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फ्लॉप या हिट: कैसा रहा कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन? अब अभिजीत दीपके ने बताया जंतर-मंतर पर कितना समर्थन मिला

Sun, 07 Jun 2026 01:19 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Sun, 07 Jun 2026 01:19 PM IST
सार

Cockroach Janta Party Protest: जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन को लेकर अब चर्चा तेज हो गई है। सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके ने दावा किया कि हजारों युवा, छात्र और अभिभावक आंदोलन में शामिल हुए और यह सरकार के लिए सिर्फ ट्रेलर है। दीपके ने चेतावनी दी कि अगर धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा नहीं दिया तो आंदोलन और बड़ा किया जाएगा। आइए, विस्तार से जानते इस प्रदर्शन पर सभी राजनतिक दलों और वैश्विक मीडिया ने इसे कैसे देखा और क्या कहा...

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How Cockroach Janta Party perform Abhijit Dipke revealed level of support received at Jantar Mantar
कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के प्रदर्शन को लेकर अब बहस तेज हो गई है। कोई इसे युवाओं की नई आवाज बता रहा है तो कोई इसे सोशल मीडिया का असर कह रहा है। इस बीच सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दावा किया है कि जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन ने सरकार को ट्रेलर दिखा दिया है कि अगर युवा एकजुट हो जाएं तो बड़ा आंदोलन खड़ा हो सकता है। दीपके ने कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है और अगर सात दिन के भीतर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान नहीं हटाए गए तो आंदोलन और बड़ा होगा।
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ये प्रदर्शन अब सिर्फ सोशल मीडिया या छात्र आंदोलन तक सीमित नहीं रहा। इस आंदोलन को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया से लेकर देश की बड़ी राजनीतिक पार्टियों तक की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। बेरोजगारी, परीक्षा घोटालों और युवाओं की नाराजगी को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अब राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया है।
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वैश्विक मीडिया ने क्या कहा?

  • ब्रिटेन के अखबार द टेलीग्राफ ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि सीजेपी भारत में बढ़ती बेरोजगारी, परीक्षा घोटालों और राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ नाराजगी का प्रतीक बनकर उभरी है। रिपोर्ट में कहा गया कि यह आंदोलन युवाओं के भीतर बढ़ रहे असंतोष को दिखाता है।
  • अमेरिकी अखबार द वॉशिंगटन पोस्ट ने लिखा कि सीजेपी उन युवाओं की आवाज बन रही है जो परीक्षा गड़बड़ियों, बेरोजगारी और सामाजिक मुद्दों से परेशान हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि यह सोशल मीडिया पर मिली लोकप्रियता को जमीनी समर्थन में बदलने की कोशिश है।
  • समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने इसे सरकार के खिलाफ उभरने वाले सबसे बड़े ऑनलाइन अभियानों में से एक बताया। रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में 15 से 29 वर्ष के करीब 40 करोड़ युवा हैं और उनके लिए पर्याप्त नौकरियां पैदा करना बड़ी चुनौती बना हुआ है।

राजनीतिक दलों ने क्या प्रतिक्रिया दी?

  • भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि कुछ ताकतें देश के युवाओं को नकारात्मक राजनीति की तरफ धकेलने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने कहा कि विदेशों में बैठे कुछ लोग यह मानकर चल रहे हैं कि वे भारत के युवाओं को दिशा दे सकते हैं।
  • शिवसेना (उद्धव) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि युवाओं को “कॉकरोच” कहना गलत है। उन्होंने कहा कि यही युवा अब अपनी मांगों के लिए आवाज उठा रहे हैं और सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए।
  • समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सीजेपी प्रदर्शन का वीडियो साझा करते हुए लिखा, “यह आवाज अहंकारी शासकों तक पहुंचे, युवाओं ने अब क्रांति का बिगुल बजा दिया है।”
  • एनसीपी (एसपी) के महासचिव रोहित पवार ने कहा कि सीजेपी को मिल रहा समर्थन यह दिखाता है कि देश के युवाओं में केंद्र सरकार की नीतियों और बड़ी परीक्षाओं में कथित लापरवाही को लेकर गुस्सा बढ़ रहा है।
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प्रदर्शन के बाद क्या बोले अभिजीत दीपके?

अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि कल हममें से हजारों लोगों ने इतिहास रचा। जंतर-मंतर पर हमारे शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन ने सरकार को दिखा दिया कि जब हम एकजुट होते हैं, तो कॉकरोच क्या-क्या कर सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि कल हमारे साथ शामिल होने वाले  ज्यादातर लोगों ने पहले कभी किसी विरोध प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लिया था। लेकिन हमारी सामूहिक मौजूदगी से उन्हें हिम्मत मिली कि वे शिक्षा व्यवस्था के प्रति अपना गुस्सा और निराशा जाहिर कर सकें। अगर हम अपनी आवाज नहीं उठाएंगे, तो बदलाव नहीं आ सकता।

दीपके ने आगे कहा कि मैं आप सभी का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं। छोटे बच्चों और छात्रों समेत, जिन्होंने गर्मी की तेज धूप का सामना किया और यह साबित किया कि शांतिपूर्ण विरोध ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। सरकार एक एकजुट और शांतिपूर्ण आंदोलन का कुछ नहीं बिगाड़ सकती। हम कॉकरोचों को उनसे कभी डरने की ज़रूरत नहीं है। लेकिन बात यहीं खत्म नहीं होती। धर्मेंद्र प्रधान ने पूरी एक पीढ़ी के साथ अन्याय किया है। अगर उन्हें हटाया नहीं गया या वे अगले सात दिनों में खुद पद से नहीं हटे, तो हमें जमीन पर अपना विरोध जारी रखने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
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