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जंतर-मंतर: इस बार गृह मंत्री शाह की सलाह पर चली दिल्ली पुलिस; अतीत के ट्रेंड्स, आईबी इनपुट पर बनी एडवांस प्लान
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एसआईआर के खिलाफ जंतर मंतर पर प्रदर्शन
- फोटो : PTI
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के अभियान को रोकने की मांग को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों एवं छात्र संगठनों ने शुक्रवार को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया। हालांकि दिल्ली पुलिस को प्रदर्शनकारियों को संभालने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ी, लेकिन 'बल प्रयोग' जैसी नौबत नहीं आई। बीस जुलाई के हिंसक प्रदर्शन से सबक लेते हुए इस बार दिल्ली पुलिस ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सलाह पर काम किया। धरना-प्रदर्शन को लेकर अतीत के ट्रेंड्स का सूक्ष्मता से अध्ययन किया गया, आईबी के इनपुट जुटाए गए और फिर नई दिल्ली के लिए एक 'एडवांस प्लानिंग' तैयार की गई।
क्या है गृह मंत्री शाह की 'प्लानिंग'
महाराष्ट्र में भी 'सीजेपी' के प्रदर्शन के दौरान उक्त प्लानिंग को लागू किया गया। इसके अलावा दूसरे राज्यों के पुलिस बलों में भी केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा उक्त प्लानिंग पर काम करने का सुझाव दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने पिछले दिनों 'राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन' में कहा था कि पीएम मोदी ने 2047 में विकसित भारत का लक्ष्य रखा है। विकसित भारत की पहली शर्त है, मजबूत आंतरिक सुरक्षा। हर क्षेत्र में सर्वप्रथम बनना है तो आंतरिक सुरक्षा और सुदृढ़ करनी ही पड़ेगी। 'राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन', का यह फोरम आने वाले 15-20 वर्षों के ट्रेंड्स देखकर तय करे कि कौन-सी समस्या उठ सकती है और उसे रोकने की रणनीति क्या हो।
एआई के जरिए 'तरीके' की पहचान करें आईपीएस
शाह ने कहा था कि सीसीटीएनएस, अंतर–प्रचलित आपराधिक न्याय प्रणाली (आईसीजेएस), नेटग्रिड और नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (एनएएफआईएस) का इंटीग्रेटेड डेटा बैंक बनाया गया है। शाह ने सभी युवा आईपीएस अफसरों से एआई के जरिए डेटा इंटीग्रेशन, एनालिसिस और तरीके की पहचान करने की अपील की थी। उन्होंने सुझाव दिया था कि इससे वे कार्रवाई योग्य इंटेलिजेंस विकसित कर सकेंगे। यह संभव हुआ तो भविष्य की चुनौतियों को उनके घटित होने से पहले ही रोका जा सकेगा।
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दिल्ली पुलिस ने किया 'शाह' की सलाह पर अमल
दिल्ली पुलिस ने गृह मंत्री 'शाह' की सलाह पर अमल करते हुए शुक्रवार के प्रदर्शन को लेकर एडवांस प्लानिंग कर ली थी। प्रदर्शन में कितने लोग शामिल हो सकते हैं, उनके रूट क्या होंगे और जंतर मंतर से पंद्रह किलोमीटर के दायरे में ट्रांसपोर्ट का मुख्य साधन कौन सा है। इस आधार पर प्रदर्शनकारियों के साथ शांतिपूर्वक तरीके से निपटने की रणनीति बनाई गई। दर्जनभर मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए। 15 किमी की दूरी तक के मार्गों पर बेरिकेट लगाए गए। लिंक रोड पर फोर्स तैनात की गई। खास बात यह रही कि इस बार मेट्रो स्टेशन, प्रदर्शन की भीड़ को देखकर नहीं, बल्कि उन्हें पहले से ही बंद करने का आदेश जारी कर दिया गया। जंतर मंतर के आसपास स्थित मेट्रो स्टेशनों पर एक अक्तूबर की रात को ही अतिरिक्त बल तैनात कर दिया गया। यह इसलिए किया गया कि ताकि रात के दौरान प्रदर्शनकारियों की मूवमेंट पर नजर रखी जा सके।
आईबी ने रखी 'सोशल मीडिया' पर नजर
खुफिया एजेंसी 'आईबी' के मल्टी एजेंसी सेंटर 'मैक' में प्रदर्शन को लेकर सोशल मीडिया पर खास नजर रखी गई। दिल्ली एनसीआर के सभी रूटों की वीडियो ग्राफी कराई गई। विदेशी फंडिंग और बाहरी स्पोर्ट, इस पर भी नजर रखी गई। प्रदर्शन को लेकर दूसरे राज्यों से रिपोर्ट ली गई कि वहां तो ऐसा कुछ नहीं है। इसके अलावा विभिन्न मार्गों पर लगे बैरिकेट पर नई दिल्ली जिला पुलिस की चेतावनी वाले बैनर लटके हुए थे। इन पर लिखा था कि यहां भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू है। पांच या इससे अधिक व्यक्ति या समूह इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का धरना प्रदर्शन वर्जित है। इसका उल्लंघन करने पर कानूनी कार्यवाही की जाएगी।
इस बार पिछले ट्रेंड्स पर हुआ काम
बीस जुलाई के हिंसक प्रदर्शन से सीख लेते हुए दिल्ली पुलिस ने ऐसे प्रदर्शनों के पिछले ट्रेंड्स नोट किए थे। उसी आधार पर इस दफा नई दिल्ली क्षेत्र में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी 'आईएसआई' द्वारा किसी भी तरह के प्रदर्शन में युवाओं को गुमराह करने के लिए फर्जी सोशल मीडिया हैंडल का उपयोग, इस पर साइबर यूनिट की नजर रही। प्रदर्शन को उग्र और हिंसात्मक बनाने के लिए ऐसे असामाजिक तत्व, जिनकी पूर्व में आपराधिक पृष्ठभूमि रही है, इस पर भी तकनीकी सिस्टम से नजर रखी गई। इंटरनेट बंद किए जाने की स्थिति में दूसरे तरीकों से सोशल मीडिया पर हिंसा को दिखाना, इसे लेकर भी पुलिस एवं केंद्रीय एजेंसियां सचेत रहीं।
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क्या है गृह मंत्री शाह की 'प्लानिंग'
महाराष्ट्र में भी 'सीजेपी' के प्रदर्शन के दौरान उक्त प्लानिंग को लागू किया गया। इसके अलावा दूसरे राज्यों के पुलिस बलों में भी केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा उक्त प्लानिंग पर काम करने का सुझाव दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने पिछले दिनों 'राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन' में कहा था कि पीएम मोदी ने 2047 में विकसित भारत का लक्ष्य रखा है। विकसित भारत की पहली शर्त है, मजबूत आंतरिक सुरक्षा। हर क्षेत्र में सर्वप्रथम बनना है तो आंतरिक सुरक्षा और सुदृढ़ करनी ही पड़ेगी। 'राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन', का यह फोरम आने वाले 15-20 वर्षों के ट्रेंड्स देखकर तय करे कि कौन-सी समस्या उठ सकती है और उसे रोकने की रणनीति क्या हो।
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एआई के जरिए 'तरीके' की पहचान करें आईपीएस
शाह ने कहा था कि सीसीटीएनएस, अंतर–प्रचलित आपराधिक न्याय प्रणाली (आईसीजेएस), नेटग्रिड और नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (एनएएफआईएस) का इंटीग्रेटेड डेटा बैंक बनाया गया है। शाह ने सभी युवा आईपीएस अफसरों से एआई के जरिए डेटा इंटीग्रेशन, एनालिसिस और तरीके की पहचान करने की अपील की थी। उन्होंने सुझाव दिया था कि इससे वे कार्रवाई योग्य इंटेलिजेंस विकसित कर सकेंगे। यह संभव हुआ तो भविष्य की चुनौतियों को उनके घटित होने से पहले ही रोका जा सकेगा।
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दिल्ली पुलिस ने किया 'शाह' की सलाह पर अमल
दिल्ली पुलिस ने गृह मंत्री 'शाह' की सलाह पर अमल करते हुए शुक्रवार के प्रदर्शन को लेकर एडवांस प्लानिंग कर ली थी। प्रदर्शन में कितने लोग शामिल हो सकते हैं, उनके रूट क्या होंगे और जंतर मंतर से पंद्रह किलोमीटर के दायरे में ट्रांसपोर्ट का मुख्य साधन कौन सा है। इस आधार पर प्रदर्शनकारियों के साथ शांतिपूर्वक तरीके से निपटने की रणनीति बनाई गई। दर्जनभर मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए। 15 किमी की दूरी तक के मार्गों पर बेरिकेट लगाए गए। लिंक रोड पर फोर्स तैनात की गई। खास बात यह रही कि इस बार मेट्रो स्टेशन, प्रदर्शन की भीड़ को देखकर नहीं, बल्कि उन्हें पहले से ही बंद करने का आदेश जारी कर दिया गया। जंतर मंतर के आसपास स्थित मेट्रो स्टेशनों पर एक अक्तूबर की रात को ही अतिरिक्त बल तैनात कर दिया गया। यह इसलिए किया गया कि ताकि रात के दौरान प्रदर्शनकारियों की मूवमेंट पर नजर रखी जा सके।
आईबी ने रखी 'सोशल मीडिया' पर नजर
खुफिया एजेंसी 'आईबी' के मल्टी एजेंसी सेंटर 'मैक' में प्रदर्शन को लेकर सोशल मीडिया पर खास नजर रखी गई। दिल्ली एनसीआर के सभी रूटों की वीडियो ग्राफी कराई गई। विदेशी फंडिंग और बाहरी स्पोर्ट, इस पर भी नजर रखी गई। प्रदर्शन को लेकर दूसरे राज्यों से रिपोर्ट ली गई कि वहां तो ऐसा कुछ नहीं है। इसके अलावा विभिन्न मार्गों पर लगे बैरिकेट पर नई दिल्ली जिला पुलिस की चेतावनी वाले बैनर लटके हुए थे। इन पर लिखा था कि यहां भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू है। पांच या इससे अधिक व्यक्ति या समूह इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का धरना प्रदर्शन वर्जित है। इसका उल्लंघन करने पर कानूनी कार्यवाही की जाएगी।
इस बार पिछले ट्रेंड्स पर हुआ काम
बीस जुलाई के हिंसक प्रदर्शन से सीख लेते हुए दिल्ली पुलिस ने ऐसे प्रदर्शनों के पिछले ट्रेंड्स नोट किए थे। उसी आधार पर इस दफा नई दिल्ली क्षेत्र में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी 'आईएसआई' द्वारा किसी भी तरह के प्रदर्शन में युवाओं को गुमराह करने के लिए फर्जी सोशल मीडिया हैंडल का उपयोग, इस पर साइबर यूनिट की नजर रही। प्रदर्शन को उग्र और हिंसात्मक बनाने के लिए ऐसे असामाजिक तत्व, जिनकी पूर्व में आपराधिक पृष्ठभूमि रही है, इस पर भी तकनीकी सिस्टम से नजर रखी गई। इंटरनेट बंद किए जाने की स्थिति में दूसरे तरीकों से सोशल मीडिया पर हिंसा को दिखाना, इसे लेकर भी पुलिस एवं केंद्रीय एजेंसियां सचेत रहीं।