़ाने में थी।
आएसआई की दोहरी भूमिका और आतंकी गठजोड़
किरियाकू ने बताया कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आएसआई दो हिस्सों में बंटी थी एक प्रोफेशनल, जो पश्चिमी एजेंसियों के साथ काम करती थी, और दूसरी जिसमें लंबी दाढ़ी वाले लोग थे, जिन्होंने जैश-ए-मोहम्मद और कश्मीरी आतंकी संगठनों को बनाया। उन्होंने कहा कि 2002 में लाहौर में लश्कर-ए-तैयबा के ठिकाने पर की गई छापेमारी में अलकायदा ट्रेनिंग मैनुअल मिला, जिससे पाकिस्तान सरकार की आतंकवाद में सीधी भागीदारी साबित हुई।
सऊदी-अमेरिका रिश्ते और बदलता वैश्विक समीकरण
किरियाकू ने कहा कि सऊदी-अमेरिका रिश्ते केवल तेल और हथियारों तक सीमित हैं। उन्होंने कहा कि हम उनका तेल खरीदते हैं, वे हमारे हथियार। बस इतना ही। उन्होंने दावा किया कि सऊदी सेना में ज्यादातर पाकिस्तानी सैनिक हैं जो जमीन पर सुरक्षा संभालते हैं। किरियाकू ने कहा कि अब दुनिया बदल रही है अमेरिका को अब तेल की जरूरत नहीं रही, सऊदी अब चीन और भारत से नजदीकियां बढ़ा रहा है। यह वैश्विक ताकतों के संतुलन में बड़ा बदलाव है।
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जॉन किरियाकू ने 2002 के ऑपरेशन पराक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि हमें यकीन था कि भारत और पाकिस्तान युद्ध करने वाले हैं। हमारे परिवारों को इस्लामाबाद से बाहर भेज दिया गया था। उन्होंने बताया कि उस वक्त अमेरिकी डिप्टी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट ने दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच शटल कूटनीति की, जिससे तनाव कम हुआ। उन्होंने कहा कि 9/11 के बाद अमेरिका अलकायदा और अफगानिस्तान पर इतना केंद्रित था कि भारत-पाक संकट को नजरअंदाज कर दिया गया।
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पाकिस्तान परमाणु पर अमेरिकी नियंत्रण का दावा
किरियाकू ने बताया कि 2002 में जब वे पाकिस्तान में सीआईए के आतंकवाद-रोधी प्रमुख थे, तब उन्हें अनौपचारिक रूप से बताया गया था कि पाकिस्तान के परमाणु हथियारों का नियंत्रण पेंटागन के पास है। उनका कहना था कि मुशर्रफ ने डर के चलते यह नियंत्रण अमेरिका को सौंप दिया था। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि पिछले दो दशकों में पाकिस्तानी सेना ने इसे सिरे से नकार दिया। किरियाकू ने कहा कि अगर अब पाकिस्तानी जनरल्स के पास नियंत्रण है, तो यह स्थिति बेहद खतरनाक है।
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मुंबई हमले पर किया बड़ा खुलासा
जॉन किरियाकू ने 2008 के मुंबई हमलों को लेकर कहा कि मुझे शुरू से ही यकीन था कि यह अलकायदा का नहीं, बल्कि पाकिस्तान समर्थित कश्मीरी समूहों का काम है और यही सच साबित हुआ। उन्होंने कहा कि असली कहानी यह थी कि पाकिस्तान भारत में आतंक फैला रहा था और दुनिया चुपचाप देखती रही। उन्होंने कहा कि भारत ने संसद हमले और मुंबई हमले दोनों के बाद संयम दिखाया, जिसे सीआईए में स्ट्रैटेजिक पेशेंस कहा गया, लेकिन अब भारत इस संयम को कमजोरी समझे जाने नहीं देगा।
भारत से टकराएगा तो हार जाएगा पाकिस्तान
किरियाकू ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पाकिस्तान को समझ लेना चाहिए कि भारत से लड़ाई में उसे कोई फायदा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अगर भारत और पाकिस्तान के बीच पारंपरिक युद्ध होता है, तो पाकिस्तान निश्चित रूप से हार जाएगा। यह परमाणु नहीं बल्कि सामान्य युद्ध की बात है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को अपनी नीति में यह बदलाव लाना चाहिए कि भारत से टकराव किसी भी रूप में उसके हित में नहीं है।
ये भी पढ़ें- 'आतंक के पीड़ित और गुनहगार एक नहीं...', जयशंकर ने पाकिस्तान पर साधा निशाना; UN पर भी कही ये बात
सऊदी अरब पर बड़ा खुलासा
पूर्व सीआईए अधिकारी ने पाकिस्तान के परमाणु वैज्ञानिक अब्दुल कादिर खान के बारे में खुलासा किया कि अगर अमेरिका ने इस्राइल जैसी नीति अपनाई होती, तो कादिर खान को खत्म कर दिया जाता। उन्होंने कहा कि हमें पता था वह कहां रहता है, उसका पूरा रूटीन पता था। लेकिन सऊदी सरकार ने कहा कि उसे छोड़ दो, वे खान के साथ काम कर रहे हैं। किरियाकू ने इसे अमेरिकी नीति की सबसे बड़ी गलती बताया और कहा कि सऊदी अरब की रुचि खुद की परमाणु क्षमता बढ़ाने में थी।
आएसआई की दोहरी भूमिका और आतंकी गठजोड़
किरियाकू ने बताया कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आएसआई दो हिस्सों में बंटी थी एक प्रोफेशनल, जो पश्चिमी एजेंसियों के साथ काम करती थी, और दूसरी जिसमें लंबी दाढ़ी वाले लोग थे, जिन्होंने जैश-ए-मोहम्मद और कश्मीरी आतंकी संगठनों को बनाया। उन्होंने कहा कि 2002 में लाहौर में लश्कर-ए-तैयबा के ठिकाने पर की गई छापेमारी में अलकायदा ट्रेनिंग मैनुअल मिला, जिससे पाकिस्तान सरकार की आतंकवाद में सीधी भागीदारी साबित हुई।
सऊदी-अमेरिका रिश्ते और बदलता वैश्विक समीकरण
किरियाकू ने कहा कि सऊदी-अमेरिका रिश्ते केवल तेल और हथियारों तक सीमित हैं। उन्होंने कहा कि हम उनका तेल खरीदते हैं, वे हमारे हथियार। बस इतना ही। उन्होंने दावा किया कि सऊदी सेना में ज्यादातर पाकिस्तानी सैनिक हैं जो जमीन पर सुरक्षा संभालते हैं। किरियाकू ने कहा कि अब दुनिया बदल रही है अमेरिका को अब तेल की जरूरत नहीं रही, सऊदी अब चीन और भारत से नजदीकियां बढ़ा रहा है। यह वैश्विक ताकतों के संतुलन में बड़ा बदलाव है।
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