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'जन-गण-मन और वंदे मातरम बराबर नहीं': केंद्र के फैसले पर ओवैसी बोले- संविधान, भारत के लोगों से शुरू होता है

Fri, 08 May 2026 10:28 AM IST
रिया दुबे पीटीआई, हैदारबाद
पीटीआई, हैदारबाद Published by: रिया दुबे Updated Fri, 08 May 2026 10:28 AM IST
सार

एआईएमआईएम प्रमुख ओवैसी ने केंद्र सरकार के उस फैसले का विरोध किया है, जिसमें 'वंदे मातरम' को 'जन गण मन' के समान कानूनी संरक्षण देने का प्रस्ताव मंजूर किया गया है। ओवैसी ने कहा कि राष्ट्र किसी देवी-देवता के नाम पर नहीं चलता और 'वंदे मातरम' को राष्ट्रगान के बराबर नहीं रखा जा सकता।

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Jana Gana Mana and Vande Mataram are not equal, Owaisi on Centre's decision
केंद्र के फैसले पर क्या बोले ओवैसी? - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार के उस फैसले पर आपत्ति जताई है, जिसमें वंदे मातरम को राष्ट्रीय गान जन गण मन के समान वैधानिक संरक्षण देने का प्रस्ताव मंजूर किया गया है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम को राष्ट्रगान के बराबर नहीं माना जा सकता, क्योंकि यह एक देवी की स्तुति है।

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ओवैसी ने क्या कहा?

ओवैसी ने गुरुवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि जन गण मन भारत और उसके लोगों का उत्सव मनाता है, किसी विशेष धर्म का नहीं। धर्म राष्ट्र नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि वंदे मातरम लिखने वाले बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ब्रिटिश शासन के प्रति सहानुभूति रखते थे और मुसलमानों के प्रति नकारात्मक सोच रखते थे। ओवैसी ने दावा किया कि नेताजी बोस, गांधी, नेहरू और टैगोर ने भी इसे राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार नहीं किया था।

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संविधान का क्या दिया हवाला?

संविधान का हवाला देते हुए ओवैसी ने कहा कि प्रस्तावना हम भारत के लोग से शुरू होती है, न कि भारत माता के नाम से। उन्होंने कहा कि संविधान भारत को राज्यों का संघ बताता है और देश किसी देवी-देवता के नाम पर नहीं चलता।

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ओवैसी ने यह भी कहा कि संविधान सभा में प्रस्तावना को देवी या ईश्वर के नाम से शुरू करने और उसके नागरिकों की जगह उसकी प्रजा लिखने जैसे संशोधन प्रस्तावित किए गए थे, लेकिन उन्हें खारिज कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि भारत यानी भारत के लोग। राष्ट्र कोई देवी नहीं है और यह किसी एक देवी-देवता का नहीं है।

भाजपा ने किया पलटवार

इस बीच तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष एन रामचंदर राव ने ओवैसी के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि एआईएमआईएम नेतृत्व सांस्कृतिक एकीकरण को धार्मिक अलगाववाद के लिए खतरे के रूप में देखता है। उन्होंने कहा कि मोहम्मद अली जिन्ना ने भी अपने राजनीतिक जीवन के शुरुआती दौर में वंदे मातरम का विरोध नहीं किया था, लेकिन कांग्रेस छोड़ने के बाद उनका रुख बदल गया।

रामचंदर राव ने कहा कि एआईएमआईएम केवल वंदे मातरम ही नहीं, बल्कि समान नागरिक संहिता, तीन तलाक समाप्त करने और साझा राष्ट्रीय ढांचे के अन्य प्रयासों का भी विरोध करती रही है। उनके मुताबिक, यह राजनीति धार्मिक अलगाववाद और वोट बैंक की सोच से प्रेरित है।



दरअसल, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके तहत वंदे मातरम के गायन में बाधा डालना दंडनीय अपराध माना जाएगा। इस संशोधन के बाद वंदे मातरम को भी जन गण मन के समान कानूनी संरक्षण मिलेगा।

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