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'प्रसाद' पर बवाल: ब्राह्मण नेता पूछ रहे- क्या जितिन उन सवालों के जवाब दे पाएंगे जो उन्होंने खुद उठाए थे?

Sat, 12 Jun 2021 06:32 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 12 Jun 2021 06:32 PM IST
सार

कांग्रेसी नेता जितिन प्रसाद के बारे में बताते हैं कि उन्होंने पार्टी में ऊंचे पद पर होते हुए भी ब्राह्मणों की आवाज उठाई थी। ऐसा करते हुए उन्होंने अपनी ही पार्टी के नेताओं का विरोध करने में भी कोई गुरेज नहीं किया। जब जनवरी 2021 में राजस्थान के भरतपुर में एक ब्राह्मण समुदाय की नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म की घटना घटी, तब भी उन्होंने राजस्थान सरकार के खिलाफ आवाज उठाई...

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Jitin Prasada form Brahman Chetna parishad and raised the voice againt Yogi adityanath for attrocities against brahmans
भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ जितिन प्रसाद - फोटो : twitter.com/JPNadda

विस्तार

जितिन प्रसाद के भाजपा में शामिल होते ही कांग्रेस के वे तमाम ब्राह्मण नेता खासे नाराज हैं जो उनके साथ योगी राज में ब्राह्मणों पर होने वाले कथित जुल्मों का मुद्दा उठा रहे थे। जितिन प्रसाद कई बार ब्राह्मणों के मंच पर योगी सरकार पर तीखी टिप्पणी करते रहे हैं और उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण कल्याण बोर्ड के गठन का मुद्दा भी उठाते रहे हैं। अब ये नेता कह रहे हैं कि जितिन भाजपा में जाकर अब ब्राह्मणों को न्याय दिलाएं, उनके लिए मजबूती से खड़े हों। कई कांग्रेसी तो उन्हें सही अर्थों में ब्राह्मण नेता ही मानने से इनकार करते हैं।  

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ब्राह्मण चेतना परिषद संगठन बनाकर ब्राह्मण युवाओं को अपने साथ जोड़ने वाले और ब्राह्मणों पर हो रहे अत्याचारों का मुद्दा जोरशोर से उठाने वाले जितिन अब क्या करेंगे, ये सवाल उनके पुराने लोग उनसे पूछ रहे हैं। कांग्रेसी में रहते हुए कांग्रेस शासित राज्यों में भी ब्राह्मण परिवारों पर हुए हमलों के खिलाफ आवाज उठाने वाले जितिन ने कई बार योगी आदित्यनाथ सरकार को भी कटघरे में खड़ा किया था, इसी साल मार्च में पंजाब की कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार ने ‘ब्राह्मण कल्याण बोर्ड’ का गठन किया था, तब उन्होंने इसकी तारीफ की थी। उन्होंने उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों की दयनीय स्थिति का हवाला देते हुए प्रदेश में भी ब्राह्मण कल्याण बोर्ड की जरूरत बताई थी। कई ब्राह्मण कांग्रेसी सवाल उठा रहे हैं कि अब जब चुनावों का मौसम है तो क्या जितिन योगी सरकार से ब्राह्मण कल्याण बोर्ड का गठन करने की मांग कर पाएंगे?
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जिन ब्राह्मण परिवारों के लोगों की हत्याएं हुई थीं, जितिन प्रसाद या उनके संगठन ब्राह्मण चेतना परिषद् के लोग उनके यहां शोक प्रकट करने जाते रहे हैं। जितिन प्रसाद के भाजपा से जुड़ने पर इन परिवारों को यह उम्मीद जरूर बंधी होगी कि शायद अब उनके साथ न्याय होगा। क्या उनकी यह उम्मीदें पूरी होंगी।

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ब्राह्मणों के लिए कांग्रेस सरकारों को भी घेरा  

कांग्रेसी नेता ब्राह्मणों को लेकर समय-समय पर आवाज़ उठाने वाले जितिन प्रसाद के बारे में बताते हैं कि उन्होंने पार्टी में ऊंचे पद पर होते हुए भी ब्राह्मणों की आवाज उठाई थी। ऐसा करते हुए उन्होंने अपनी ही पार्टी के नेताओं का विरोध करने में भी कोई गुरेज नहीं किया। जब जनवरी 2021 में राजस्थान के भरतपुर में एक ब्राह्मण समुदाय की नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म की घटना घटी, तब भी उन्होंने राजस्थान सरकार के खिलाफ आवाज उठाई। ब्राह्मण चेतना परिषद् के कार्यकर्ताओं को भेजकर 22 जनवरी 2021 को पीड़ित परिवार को सांत्वना भी दी। उन्होंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से दोषियों पर तत्काल कार्रवाई की मांग भी की।

जब कांग्रेस नेता डॉ. नितिन राउत ने 21 मार्च 2021 को एक ट्वीट कर ब्राह्मणों के दान और मंदिरों पर तथाकथित अधिकार की बात उठाई, तो उन्होंने इसका कड़ा विरोध किया। उन्होंने 22 मार्च 2021 को नितिन राउत के ट्वीट का जवाब देते हुए लिखा कि ब्राह्मण किसी व्यवस्था पर काबिज नहीं होना चाहता। ब्राह्मण केवल उन्हीं कर्तव्यों की पूर्ति कर रहे हैं जिसे समाज ने उसे आदिकाल से सौंपा है।   

ब्राह्मणों के सवाल पर उत्तर प्रदेश सरकार को भी घेरा जितिन प्रसाद ने उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों पर हो रहे अत्याचार को बड़ा मुद्दा बनाया। इसके लिए उन्होंने योगी आदित्यनाथ को भी कटघरे में खड़ा किया और कहा कि जब-जब प्रदेश में ब्राह्मणों की हत्याएं होती हैं, योगी आदित्यनाथ चुप्पी साध जाते हैं। उनके संगठन ब्राह्मण चेतना परिषद् ने भी ब्राह्मणों पर हुए हमलों पर मुखर विरोध किया।

उनकी ट्विटर टाइम लाइन को देखने से पता चलता है कि जब अम्बेडकर नगर के थाना राजेसुल्तानपुर में जब 5 जनवरी 2021 को मिश्रा बंधुओं की हत्या की गई, तब ब्राह्मण चेतना परिषद् के कार्यकर्ताओं ने 7 जनवरी 2021 को पीड़ित परिवार के घर पहुंचकर परिवार को सांत्वना दी।

लखनऊ व्यापार मंडल के अध्यक्ष सुजीत पांडे की 21 दिसंबर 2020 को हुई हत्या के बाद भी जितिन प्रसाद ने यह मुद्दा उठाया और अपराधियों की गिरफ्तारी की मांग की। मिर्जापुर के बामी गांव में तीन ब्राह्मण नाबालिग बच्चों की हत्या के बाद भी ब्राह्मण चेतना परिषद के कार्यकर्ताओं ने 5 दिसंबर 2020 को पीड़ित परिवार से मुलाकात की और न्याय की मांग की।
 

Jitin Prasada form Brahman Chetna parishad and raised the voice againt Yogi adityanath for attrocities against brahmans
योगी आदित्यनाथ के साथ जितिन प्रसाद - फोटो : Agency (File Photo)

‘योगी जी, ब्राह्मण यहां न रहें तो कहां जाएं'?

जितिन प्रसाद ने ब्राह्मणों की आवाज उठाते हुए योगी आदित्यनाथ पर हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि जब ब्राह्मणों की हत्याएं होती हैं, तब योगी आदित्यनाथ की आवाज नहीं निकलती। उन्होंने कहा था कि उत्तर प्रदेश को ब्राह्मणों के लिए अछूत बना दिया गया है। उन्होंने कहा था कि ऐसा प्रतीत होता है कि ब्राह्मणों के हत्यारों को सरकार का सीधे संरक्षण प्राप्त है। जब से भाजपा सत्ता में आई उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों के ऊपर अत्याचार की बाढ़ आ गई है। यह कहते हुए उन्होंने एक लिस्ट भी साझा की थी, जिसमें उत्तर प्रदेश में हुई ब्राह्मणों की मौतों का जिक्र भी किया गया था।
 

ख़ुशी दुबे की गिरफ्तारी जितिन प्रसाद से बड़ा मुद्दा

उत्तर प्रदेश भाजपा के एक ब्राह्मण नेता ने अमर उजाला से कहा कि जितिन प्रसाद को पार्टी में लाकर केंद्रीय नेतृत्व यह सोच रहा है कि इससे ब्राह्मण मतदाता उसकी तरफ मुड़ जाएंगे। जबकि सच्चाई यह है कि जितिन प्रसाद के आने से भाजपा को कोई विशेष लाभ नहीं होने वाला है। उलटे बिकरू काण्ड के अपराधी अमर दुबे की नाबालिग पत्नी ख़ुशी दुबे को जेल में डालने से ब्राह्मण समुदाय के लोग सरकार से नाराज हैं।    

नेता ने कहा कि कानपुर, लखनऊ, शेष अवध और पश्चिम क्षेत्र में ख़ुशी दुबे की गिरफ्तारी बड़ा मुद्दा बनती जा रही है। ब्राह्मण समुदाय के लोगों का कहना है कि जिस लड़की का विवाह दो-तीन दिन पहले ही अमर दुबे के घर में हुआ था, उसे तो ठीक-ठीक अपने पति के विषय में भी कोई जानकारी नहीं रही होगी। ऐसे में उसे अपराधी की भांति जेल में बंद रखकर योगी आदित्यनाथ सरकार पूरी भाजपा का नुकसान कर रहे हैं।

कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने अमर उजाला से कहा कि जितिन प्रसाद उनके साथ मिलकर उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों पर हो रहे अत्याचारों के विरुद्ध आवाज उठाते रहे हैं। अब जब वे उसी दल में पहुंच गये हैं, उम्मीद करनी चाहिए कि वे योगी आदित्यनाथ से कह कर ब्राह्मण परिवारों को न्याय दिलाने का काम करेंगे। प्रमोद कृष्णम ने कहा कि प्रदेश में ब्राह्मणों की खराब हालत और जुल्मों के लिए क्या करेंगे, बताएं। वे सरकार से कहकर प्रदेश में ब्राह्मण कल्याण बोर्ड का गठन कराएं। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो उनके इरादों पर शक तो होगा ही, उस भाजपा के इरादों पर भी सवाल खड़े होंगे जो एक जितिन प्रसाद को अपने खेमें में ले जाकर यह सोच रही है कि उनके आने से ब्राह्मण उसे वोट कर देंगे।

उन्होंने कहा कि ब्राह्मण अब नौकरी ही नहीं चाहता। 1989 के बाद उत्तर प्रदेश में कोई ब्राह्मण मुख्यमंत्री नहीं बना है, जबकि इसी 31 सालों में ठाकुर, वैश्य, यादव और दलित हर समुदाय से मुख्यमंत्री बन चुके हैं। उनकी कांग्रेस नेतृत्व से भी मांग है कि वह किसी ब्राह्मण को मुख्यमंत्री का चेहरा बनाकर चुनाव लड़े।

'जितिन प्रसाद ब्राह्मण नेता नहीं'

मेरठ से कांग्रेस नेता अभिमन्यु त्यागी को लगता है कि जितिन प्रसाद का कांग्रेस से जाना एक मनोवैज्ञानिक कारण तो हो सकता है लेकिन इसका वोटों पर कोई असर नहीं पड़ने वाला। उन्होंने कहा कि जितिन प्रसाद ब्राह्मण सुमदाय के नेता नहीं हैं। एक भी ब्राह्मण उनके नाम पर भाजपा को वोट नहीं देने वाला है।
 



जितिन प्रसाद प्रियंका गांधी के साथ किसानों-मजदूरों की आवाज उठा रहे थे। अगर वे ऐसा ही करते रहते तो शायद समाज के एक बड़े वर्ग का उन्हें साथ मिलता, लेकिन वे उसी भाजपा से जा मिले जिससे किसान-मजदूर परेशान हैं। ऐसे में उन्हें कोई विशेष तवज्जो नहीं मिलने वाली।

परिवार कांग्रेस के लिए बुरा नक्षत्र साबित हुआ

कांग्रेसी नेता विश्वनाथ चतुर्वेदी ने कहा कि प्रसाद परिवार कांग्रेस के लिए हमेशा से ‘अपशकुन’ साबित हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पिता जितेन्द्र प्रसाद ने एक के बाद एक कई ऐसे निर्णय किए जिससे कांग्रेस उत्तर प्रदेश में कमजोर होती गई। पहले तो जितेन्द्र प्रसाद की सलाह पर ही मुलायम सिंह को समर्थन देकर उनकी सरकार तब बचाई गई, जब भाजपा ने अपना समर्थन वापस लेकर उसे गिराने की पटकथा लिख दी थी।

उनके मुताबिक़ यह गलत निर्णय था। इसी निर्णय के बाद कांग्रेस दूसरों की बैशाखी पर चलने लगी। उन्होंने कहा कि जितेन्द्र प्रसाद परिवार कभी भी ब्राह्मणों की पहचान से जुड़ा नहीं रहा। पूर्वांचल हो या पश्चिम, भाजपा को इसका कहीं कोई लाभ नहीं मिलने वाला।

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