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'सात दिनों में इस्तीफा दें धर्मेंद्र प्रधान': CJP मुखिया दीपके का अल्टीमेटम, देशव्यापी आंदोलन का फूंका बिगुल
Sun, 07 Jun 2026 06:03 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sun, 07 Jun 2026 06:03 PM IST
सार
दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले हजारों छात्रों और युवाओं ने शिक्षा व्यवस्था में कमियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। आंदोलन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के लिए सात दिनों का अल्टीमेटम दिया है। इस शांतिपूर्ण आंदोलन को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का भी पूरा समर्थन मिला है।
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अभिजीत दीपके
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
देश की राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर बड़े आंदोलन का गवाह बना। रविवार को 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार को दो टूक चेतावनी दे दी। उन्होंने साफ कहा कि जंतर-मंतर पर हुआ प्रदर्शन तो महज एक ट्रेलर था। अगर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अगले सात दिनों में इस्तीफा नहीं दिया या उन्हें पद से नहीं हटाया गया, तो यह आंदोलन देशव्यापी रूप अख्तियार कर लेगा।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखे अपने पोस्ट में दीपके ने शनिवार के प्रदर्शन को ऐतिहासिक करार दिया। उन्होंने कहा कि यह भारी भीड़ देश की शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ युवाओं और छात्रों के गुस्से का प्रतीक है। दीपके ने लिखा, 'कल हजारों लोगों ने मिलकर एक नया इतिहास रचा। जंतर-मंतर पर हमारे शांतिपूर्ण प्रदर्शन ने सरकार को यह दिखा दिया कि जब आम जनता एकजुट होती है, तो उसमें कितनी ताकत होती है।'
पहली बार सड़कों पर उतरा युवा
इस प्रदर्शन की सबसे खास बात यह रही कि इसमें शामिल होने वाले अधिकांश लोग पहली बार किसी आंदोलन का हिस्सा बने थे। भीषण गर्मी और तपती धूप के बावजूद छात्र, नौजवान और बच्चे बड़ी संख्या में अपनी आवाज उठाने पहुंचे थे। दीपके के मुताबिक, सामूहिक उपस्थिति ने लोगों को हिम्मत दी। इसी हौसले के दम पर उन्होंने शिक्षा प्रणाली के खिलाफ अपना गुस्सा खुलकर जाहिर किया। उन्होंने सभी समर्थकों का आभार जताते हुए कहा कि जब तक हम अपनी आवाज बुलंद नहीं करेंगे, तब तक व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं आ सकता।
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यह भी पढ़ें: फ्लॉप या हिट: कैसा रहा कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन? अब अभिजीत दीपके ने बताया जंतर-मंतर पर कितना समर्थन मिला
सात दिन की समयसीमा और आर-पार की जंग
आंदोलनकारियों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। दीपके ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर पूरी एक पीढ़ी का भविष्य बर्बाद करने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई यहीं खत्म होने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर सात दिन के भीतर शिक्षा मंत्री अपने पद से नहीं हटते हैं, तो हम जमीन पर उतरकर बड़े पैमाने पर आंदोलन जारी रखने के लिए मजबूर होंगे। आंदोलन के तरीकों पर बात करते हुए उन्होंने साफ किया कि उनका अभियान पूरी तरह शांतिपूर्ण और अहिंसक रहेगा, क्योंकि एकजुट और शांतिपूर्ण आंदोलन को सरकार कभी दबा नहीं सकती।
दिग्गज सामाजिक कार्यकर्ताओं का मिला साथ
शनिवार को हुए इस प्रदर्शन में देश के कई राज्यों से लोग पहुंचे थे। मंच से छात्रों, शिक्षकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार की शिक्षा नीतियों की जमकर आलोचना की। इस आंदोलन को उस समय और मजबूती मिली जब मशहूर पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी छात्रों के समर्थन में जंतर-मंतर पहुंचे। वांगचुक ने प्रदर्शनकारियों की मांगों को जायज ठहराया। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह युवाओं और छात्रों की इन गंभीर चिंताओं को बिना किसी देरी के सुने और उन पर तुरंत कदम उठाए।
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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखे अपने पोस्ट में दीपके ने शनिवार के प्रदर्शन को ऐतिहासिक करार दिया। उन्होंने कहा कि यह भारी भीड़ देश की शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ युवाओं और छात्रों के गुस्से का प्रतीक है। दीपके ने लिखा, 'कल हजारों लोगों ने मिलकर एक नया इतिहास रचा। जंतर-मंतर पर हमारे शांतिपूर्ण प्रदर्शन ने सरकार को यह दिखा दिया कि जब आम जनता एकजुट होती है, तो उसमें कितनी ताकत होती है।'
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पहली बार सड़कों पर उतरा युवा
इस प्रदर्शन की सबसे खास बात यह रही कि इसमें शामिल होने वाले अधिकांश लोग पहली बार किसी आंदोलन का हिस्सा बने थे। भीषण गर्मी और तपती धूप के बावजूद छात्र, नौजवान और बच्चे बड़ी संख्या में अपनी आवाज उठाने पहुंचे थे। दीपके के मुताबिक, सामूहिक उपस्थिति ने लोगों को हिम्मत दी। इसी हौसले के दम पर उन्होंने शिक्षा प्रणाली के खिलाफ अपना गुस्सा खुलकर जाहिर किया। उन्होंने सभी समर्थकों का आभार जताते हुए कहा कि जब तक हम अपनी आवाज बुलंद नहीं करेंगे, तब तक व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं आ सकता।
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सात दिन की समयसीमा और आर-पार की जंग
आंदोलनकारियों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। दीपके ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर पूरी एक पीढ़ी का भविष्य बर्बाद करने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई यहीं खत्म होने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर सात दिन के भीतर शिक्षा मंत्री अपने पद से नहीं हटते हैं, तो हम जमीन पर उतरकर बड़े पैमाने पर आंदोलन जारी रखने के लिए मजबूर होंगे। आंदोलन के तरीकों पर बात करते हुए उन्होंने साफ किया कि उनका अभियान पूरी तरह शांतिपूर्ण और अहिंसक रहेगा, क्योंकि एकजुट और शांतिपूर्ण आंदोलन को सरकार कभी दबा नहीं सकती।
दिग्गज सामाजिक कार्यकर्ताओं का मिला साथ
शनिवार को हुए इस प्रदर्शन में देश के कई राज्यों से लोग पहुंचे थे। मंच से छात्रों, शिक्षकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार की शिक्षा नीतियों की जमकर आलोचना की। इस आंदोलन को उस समय और मजबूती मिली जब मशहूर पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी छात्रों के समर्थन में जंतर-मंतर पहुंचे। वांगचुक ने प्रदर्शनकारियों की मांगों को जायज ठहराया। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह युवाओं और छात्रों की इन गंभीर चिंताओं को बिना किसी देरी के सुने और उन पर तुरंत कदम उठाए।