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JK Assembly Polls: जम्मू-कश्मीर में चुनावों से पाकिस्तान को POK खोने का डर, इसलिए कराई SSG कमांडोज की घुसपैठ
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भारत में घुसपैठ के नापाक पाकिस्तानी मंसूबे
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अमर उजाला
विस्तार
जम्मू-कश्मीर में तीन चरणों में चुनाव होंगे और चार अक्तूबर को मतगणना के बाद वहां जल्द ही नई सरकार का गठन हो जाएगा। जम्मू-कश्मीर में 10 साल बाद 90 सीटों पर विधानसभा चुनाव होंगे। खुफिया सूत्रों का कहना है कि ये चुनाव ही पाकिस्तान के लिए जी का जंजाल बनी हुए हैं। लोकसभा चुनावों में जिस तरह से जम्मू-कश्मीर के लोगों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया था, उससे पाकिस्तान को अपने समूचे जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में अपनी पकड़ गंवाने का डर सता रहा है। वहीं, जब से भारत ने पीओके को भारत का अभिन्न हिस्सा बताया है, पाकिस्तान दहशत में है। वहीं, पिछले कुछ समय से पीओके में पाकिस्तान के खिलाफ बड़ा माहौल बन रहा है और वहां वे भी पाकिस्तान से आजादी के लिए लंबे समय से आंदोलन चला रहे हैं। जिससे पाकिस्तान की टेंशन बढ़ गई है। इसलिए पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर के चुनावों को बाधित करने के लिए आतंकी गतिविधियों का सहारा ले रहा है।गृह मंत्री अमित शाह के एलान से डरा पाकिस्तान
खुफिया एजेंसी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि 5 अगस्त 2019 को जब संसद में अनुच्छेद 370 को हटाने के लिए एतिहासिक विधेयक लाया गया था, तो उस समय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में एलान किया था, "न केवल जम्मू-कश्मीर हमारा है, बल्कि पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर भी हमारा है - हम इसके लिए मरेंगे और इसे वापस लेंगे।" इस बयान की सीमा पार जोरदार गूंज हुई थी, और पाकिस्तान के राजनीति औऱ सेना में में हड़कंप मच गया था। संदेश स्पष्ट था, भारत न केवल जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध था, बल्कि उसकी रणनीति पीओके को फिर से भारत का हिस्सा बनाने की है।
पीओके में भी लोगों को चाहिए पाकिस्तान से आजादी
सूत्रों ने बताया कि इस बदलाव ने पाकिस्तान को असमंजस और भय की स्थिति में ला दिया है। क्योंकि जिस तरह से पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों का घाटी से सफाया हुआ है, उससे पाकिस्तान को लग रहा है कि भारत जल्द ही पीओके को अपना हिस्सा बना लेगा। वहीं, पीओके में पिछले कुछ समय से चल रहे आजादी आंदोलनों से भी उसे इसकी वास्तविकता का अंदाजा हो रहा है। जिससे पाकिस्तान में हताशा की भावना बढ़ रही है, जिसके चलते वह जम्मू में आतंकी गतिविधियों को बढ़ाने की चाल चल रहा है। सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुलवामा हमले के बाद जिस तरह से कश्मीर से आतंकवाद को हमेशा के लिए खत्म करने की कसम खाई। उनके शब्द केवल बयानबाजी नहीं थे; वे जमीन पर निर्णायक कार्रवाई की बड़ी तैयारी से जुटे हुए थे। बालाकोट हवाई हमले सहित भारत के निरंतर आतंकवाद विरोधी अभियानों ने कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों पर काफी हद तक काबू पाया। पिछले कुछ सालों में आतंकी संगठन स्थानीय आतंकियों की भर्ती नहीं कर पा रहे थे, वह दिखाता है कि जम्मू-कश्मीर की अवाम भी पाकिस्तान के साथ नहीं है।
पीओके से भारत का ध्यान हटाना चाहता है पाकिस्तान
सूत्रों के मुताबिक पीओके में बढ़ रहे आजादी आंदोलनों से उसकी वहां पकड़ भी ढीली पड़ रही है। जिसे देखते हुए, पाकिस्तान एक ऐसी रणनीति अपना रहा है, जिसका उद्देश्य भारत के सुरक्षा बलों को अपनी सीमाओं के भीतर ही व्यस्त रखना है। जम्मू-कश्मीर में हमलों को तेज करके, पाकिस्तान ऐसी स्थिति पैदा करना चाहता है, जहां भारतीय सेनाएं आंतरिक सुरक्षा हालातों में इतनी उलझ जाएं कि वे पीओके पर ध्यान केंद्रित ही न कर पाएं। इसी के चलते ही पाकिस्तान अब भारत में आम आतंकियों की घुसपैठ नहीं करा रहा है। बल्कि पाकिस्तानी सेना के स्पेशल सर्विस ग्रुप कमांडो को भारत में घुसपैठ कराई है, ताकि वे भारतीय फौजों पर घातक हमले करें और भारत को ज्यादा से ज्यादा जवानों की वहां तैनाती करनी पड़े। वहीं, पाकिस्तान की रणनीति यह भी है कि आम स्थानीय आतंकियों पर भारतीय सेना आसानी से काबू कर लेती है। वहीं, भारतीय सेना पर एसएसजी कमांडोज की कार्रवाई भारतीय खबरों की सुर्खियां बनेंगी, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ेगा और सरकार का पीओके से ध्यान हट जाएगा।
एसएसजी कमांडो की घुसपैठ कराने की यह है वजह
सूत्रों ने बताया कि एसएसजी कमांडो की घुसपैठ पाकिस्तान की इस कोशिश को दिखाती है कि वह हमलों को इतना तेज कर दें, कि भारतीय सेना को उतनी ही तीव्रता से जवाब देने के लिए मजबूर होना पड़े। हालांकि, यह रणनीति पाकिस्तान की हताशा और डर को दर्शाती है। पीओके पर सीधे टकराव में शामिल होने के बजाय, पाकिस्तान भारत को लंबे समय तक आंतरिक संघर्ष में घसीटने की कोशिश कर रहा है, ताकि भारत पीओके को फिर से पाने का सपना छोड़ दे। पीओके खोने के डर से पाकिस्तान को एसएसजी कमांडो की घुसपैठ करानी पड़ रही है। भारतीय सेना का भी मानना है कि जम्मू-कश्मीर में हाल ही में हुए हमले आम आतंकवादियों का काम नहीं हैं, बल्कि पाकिस्तान के एसएसजी कमांडो का काम है। आतंकियों के खिलाफ अभियानों में जिस तरह से अत्याधुनिक अमेरिकी एम4 कार्बाइन जैसे हथियारों की बरामदगी हुई है, उससे साफ पता चलता है कि इन हमलों के पीछे एसएसजी कमांडो का हाथ है।
पाकिस्तान पर भारी पड़ सकता है यह दांव
सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान को भले ही लगता हो कि उसकी मौजूदा रणनीति भारत को उलझाए रखेगी, लेकिन यह उल्टे पाकिस्तान पर भारी पड़ सकती है। स्थिति को और बिगाड़कर पाकिस्तान की हरकतें उसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर और भी अलग-थलग कर सकती हैं। सीमा पार ऑपरेशन में एलीट कमांडो का इस्तेमाल आक्रामकता की कार्रवाई के तौर पर देखा जा सकता है, जिसकी वैश्विक समुदाय निंदा कर सकता है। जिसके चलते पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव बढ़ सकता है। इसकी वजह से पीओके के मुद्दे पर पाकिस्तान की स्थिति और कमजोर हो सकती है। सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान की हरकतों के मूल में एक बुनियादी डर छिपा है- पीओके का नुकसान। दशकों से पाकिस्तान ने इस क्षेत्र पर जबरन अपना कब्जा बनाए रखा है। लेकिन भारत के मुखर रुख ने पीओके पर पाकिस्तान की पकड़ को लगातार कमजोर किया है। अनुच्छेद 370 को निरस्त करने और उसके बाद जम्मू-कश्मीर के भारतीय संघ में विलय से पाकिस्तान की स्थिति और कमजोर हुई है।
चुनावों के चलते जम्मू-कश्मीर में हिंसा करवा रहा पाकिस्तान
जुलाई का महीना भारत के सुरक्षा बलों के लिए विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण रहा है। जम्मू इलाके में अचानक हिंसा में हुई बढ़ोतरी को जम्मू-कश्मीर के चुनावों से जोड़ कर देखा जा रहा है। जम्मू क्षेत्र को 15 साल पहले आतंकवाद-मुक्त घोषित कर दिया गया था। लेकिन अब हमले न केवल एलओसी से सटे पुंछ और राजौरी में हो रहे हैं, बल्कि कठुआ, उधमपुर, डोडा और अब दक्षिण कश्मीर में भी हो रहे हैं। 31 जुलाई तक के आंकड़ों के मुताबिक 2019 में अनुच्छेद 370 हटाने के बाद वहां केवल 3 आतंकी वारदातें हुई थीं, जिसमें 3 आतंकी मारे गए थे। वहीं, 2020 में 14 आतंकी वारदातें हुईं, जिनमें 18 आतंकी मारे गए। इन हमलों में 1 सुरक्षा कर्मी शहीद हुआ। 2021 में 21 आंतकी हमलों में 11 आतंकी मारे गए और 14 सुरक्षा कर्मियों की मृत्यु हुई। साल 2022 में 19 आतंकी हमलों में 14 आतंकी मौत के घाट उतार दिए। वहीं, पांच सुरक्षा कर्मी शहीद हुए। 2023 में कुछ 23 आतंकी हमले हुए, जिनमें 22 आतंकी मारे गए। इन हमलों में 20 सुरक्षा कर्मियों की मौत हुई। जबकि, 2024 में 31 जुलाई तक 13 आतंकी हमले हो चुके हैं। आतंकरोधी कार्रवाई में 5 आतंकी मारे गए। वहीं आतंकियों का मुकाबले करते हुए 13 जवानों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।
परिसीमन के बाद बढ़ीं सीटें
जम्मू-कश्मीर में परिसीमन के बाद राज्य में विधानसभा सीटें बढ़ कर 90 हो गईं हैं। पहली बार अनुसूचित जनजाति के लिए 9 सीटें आरक्षित हैं। अनुसूचित जाति के लिए भी सीटों के आरक्षण का प्रावधान है। नई विधानसभा में महिलाओं की संख्या भी बढ़ेगी। जम्मू संभाग में जहां पहले 37 सीटें थीं, जो अब बढ़कर 43 हो गईं। इसी तरह कश्मीर संभाग में पहले 46 सीटें थीं, जो अब बढ़कर 47 हो गईं हैं।