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मोदी के बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर जापान करेगा 80 फीसदी इनवेस्ट

Wed, 21 Dec 2016 05:33 PM IST
टीम डिजिटल / अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल / अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 21 Dec 2016 05:33 PM IST
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Japan agree to cooperate 80 percent fund for the bullet train in India
जापान  ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट बुलेट ट्रेन को लेकर भारत को करीब 80 प्रतिशत तक सहयोग देने का आश्वासन दिया हैं। बताया जा रहा है कि भारत और जापान के बीच एलिवेटिड बुलेट ट्रेन के कॉरिडोर पर सहमति बन गई है। बुलेट ट्रेन का पहला कॉरिडोर मुंबई  और अहमदाबाद के बीच बनाया जायेगा।
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सुत्रों की  माने तो पीएम के पसंदीदा  प्रोजेक्ट में करीब 1000 करोड़ रुपये का खर्चा हैं। वहीं जापान भी भारत में  बुलेट  ट्रेन के इस प्रोजेक्ट  को लेकर काफी उत्सुक भी है।  भारतीये रेलवे की माने तो इस प्रोजक्ट में  जमीन समय से न मिल पाने का कारण देरी हो रही हैं। जापान सरकार पुरे प्रोजेक्ट की लागत का करीब 80 फीसदी लागत खुद लगाने को तैयार हैं।
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गौरतलब  है कि भारत और जापान के लोन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर होने के बाद अगले साल से बुलेट ट्रेन को भारत में लाने का रास्ता साफ हो जायेगा। संभव  हैं 2017 में दोनों देश के बीच दस्तावेजों पर हस्ताक्षर होंगे। रेल मंत्री सुरेश प्रभु का कहा है कि अगर दोनों देशों के बीच सभी दस्तावेजों पर सहमति बन जाएगी तो भारत में 2023 तक बुलेट ट्रेन शुरू हो जाएगी।
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Japan agree to cooperate 80 percent fund for the bullet train in India
इस प्रोजेक्ट से जुड़ी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट  (डीपीआर) को केंद्र सरकार को सौंप दिया गया है। इस रिपोर्ट में 25 प्रतिशत एलिवेटिड  कॉरिडोर, 64 प्रतिशत  धरातल कॉरिडोर और 6 प्रतिशत भूमिगत कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव हैं। जापान की इस ट्रेन का 21 किमी  का  रास्ता थाणे और विरार नदी के बीच भी होगा।

अधिकारिक सुत्रों की माने तो बुलेट ट्रेन के लिए एलिवेटिड रास्ता बनाना थोड़ा मुश्किल भरा है, क्योंकि एलिवेटिड रास्ते के लिए बड़ी मात्रा में भूमि अधिग्रहण करना सरकार के लिए मुश्किल  होगा। सरकार द्वारा इस प्रोजेक्ट में कुछ बदलाव की खबर भी है, बताया जा रहा है कि इस समय बुलेट ट्रेन के प्रोजेक्ट की कीमत लगभग 97,636 करोड़  हैं लेकिन कुछ बदलाव के बाद इसकी लागत करीब 1.08 लाख करोड़ पहुंचने की संभावना है।

आपको बता दें कि भारत में बुलेट ट्रेन को लाना प्रधानमंत्री का ड्रीम  प्रोजेक्ट है, इसलिए सराकर ने भी सुनिश्चित किया है कि इस  प्रोजेक्ट के किसी भी तरह की कानून  बाधाओं से नहीं गूजरनाा पड़ेगा। वहीं  2015  में नियन्त्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट की माने तो भूमि समय पर न मिलने के कारण  भारतीय रेलवे की करीब  400 परियोजनायें रुकी हुई हैं।  
 
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